Who is Ashwmit Gautam? सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां एक छोटे से बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी बात कहने का मौका मिलता है, लेकिन उस मौके की कीमत क्या होगी..इस बात का अंदाजा आवाज उठाने वाले तक को नहीं होती है। कुछ ऐसा ही हो रहा है 14 साल के एक दलित समाज से आने वाले बच्चे के साथ..जिसने सरकार के खिलाफ ऐसे संगीन मुद्दों के उठाया है, जिसके बाद एक तरफ तो उसकी सामाजिक तौर पर बुद्धिजीवी लोग तारीफ कर रहे है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ सरकार की किरकिरी हो रही है।
कौन है 14 साल का अश्वमित गौतम? Who is Ashwmit Gautam
इस 14 साल के बच्चे के सवालों का जवाब खुद को सरकार के प्रतिनीधि कहने वालों के पास नहीं है… और जब जवाब नहीं है तो क्यों न सवाल करने वाले के ही मुंह को बंद कर दिया जायें…कुछ ऐसी ही रणनीति के साथ ही तो काम कर रही है मौजूदा सरकार… अपने इस विडियो में हम बात करेंगें 14 साल के अश्वमित गौतम के बारे में बात करेंगे, जिसे यूपी सरकार ने गिरफ्तार करने का आदेश दिया है.. लेकिन सवाल ये है कि आखिर एक 14 साल के बच्चे ने ऐसा क्या कर दिया कि सरकारी महकमें की नींदे उड़ गई है। और कौन है अश्वमित गौतम…
इंटरनेट पर छाया अश्वमित गौतम का वीडियो
अभी कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें एक 14 साल का बच्चा माड़वी हिड़मा की मुठभेड़ में मौत और फिर छत्तीसगढ़ में पूंजीपतियों के प्रभाव के कारण जंगलो को काटने और वहां के मूल लोगो को उखाड़ फेंकने की साजिश पर से पर्दा उठाते हुए कई तीखे सवाल किये थे, ये पहली वीडियो नहीं थ जब अश्वमित ने सरकार से इस तरह की गंभीर मुद्दों पर सवाल किया हो, लेकिन इसका जवाब किसी को नहीं मिला.. अब अश्वमित के खिलाफ कानूनी कार्यवाई के आदेश जारी किये गए है। जिसके कारण दलित समाज सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।
अश्वमित के खिलाफ एफआईआर दर्ज
अश्वमित गौतम उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले है, और किताबों से बहुत प्यार है। दलितों और पिछड़ों के मुद्दे को उठाने के साथ साथ वो अक्सर लोगो की बेसिक समस्याओं पर भी सरकार के रूख पर सवाल खड़े करते है, इंस्ट्राग्राम पर 666K फॉलोवर्स हैं, ये बाबा साहब अंबेडकर जी,भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, कार्ल मार्क्स, लेनिन और चे ग्वेरा जैसे विचारकों को पढ़ता है और लोगों से साझा करता है लेकिन अभी हाल ही में हिंदू धर्म से जुड़े वीडियो को लेकर लखनऊ के दुबग्गा पुलिस स्टेशन में अश्वमित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करी गई, इतना ही नहीं उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है।
दलितो, पिछड़ो और संविधान का खुलेआम अपमान
हैरानी की बात है कि हम एक आजाद देश में रहते है, सवाल करने का अधिकार तो खुद देश की संविधान ने दिया है, लेकिन अब जब सवाल किया जा रहा है तो उनका मुंह बंद करने की साजिश की जा रही है… क्योंकि वो एक दलित समाज से आता है…वहीं अनिल मिश्रा जैसे लोग बाबा साहब, दलितो और पिछड़ो और संविधान का खुलेआम अपमान करते है तो उनका मामला ही खारिज कर दिया जाता है। सरकार का ये दोहरा चेहरा बेहद ही घिनौना है, दलित समाज ने अश्वमित के लिए अब आवाज बुलद करनी शुरू कर दी है.. ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर उत्तर प्रदेश की सरकार का रूख अब क्या होता है। वैसे आपको क्या लगता है..अश्वमित के साथ जो हो रहा है..वो वाकई में दलितों को भारत की धरती पर फिर से दबा कुचला बनाने की साजिश के तहत ही हो रहा है।



