Karnataka: कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एक दलित व्यक्ति को 13.91 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है, जिसने जातिगत हमले में अपना हाथ खो दिया था। यह निर्णय राज्य सरकार की सामाजिक न्याय और समानता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में बताते है।
और पढ़े: Uttar Pardesh: सहारनपुर में दलित समाज का थाने पर प्रदर्शन, छेड़छाड़ के आरोपियों पर कार्रवाई की मांग
जानें क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक समाज कल्याण विभाग ने 32 वर्षीय दलित व्यक्ति अनीश कुमार के लिए कृत्रिम अंग की लागत को पूरा करने के लिए 13.91 लाख रुपये जारी किए हैं, जिन्होंने पिछले साल जाति के आधार हमले में अपना बायां हाथ खो दिया था। जिसे लेकर कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने 28 मार्च, 2025 के आदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियम, 1995 का हवाला दिया गया है, जिसके तहत जातिगत हिंसा के पीड़ितों के लिए मुआवज़ा देने का प्रावधान है। समाज कल्याण विभाग ने हमले की गंभीरता को देखते हुए “विशेष मामले” के तौर पर इस राशि को मंज़ूरी दी।
और पढ़े: प्रतापगढ़ में दलित युवती की हत्या पर बवाल, सीओ समेत कई पुलिसकर्मी घायल
हमले में हाथ कटा
दरअसल, 21 जुलाई, 2024 को कर्नाटक (एससी) समुदाय के दलित व्यक्ति अनीश कुमार पर वोक्कालिगा समुदाय के सात लोगों ने उस समय हमला किया, जब वह अपने चाचा के साथ घूम रहा था। तभी हमलावरों ने पहले जातिवादी हमला किया और फिर अनीश के घर में घुसकर उसके परिवार पर हमला किया और उसका हाथ काट दिया। जिसके बाद अनीश को बेंगलुरु के सेंट जॉन्स अस्पताल ले जाया गया, जबकि उसके परिवार का कनकपुरा के सरकारी अस्पताल में इलाज किया गया।
वही इस मामले को लेकर स्थनीय पुलिस ने एससी/एसटी (SC-ST Act) अधिनियम, 2015 और भारतीय दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या का प्रयास, दंगा और आपराधिक धमकी शामिल है। अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
सामाजिक न्याय
आपको बता दें यह घटना जातिगत भेदभाव और हिंसा का एक गंभीर उदाहरण है, जो दुर्भाग्य से आज भी समाज में मौजूद है। वही सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता से पीड़ित को अपना जीवन फिर से संवारने में मदद मिलेगी। यह निर्णय समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है कि सरकार जातिगत हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़ी है। ऐसे कदम सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।