Wakf Amendment Bill: बीते दिन एनसीपी (सपा) नेता जितेंद्र आव्हाड ने सरकार पर ईसाई और दलित समुदायों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का अगला निशाना ईसाई और दलित समुदाय हैं। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में बताते है।
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जानें क्या कहाँ जितेंद्र आव्हाड ने
इन दिनों देश की सभी पार्टियों के नेताओं ने वक्फ बोर्ड की चर्चा को लेकर मोर्चा खोल रखा है। सभी अपने-अपने तर्क देकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इसी बीच आधव ने कल सरकार पर निशाना साधा है, दरअसल पत्रिका में वक्फ (संशोधन) वक्फ, 2025 पर विवाद और चर्चा जारी है। इस बीच राजकुमार (शरद राव) नेता चौधरी आव्हाड ने इस विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एडवोकेट आव्हाड ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि अभी सरकार साधिका पर इस तरह से हमला कर रही है। उनके कट्टर समर्थक ईसाई और दलित हैं।
आव्हाड का तर्क है कि वक्फ संपत्तियां दान की जाती हैं और उनका उपयोग गरीबों, समुदायों और धर्म के लोगों के हित में किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन जमीनों में हस्तक्षेप क्यों कर रही है, जबकि ये धार्मिक उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर पूरे देश में विवाद और चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन समाज के कल्याण के लिए होनी चाहिए। विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। आव्हाड ने यह भी सवाल किया कि सरकार ईसाई और दलित समुदायों की संपत्तियों में हस्तक्षेप क्यों कर रही है, जिन पर चर्च और हिंदू मंदिरों का कब्जा है। वक्फ बोर्ड को जबरन थोपा जा रहा है। यह जमीन किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह धार्मिक उद्देश्य के लिए समर्पित जमीन है।
आव्हाड के बयान के मुख्य बात
एनसीपी (सपा) नेता जितेंद्र आव्हाड ने वक्फ संपत्तियों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि ये जमीनें किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के पूर्वजों द्वारा दान की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन जमीनों का इस्तेमाल मुसलमानों की शिक्षा और कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इन संपत्तियों का दुरुपयोग करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आव्हाड ने आगे कहा कि देश में कई ऐतिहासिक स्थल और जमीनें वक्फ के अधीन हैं, जिनमें हुमायूं का मकबरा और दिल्ली में लाल किला भी शामिल है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन संपत्तियों में हस्तक्षेप क्यों कर रही है, जबकि ये धार्मिक उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं।
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