Bodhgaya: बोधगया में महाबोधि महाविहार मुक्ति आमरण अनशन आंदोलन का 10वां दिन

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Bodhgaya: महाबोधि महाविहार में पिछले कुछ दिनों से चल रहे मुक्ति अमरण भूख हड़ताल आंदोलन का आज 10वां दिन है। इस आंदोलन में बिहार और उत्तर प्रदेश से हजारों लोग शामिल हुए हैं। आरजेडी विधायक सतीश दास ने भी इस आंदोलन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया है। यह आंदोलन महाबोधि महाविहार की सुरक्षा और इसके प्रबंधन से जुड़ी मांगों को लेकर चलाया जा रहा है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में बताते है।

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जानें क्या है पूरा मामला 

भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार में ब्राह्मण महंतों के धंधे से मुक्ति पाने के लिए बौद्ध भिक्षुओं का आमरण अनशन आंदोलन 11वें दिन में प्रवेश कर गया है। इसके बावजूद बिहार व केंद्र ने अब तक भिक्षुओं के स्वास्थ्य या भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि की परवाह नहीं की है। लगातार अनशन के कारण भिक्षुओं का अनशन जारी है, लेकिन उनके आसन पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विलास खरात कहते हैं कि आंदोलन स्थल पर हजारों की संख्या में लोग जुटे हुए हैं और वैज्ञानिकों का भी समर्थन मिल रहा है। कट्टरपंथियों के समर्थक सिद्धार्थ दास भी आंदोलन में शामिल हुए और कहा कि महाबोधि महाविहार में गैर बौद्ध लोग दान के पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने प्रसाद यादव द्वारा बनाए गए नियमों का जिक्र किया, जिसमें महाविहार के सचिव का बौद्ध होना भी शामिल था, लेकिन इस नियम की अनदेखी की गई।

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आंदोलन का कारण

आंदोलनकारियों का आरोप है कि महाविहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है, और उनकी मांग है कि इसे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में घोषित किया जाए। समर्थन में आए लोगों ने शांति से प्रदर्शन किया और आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता दिखाई।

आरजेडी नेता ने बीटीएमसी एक्ट ( BTMC Act) 1949 को निरस्त करने की मांग की। आपको बता दें कि महाबोधि मंदिर के प्रबंधन के लिए 1949 में बोधगया मंदिर अधिनियम बनाया गया था। इस मंदिर के प्रबंधन के लिए आपको नौ सदस्यीय बोधगया मंदिर स्थिरता समिति (बीटीएमसी) का गठन करना होगा। हालांकि, इन नौ सदस्यों में से केवल चार बौद्ध हैं, जबकि मुख्य अध्यक्ष (जिला मजिस्ट्रेट) सहित पांच सदस्य हिंदू हैं। पुरोहितों का कहना है कि इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था ने बौद्धों को उनके सबसे पवित्र स्थल का प्रबंधन करने के अधिकार से वंचित कर दिया है, जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

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