भारत के महान समाज सुधारक और भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सम्मानित किया जा रहा है। हाल ही में, अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब वहां की 61 स्ट्रीट ब्रॉडवे सड़क का नाम भारत रत्न बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के नाम पर रखा गया। यह नामकरण उनके संघर्ष और उनके सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है, और यह पूरे भारत और अंबेडकरवादियों के लिए गर्व का क्षण है।
बाबा साहब का संघर्ष और योगदान
डॉ. अंबेडकर को अपनी जाति के कारण भारत में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। उन्हें केवल इसलिए अपमानित किया जाता था क्योंकि वह दलित समुदाय से ताल्लुक रखते थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन में न केवल सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि भारतीय समाज के भीतर एक समानता और न्याय का सपना भी देखा। उन्होंने भारतीय संविधान को रचकर देश को समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का आधार दिया।
उनकी यह यात्रा अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अब उनके विचारों और संघर्षों को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। न्यूयॉर्क में एक प्रमुख सड़क का नाम बाबा साहब के नाम पर रखा जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनकी विचारधारा और संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।
न्यूयॉर्क में सड़क का नामकरण: एक ऐतिहासिक पल
न्यूयॉर्क की 61 स्ट्रीट ब्रॉडवे सड़क का नामकरण बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के नाम पर किए जाने के मौके पर वहां का माहौल जोश और उमंग से भरा हुआ था। कार्यक्रम के दौरान “जय भीम” और “जय भारत” के नारे गूंज रहे थे। इस आयोजन में भारत के काउंसल जनरल, कांग्रेस वुमन जुली वॉन, जो उस क्षेत्र से सीनेटर हैं और अंबेडकरवादी संगठनों के लोग भी शामिल हुए थे, जिन्होंने बाबा साहब के योगदान को याद किया और उनके विचारों को आगे बढ़ाने की शपथ ली। यह पल अपने आप में इस बात का प्रतीक है कि दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्कों में से एक, अमेरिका, ने डॉ. अंबेडकर को अपने सबसे बड़े सम्मान का हकदार माना।
जातिवाद के खिलाफ अमेरिका का कदम
इसके अलावा, अमेरिका ने भी जातिवाद के खिलाफ अपनी पहल शुरू की है। जैसे सिएटल में एंटी-लो कानून लागू हो चुका है, जिससे जाति के आधार पर भेदभाव करना अब अवैध हो चुका है। इसके अलावा, कैलिफोर्निया में भी एंटी-कास्ट कानून (SB4003) पास होने के करीब है, जिसे विधानसभा से पास किया जा चुका है और अब इसे सीनेट से भी पास किया जाना बाकी है। यह कदम यह दर्शाता है कि अमेरिका में जातिवाद और प्रजातिवाद के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं।
अंबेडकरवादियों की ताकत और योगदान
अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय, खासकर अंबेडकरवादी, अब सिर्फ अपनी पहचान को मजबूत नहीं कर रहे, बल्कि समानता, सामाजिक न्याय और जातिवाद के खिलाफ भी संघर्ष कर रहे हैं। अमेरिका में अंबेडकरवादियों का योगदान केवल उनकी विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने समाज के लिए कई सकारात्मक बदलाव भी ला रहे हैं।
अमेरिका के कई राज्यों में अंबेडकर जयंती को समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है। न्यू जर्सी में अंबेडकर जयंती के मौके पर बाबा साहब का नीला झंडा अमेरिकी झंडे के साथ फहराया गया था, जो एक ऐतिहासिक कदम था और इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि डॉ. अंबेडकर के विचार अब दुनिया भर में फैल चुके हैं।
भारत में अंबेडकर के योगदान को लेकर सोच का बदलाव
हालांकि भारत में कुछ लोग आज भी अंबेडकर के योगदान और उनके विचारों को नकारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब उनके विचार पूरी दुनिया में फैल चुके हैं। बाबा साहब के संघर्ष और उनके संविधान निर्माण को लेकर आज भी कई सेमिनार और चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं, और उनके योगदान को सम्मानित किया जा रहा है।
अमेरिका में उनकी सोच और संघर्ष को इस तरह से सम्मानित करना यह सिद्ध करता है कि उनके विचारों का प्रभाव अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनके योगदान ने न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में बदलाव की दिशा तय की है।