बुद्ध की 7 अनमोल सीख जो सांसारिक मोह को खत्म करती हैं
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महात्मा बुद्ध के ये सात गाइडिंग प्रिंसिपल इंसान को अंदरूनी शांति और संतोष की ओर ले जाते हैं ताकि वह अतिक्रमण और भ्रम से आज़ादी पा सके तो चलिए जानते है...
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अटैचमेंट (मोह) ही सभी दुखों की जड़ है यानी जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि संसार में हर चीज़ परिवर्तनशील और नश्वर है, तो मोह अपने आप कम होने लगता है।
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वर्तमान में जीना सीखें: अतीत की यादों में उलझे रहने या भविष्य की अनिश्चितताओं से डरने से लालसा और लगाव पैदा होता है।
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इच्छाओं को कंट्रोल करना (संतुष्टि): इंसान की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं। जैसे ही एक इच्छा पूरी होती है, दूसरी पैदा हो जाती है। इसलिए, अपनी इच्छाओं को कंट्रोल करें।
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अहंकार और "मैं" की भावना को छोड़ दें: दुनियावी लगाव का एक बड़ा कारण इंसान का अहंकार है, जहाँ वह हर चीज़ को "मेरा" और "मैं" से जोड़ता है। तो इसे खत्म करें।
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बदलाव इस दुनिया का नियम है: बुद्ध के अनुसार, इस ब्रह्मांड में सब कुछ नश्वर है। चाहे वह खुशी हो या दुख, धन हो या रिश्ते, कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता।
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माफ़ करना और दया: लगाव अक्सर स्वार्थ और जलन की ओर ले जाता है। इसके उलट, दूसरों के प्रति दया और माफ़ करने से छोटी सोच खत्म करने में मदद मिलती है।
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मन की शांति बाहरी दुनिया में नहीं मिलती: लोग अक्सर सुख-सुविधाओं, धन-दौलत और रिश्तों में खुशी और सुकून ढूंढते हैं, जो कुछ समय के लिए होते हैं। इसलिए, अपने मन को शांत रखें।