Swami Prasad Maurya: हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखनऊ से दलितों से जुड़ा एक चौकाने वाला मामला सामने आया हैं, जहाँ एक पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर निशाना साधा है और बीजेपी सरकार को दलित विरोधी बताया है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का बीजेपी पर वार
जैसे-जैसे यूपी विधानसभा चुनाव (Assembly election) नजदीक आ रहे है वैसे-वैसे आरोप और प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। बीजेपी पर हमेशा दलित विरोधी होने का आरोप लगता आया है तो कभी चंद्रशेखर आजाद रावण बीजेपी को दलित विरोधी बताती है तो वहीं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर जमकर हल्ला बोलते हुए बीजेपी को दलित विरोधी करार दिया है।
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सीएम योगी लगाया भेदभाव का आरोप
मौर्य ने एक प्रेस कांफ्रेस में सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) पर जाति देख कर कार्यवाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम योगी (CM Yogi) दलितों और पिछड़ों के मामलों को अनदेखी कर देते है। जब भी किसी एससी एसटी वर्ग (SC/ST category) वाले के साथ अपराध होता है, तब उन्हें न्याय दिलाने के वादे तो खूब होते है लेकिन पुलिस की कार्यवाही पूरी तरह से उन्हें नजरअंदाज करने की होती है। और रही बात न्याय की तो, उसके लिए सालों चक्कर लगाने पड़ते है, जो यूपी के फेल कानून व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है।
मौर्य ने मांग की सबके साथ समान व्यवहार
इतना ही नहीं मौर्य ने मांग की है कि पीड़ित किसी भी जाति का क्यों न हो, उनके लिए सरकार का नजरिया एक होना चाहिए, और सरकार की इसकी जवाबदेही होना अनिवार्य है। मौर्य के इस ऐलान के बाद बीजेपी की साफ सुथरी छवि को फिर से नुकसान होने वाला है, जिसने राजनीति गलियारे में सियासत की हलचलें तेज कर दी है। अब देखना ये है कि मौर्य के इस वार का बुलडोजर बाबा क्या पलटवार करते है। वैसे आप इन आरोपों से कितने सहमत है।
कौन है स्वामी प्रसाद मौर्य?
स्वामी प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के एक जाने-माने और जाने-माने भारतीय नेता हैं। उन्हें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के एक प्रभावशाली नेता के रूप में जाना जाता है। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों के साथ काम किया है। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा जनता दल से शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ लंबा समय बिताया और उन्हें पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता था। इस दौरान, उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया।



