Bodhgaya Protest: बोधगया मुक्ति आंदोलन हुआ तेज, भिक्षुओं का संघ सड़क पर उतरा

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Bodhgaya Protest:  बोधगया, वह पवित्र स्थान जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति की थी, जो की आज एक महत्वपूर्ण विवाद का केंद्र बन चुका है। महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय के हाथों में न होने के कारण यह मामला गरमा गया है। बौद्ध धर्म के अनुयायी लंबे समय से इस मांग को दोहराते आ रहे हैं कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का संपूर्ण नियंत्रण बौद्धों को सौंप दिया जाए। जी हाँ पिछले कुछ समय से बौद्ध समुदाय अनशन पर बैठे है। तो चलिए आपको इस लेख पुरे मामले के बारे में बताते है।

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महाबोधि मंदिर प्रबंधन विरोध

महाबोधि महाविहार मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग को लेकर बौद्ध भिक्षुओं द्वारा भूख हड़ताल की गई थी। इस कदम के बाद बौद्ध समुदाय में भारी रोष है। इस विरोध में 28 फरवरी 2025 को देश भर के जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन दिए गए। इसके बाद 6 मार्च को धरना और 12 मार्च को रैली का आयोजन किया जाएगा। अंत में, बोधगया में लाखों लोगों की विशाल महारैली निकाली जाएगी। बता दें, यह विरोध सिर्फ एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को बचाने की लड़ाई है।

वही भूख हड़ताल पर बैठे साधुओं का कहना है कि उनकी मांगें वही हैं जो तख्ती पर लिखी हैं। सरकार से बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है। वही ताजा अपडेट ये है कि 28 फरवरी की सुबह प्रशासन ने भूख हड़ताल पर बैठे साधुओं को उठा लिया है। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। हालांकि साधुओं का कहना है कि भूख हड़ताल अभी खत्म नहीं हुई है, प्रदर्शन के लिए दूसरी जगह तय की जा रही है।

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जानें बोधगया टेंपल और एक्ट 1949

भगवान बुद्ध को लगभग ढाई हजार साल पहले बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस महत्वपूर्ण स्थल पर स्थित मंदिर को महाबोधि मंदिर कहा जाता है, जो बौद्ध धर्म के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माने जाते हैं। महाबोधि मंदिर परिसर का निर्माण सबसे पहले सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। इतिहास की पुस्तकों के अनुसार, वर्तमान मंदिर का निर्माण 5वीं से 6वीं शताब्दी के बीच हुआ था, और यह गुप्त काल के अंतिम चरण का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। इसे यूनेस्को ने 2002 में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था।

महाबोधि मंदिर की देखरेख बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के जिम्मे है। परंतु, इसके पूर्व हमें 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम (BTMC) की व्याख्या करनी होगी। इसी अधिनियम के आधार पर बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) का गठन किया गया था। बोधगया टेंपल एक्ट और बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) बोधगया में महाबोधि मंदिर के प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण विषय है। जो मंदिर के कार्यों का प्रबंधन करती है। यह समिति महाबोधि मंदिर के प्रशासन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। वही इस कमेटी में नौ सदस्य होते हैं, जिनमें से कुछ हिंदू और कुछ बौद्ध होते हैं।  इसके अलवा कमेटी के अध्यक्ष गया जिले के जिलाधिकारी होते हैं।

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