बौद्ध भिक्षु सिर क्यों मुंडवाते हैं?
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By: Shikha
बौद्ध धर्म में, भिक्षु (या भिक्खु, पुरुष संत) और
भिक्षुणी (महिला संत) कई कारणों से अपना सिर मुंडवाते हैं।
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ये परंपराएं त्याग,
सादगी और धार्मिक जीवन के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।
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सिर मुंडवाना यह दर्शाता है कि
भिक्षु ने घर-रहित जीवन (अनागारिकत्व) को स्वीकार कर लिया है।
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यह सांसारिक लगाव, सुख-सुविधाओं और
बाहरी दिखावे को छोड़ने का एक शक्तिशाली दृश्य प्रतीक है।
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बौद्ध भिक्षुओं और भिक्षुणियों के लिए निर्धारित
विनय (नियमों की संहिता) में सिर के बालों को पूरी तरह से मुंडवाना अनिवार्य है।
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यह नियम संघ के
अनुशासन और पहचान का एक हिस्सा है।
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सभी भिक्षुओं के लिए समान रूप से
सिर मुंडवाना सादगी और समता को बढ़ावा देता है।
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यह व्यक्तिगत सौंदर्य या फैशन की चिंता को समाप्त करता है,
जिससे सभी सदस्य बाहरी रूप से एक जैसे दिखते हैं।
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