आज भारत में नशा एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है, जिसने देश के एक बड़े वर्ग, खासकर युवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है।
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यह न केवल एक सामाजिक बुराई है बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी है।
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इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार और भारतीय संविधान ने कई सख्त नियम और कानून बनाए हैं।
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दरअसल, भारत में ड्रग्स से संबंधित अपराधों की सजा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत निर्धारित की जाती है।
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यह अधिनियम ड्रग्स की मात्रा और अपराध की प्रकृति के आधार पर सजा को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित करता है
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पहला यह आमतौर पर व्यक्तिगत उपभोग के लिए मानी जाती है। इसमें एक वर्ष तक का कठोर कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
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दूसरा मध्यम मात्रा इसमें दस साल तक का कठोर कारावास और ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
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तीसरा वाणिज्यिक मात्रा यह सबसे गंभीर श्रेणी है, जो ड्रग्स की खरीद-बिक्री या तस्करी को दर्शाती है। इसमें दस से बीस साल तक का कठोर कारावास और ₹1 लाख से ₹2 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।