BJP जिलाध्यक्षों की सूची उत्तर प्रदेश में अटकी, दिल्ली से आया निर्देश, 25% महिलाओं और दलितों को शामिल करें

Uttar Pradesh Government, Bjp District President List
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List of BJP District Presidents: हाल ही में दिल्ली चुनाव संपन्न हुआ हैं और दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी है, दिल्ली को नया मुख्यमंत्री भी मिल गया है। इन सबके बाद बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। जिसके बाद यूपी में चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी ने यूपी में तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसके लिए बीजेपी अब जिला अध्यक्षों की लिस्ट में ‘महिला और दलित’ का फॉर्मूला लागू करने के बाद नई लिस्ट जारी करने की योजना बना रही है।

बीजेपी जिलाध्यक्षों कि लिस्ट नहीं हुई स्पष्ट

उत्तर प्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की लिस्ट के संदर्भ में स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हुई है। पूर्व में कयास लगाए जा रहे थे कि 20 फरवरी तक नामों की घोषणा कर दी जाएगी। वही 70 जिलाध्यक्षों की सूची का भी ख्याल रखा जा रहा था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ गया है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी अब जिलाध्यक्षों की सूची में ‘महिला और दलित’ का फॉर्मूला लागू करने के बाद नई सूची जारी करने की योजना बना रही है।

सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश बीजेपी जिलाध्यक्षों की सूची में एक नया राजनीतिक समीकरण स्थापित करने के लिए दिल्ली से निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस सूची में 25 प्रतिशत महिलाओं और दलितों को शामिल करने के लिए निर्देशित किया गया है। बीजेपी का यह महिला और दलित फॉर्मूला आगामी यूपी विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों के मद्देनजर लागू किया गया है। अर्थात, उत्तर प्रदेश के लगभग 98 संगठनात्मक जिलों में करीब 25 नाम महिला और दलित अध्यक्षों के होंगे।

जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर मंथन

यह ध्यान देने योग्य है कि लगभग डेढ़ महीने से जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर मंथन जारी है। पहले, कुछ जिलों में जिलाध्यक्षों के नामों पर असहमति स्पष्ट रूप से देखने को मिली। कई जिलों में अध्यक्ष पद के नामों को लेकर विभाजन भी हुआ। इस मुद्दे पर पार्टी ने रायशुमारी के माध्यम से 70 जिलों की सूची तैयार की, लेकिन दिल्ली आलाकमान से इस पर रोक लगा दी गई।
सूत्रों के अनुसार, नए फॉर्मूले को लागू करने में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। यह कहा जा रहा है कि योग्यताओं की कमी और पैनल में अनुपलब्धता के कारण महिला और दलित का फॉर्मूला जिलाध्यक्ष पद के लिए सही तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त, यदि संख्या बढ़ती है, तो अगड़ा और पिछड़ा वर्ग के फॉर्मूले में भी असंतुलन आ जाएगा। कई जिलाध्यक्ष, जो दोबारा कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे थे, उनके सपने अधूरे रह जाएंगे। आरएसएस, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के समीरकण को संतुलित करना भी सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

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