बाबा साहब अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने के प्रमुख कारण

By: Shikha

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत से मुक्ति पाने के लिए बौद्ध धर्म अपनाया।

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नका यह कदम हिंदू धर्म की वर्ण व्यवस्था के खिलाफ एक वैचारिक क्रांति था.

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क्योंकि उनका मानना था कि दलितों को हिंदू धर्म में कभी समानता और आत्म-सम्मान नहीं मिल सकता।

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उन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में दीक्षाभूमि नामक स्थान पर अपने लाखों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया।

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उनका मानना था कि बौद्ध धर्म तर्कसंगत है और जातिगत भेदभाव को पूरी तरह से नकारता है।

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उनका मानना था कि बौद्ध धर्म तर्कसंगत है और जातिगत भेदभाव को पूरी तरह से नकारता है।

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बुद्ध ने पुरुष और स्त्री के बीच समानता की शिक्षा दी और सभी वर्गों के लोगों को भिक्षु संघ में शामिल किया, जो हिंदू धर्म की गैर-बराबरी के ठीक विपरीत था।

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अम्बेडकर के अनुसार, बौद्ध धर्म स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूलभूत सिद्धांतों को मानता है।

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उन्होंने घोषणा की कि बौद्ध धर्म दलितों को उनके मानव अधिकार वापस दिला सकता है, जो उन्हें हिंदू सामाजिक व्यवस्था में अछूत होने के कारण नहीं मिल पाए थे।

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