श्री नारायण धर्म परिपालन योगम” मंदिरो में प्रवेश के लिए केरल की धरती पर दलितों की लड़ाई
By: Shikha
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श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) ने केरल में दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए मंदिरों में प्रवेश और सामाजिक समानता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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श्री नारायण गुरु ने 1903 में डॉ. पद्मनाभन पाल्पु के साथ मिलकर श्री नारायण धर्म परिपालन योगम की स्थापना की।
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इसका मुख्य उद्देश्य एझावा जैसे वंचित समुदायों का सामाजिक और आध्यात्मिक उत्थान करना था, जिन्हें छुआछूत और भेदभाव का सामना करना पड़ता था।
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जातिगत भेदभाव और मंदिरों में प्रवेश से वंचित किए जाने के विरोध में, श्री नारायण गुरु ने स्वयं कई मंदिरों की स्थापना की।
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1888 में अरुविप्पुरम में एक शिवलिंग की स्थापना करके उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों पर उच्च जातियों के एकाधिकार को चुनौती दी।
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उन्होंने इन मंदिरों में दलित पुजारियों को भी नियुक्त किया, जिससे धार्मिक सत्ता का विकेंद्रीकरण हुआ।
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SNDP ने केवल मंदिर प्रवेश पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि शिक्षा, स्वच्छता और आर्थिक विकास जैसे सामाजिक सुधारों को भी बढ़ावा दिया।