बाबा साहेब को नहीं करते नजरअंदाज, तो रुक सकते थे 1947 के दंगे
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क्या 1947 का नरसंहार टाला जा सकता था, ऐसा माना जाता है कि अगर बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों पर गौर किया जाता...
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बाबा साहेब ने सुझाव दिया था कि यदि विभाजन अपरिहार्य है, तो दंगों से बचने के लिए हिंदू और मुस्लिम आबादी की पूरी तरह और व्यवस्थित अदला-बदली की जानी चाहिए।
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उन्होंने चेतावनी दी थी कि बिना ठोस सुरक्षा और स्पष्ट सीमा निर्धारण के जल्दबाजी में किया गया विभाजन केवल रक्तपात और हिंसा को जन्म देगा।
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अंबेडकर ने दोनों देशों में पीछे छूट जाने वाले अल्पसंख्यकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की संवैधानिक सुरक्षा की वकालत की थी, ताकि उन्हें पलायन के लिए मजबूर न होना पड़े।
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जहाँ अन्य नेता राजनीतिक दबाव में थे, अंबेडकर ने तार्किक और प्रशासनिक दृष्टिकोण रखने की सलाह दी थी, जिसे उस समय नजरअंदाज कर दिया गया।
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उनका मानना था कि सत्ता हस्तांतरण से पहले दंगों की आशंका वाले क्षेत्रों में पर्याप्त सैन्य तैनाती और प्रशासनिक चौकसी होनी चाहिए थी।