दलितों को साधने की कोशिश में कांग्रेस, बिहार में अध्यक्ष पद और दिल्ली में बैठक

Rahul Gandhi, Congress Party Biggest Change
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Congress: कांग्रेस लगातार अपने पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करने और स्थापित करने का प्रयास कर रही है। बिहार में दलित नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाना और दिल्ली में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित करना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। वही हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने बिहार में बड़ा बदलाव करके दलित अध्यक्ष राजेश कुमार की नियुक्ति की है। यह नियुक्ति राहुल गांधी के दलित वोटरों पर फोकस के मुताबिक है। तो चलिए आपको इस लेख में कांग्रेस पार्टी में हो रहे लगातार बदलाव के बारे में बताते है।

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बिहार में दलित कार्ड

कांग्रेस पार्टी अगर 2024 के लोकसभा चुनावों में सीटों की संख्या 99 तक पहुंचाने में सफल हो जाती, तो ऐसा लगता कि उसके दिन फिर से बहुरने वाले हैं। लेकिन कुछ ही महीनों में उम्मीदें धुंधली होने लगीं। हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस और उसके समर्थकों में ऐसी निराशा फैला दी, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी की छवि, जो समर्थकों के बीच एक हीरो के रूप में उभरी थी, अब फिर से कमजोर पड़ गई है और सवाल उठने लगे हैं। अब नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसे लेकर पार्टी तैयारी में जुटी गयी है और दलित वोटों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।

दरअसल, बीते बुधवार के दिन कांग्रेस ने दलित समुदाय से आने वाले राजेश कुमार को बिहार में प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इस कदम को बिहार में दलित वोटों को आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस का लक्ष्य बिहार में अपना खोया हुआ जनाधार फिर से हासिल करना है, जहां पार्टी का चार दशकों से राजनीतिक दबदबा रहा है। इसे राहुल गांधी की दलित राजनीति को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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दिल्ली में पार्टी की बैठक

हाल ही में कांग्रेस ने दिल्ली में जिला कांग्रेस कमेटियों (डीसीसी) के अध्यक्षों की बैठक आयोजित की है। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना है। इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पार्टी गुजरात में पायलट प्रोजेक्ट के जरिए संगठन को मजबूत करने की योजना बना रही है। आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने और दलितों व पिछड़ों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि पार्टी का पुराना रुतबा फिर से कायम हो सके।

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