दलित युवक की पुलिस हिरासत में मौत, बसपा ने की सीबीआई जांच की मांग

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Azamgarh news: कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जहां पुलिस हिरासत में एक दलित लड़के की मौत हो गई थी। जिसके बाद उत्तर प्रदेश बीएसपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में दलित युवक सनी की मौत की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की है।

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जानें क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के तरवां थाने में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत हो गई। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात आरोपी सनी कुमार शौच के लिए बाथरूम गया था, जहां उसने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने के बाहर प्रदर्शन किया। जिसके बाद कई बड़ी पार्टियों और दलित संगठनो ने न्याय कि मांग करते हुए सरकार पर निशाना भी साधा है और दलित परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की है।

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बसपा अध्यक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की

इधर, बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर आजमगढ़ बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल उमरी श्री गांव पहुंचे और मृतक शनि के परिजनों से मुलाकात की। जिसके बाद विश्वनाथ पाल ने कहा कि परिवार को पुलिस पर भरोसा नहीं है, क्योंकि पुलिस कस्टडी में ही युवक की मौत हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है, इसलिए सीबीआई जांच जरूरी है। वही पाल ने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश में एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और गरीब तबके के साथ ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने सरकार से इस पर ध्यान देने की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने की न्याय की मांग

मृतक के परिवार का कहना है कि पुलिस ने हिरासत में उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। परिवार का कहना है कि किसी भी आरोपी को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखना गैरकानूनी है, लेकिन पुलिस ने सनी को 3 दिन तक थाने में रखा। उनका आरोप है कि पुलिस ने उसे प्रताड़ित किया, जिसके चलते वह मानसिक रूप से टूट गया और उसने आत्महत्या कर ली। परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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