Tehri Case: पिछले काफी समय से टिहरी का एक मामला काफी समय से सुर्खियों में बना हुआ है; इतना समय बीत जाने के बाद भी यह मामला अभी तक शांत नहीं हुआ है। इसी बीच, भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने भी पीड़ित परिवार से उनके घर जाकर मुलाकात की। जिसके बाद से अब मृतक युवक के न्याय दिलवाने के लिए कैंडल मार्च निकल रहे है। जिसका एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
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चंद्रशेखर आजाद के टिहरी जाने के बाद बड़ा बदलाव
उत्तराखंड (Uttarkhand) के टिहरी गढ़वाल (Tehri Garhwal) में दलित युवक केतन लाल की हत्या के बाद उसके परिवार के साथ जो अन्याय हो रहा है उसे लेकर है.. केतनलाल की बहन ने अभी हाल ही में खुलासा किया कि 7 जून को उसके भाई की मौत के बाद से ही उन्हें गांव में लगातार धमकाया जा रहा है। गांव के समाज ने उन्हें लगभग पूरी तरह से अलग थलग छोड़ दिया है। वहीं पुलिस की भूमिका भी पूरी तरह से संदिग्ध है।
क्योंकि वो भी उनकी मदद नहीं कर रही है, हालांकि 30 जून को भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad) के पीड़ित परिवार से मिलने के बाद वहां की जनता भी जाग गई है। उन्हें भी विश्वास हो गया है कि केतनलाल को न्याय जरूर मिलेगा और लोग ने केतन को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च (Candle March) निकालना शुरु कर दिया है।
लोग कहते थे कि चंद्रशेखर आजाद टिहरी गढ़वाल मृतक भाई केतन लाल जी के निवास लंबगांव जाकर क्या करेंगे, लेकिन आज केतन के परिवार से मिलकर आने के बाद, पूरा उत्तराखंड न्याय दिलवाने के लिए सड़कों पर उतर आया है!
विरोधियों के सवालों का जवाब अब जनता की इस भारी हुंकार से मिल रहा है।
भाई… pic.twitter.com/ApjeQTDvVE
— Komal karanwal (@Komal_karanwal) July 5, 2026
उत्तराखंड सरकार से परिवार ने की मांगे
वहीं आजाद ने पहले ही आश्वासन दिया है कि उत्तराखंड में जल्द वो शक्तिशाली होंगे, औऱ फिर किसी दलित पिछड़े के लिए न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकेगा। वहीं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद जी ने उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) से केतन के परिवार के लिए कुछ मांगे रखी है, साथ ही ये भी चेतावनी दी है कि अगर 8 दिनों में मांगे पूरी नहीं होगी तो सीएम आवास का उग्र घेराव किया जायेगा। केवल आजाद के जाने मात्र से पूरा मामला ही बदल गया। लोगों में एक चेतना ने जन्म ले लिया है कि पिड़ित को न्याय जब तक नहीं मिलेगा, तब तक वो शांत नहीं रहेंगे। ऐसे में देखना ये होगा कि लोगो की आवाज उठने के बाद प्रशासन का क्या रवैया होगा।



