By: Shikha

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Poykayil Appachan कैसे बने दलित समाज की ढाल

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Poykayil Appachan केरल के प्रमुख समाज सुधारक थे। उन्होंने ऐसे समय में दलित समुदाय की आवाज़ बुलंद की, जब जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार व्यापक था।  

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उन्होंने खुले तौर पर जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता का विरोध किया। 

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1909 में Prathyaksha Raksha Daiva Sabha (PRDS) की स्थापना कर दलितों को संगठित किया। 

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उन्होंने दलित समुदाय को सम्मान के साथ जीने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित किया। 

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उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक उन्नति का सबसे प्रभावी माध्यम है। 

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उन्होंने कहा कि दलितों के संघर्ष और पीड़ा को इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं मिला, इसलिए उनके इतिहास को दर्ज किया जाना चाहिए। 

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उन्होंने समानता, न्याय और मानव गरिमा के लिए निरंतर अभियान चलाया। 

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उन्होंने ऐसे धार्मिक और सामाजिक ढांचे की वकालत की, जिसमें जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। 

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उनके विचारों ने केरल में दलित जागरण और सामाजिक सुधार आंदोलनों को नई दिशा दी।