Top 5 Dalit news: आपको क्या लगता है, क्या सामाजिक समरसता दलित ला सकते है, शायद नहीं, क्योंकि जब तक सवर्ण और उंची जाति वाले खुद ये पहल नहीं करते, तब ये भेदभाव जारी ही रहेगा.. जो कि केवल सही शिक्षा से ही संभव है..लेकिन विडंबना ये है कि बराबरी का पाठ वो पढ़ेगे कैसे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे , जो बता रहे है कि भेदभाव के खिलाफ लड़ाई तभी खत्म होगी जब दलितों को खुद सवर्ण अपने बराबर माने।
भीम आर्मी चीफ ने जंतर मंतर पर किया बड़ा ऐलान
1, दलितो से जुड़ा पहला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जो 15 जुलाई को राजधानी दिल्ली में पिछले 15 दिनो से चल रहे आंदोलन में छात्रों का हौसला बढ़ाने के लिए पहुंचे। आजाद ने यहां आकर अपना वादा भी निभाया, और साथ ही संदेश भी दिया कि राजनीति कभी भी उनके लिए उनके लोगों से बढ़ कर नहीं है। आजाद ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुंग से मुलाकात कर उनकी हिम्मत बढ़ाई तो वहीं लगे हाथ सरकार को भी बड़ी चुनौती दे डाली है। उन्होंने सीधे कहा कि अगर छात्र चाहते है कि जंचर मंतर से लेकर संसद तक लोगो की भीड़ हो तो वो वादा करते है कि भीड़ जमा होगी.. और उस भीड़ में केवल महापुरुषों की तस्वीरों के अलावा कुछ नहीं होगा.. किसी पार्टी, किसी संगठन का झंडा नहीं होगा.. क्योंकि हमें आंदोलन से कोई राजनीतिक लाभ नहीं चाहिए” बता दें कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद के मानसूत्र सत्र के पहले ही दिन जंतर मंतर से लेकर संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करने का आहवान किया गया है। जिसका नेतृत्व खुद सोनम वांगचुक औऱ कॉकरोच जनता पार्टी के हेड अभिजीत दीपके करने वाले है। नगीना सांसद ने सरकार में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले छात्रों के आंदोलन की सराहना की है, ऐसे में देखना ये होगा कि 20 जुलाई को होने वाला आजाद के आहावान के बाद औऱ कितना व्यापक होने वाला है। वैसे आपको क्या लगता है, क्या आजाद के आंदोलन में शामिल होने के बाद सरकार की नियत बदलेगी।
चित्रकूट में मजदूरी मांगने के बदले दलित को मिली मौत
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से है, जहां एक दलित मजदूरी को अपने मेहनत के पैसे मांगने के बदले मौत मिली.. ये मामला चित्रकूट के मानिकपुर थाना क्षेत्र का है, मृतक मजदूर के परिजनो की आपबीती सुन कर किसी का भी कलेजा फट जायेगा.. परिवार ने बताया कि वो लोग दलित आदिवासी कोल समुदाय से आते है और मृतक युवक मानिकपुर में एक ईंट भट्टे में काम करता था, लेकिन वहां के ठेकेदार ने काफी समय से उसे मजदूरी नहीं दी थी, जिसे मांगने के लिए ही वो ठेकेदार के पास गया था, लेकिन ठेकेदार ने उसे मजदूरी देने के बजाये उसके साथ मारपीट की, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया। किसी तरह से उसे जिला अस्पताल भर्ती कराया गया, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टर की अमानवीय व्यवहार के कारण उनके घर के बच्चे की मौत हो गई.. पीड़ितो की दुर्दशा यहीं नहीं रूकी, जब पीड़ित परिवार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंची तो पुलिस वालों ने उन्हें गालियां देकर बाहर निकाल दिया। पीड़ित परिवार ने बताया कि गंभीर हालात में भी डॉक्टर ने जांच करने के नाम पर युवक का पैर जला दिया, क्योंकि उसका पैर काम नही कर रहा था.. युवक की ईलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनो का गुस्सा फूट पड़ा, उन लोगो ने अस्पताल में हंगामा शुरु कर दिया है, उनका कहना है कि अगर पुलिस और डॉक्टर मे लापहवाही नहीं होतो यो युवक जिंदा होता। उन्होंने इस हत्या में जिम्मेदार सभी आरोपियो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाई करने की मांग की है। लेकिन वहीं पुलिस और अस्पताल प्रबंधन अइस मुद्दे पर कुछ कहने से बच रहा है.. सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर दलितो की जिंदगी की कीमत उनकी जाति पर क्यों मापी जाती है। अब देखना ये होगा कि इस खबरे के मीडिया में आने और हंगामे के बाद भी पुलिस प्रशासन नींद से जागती है या नहीं।
मदुरै में दलित महिला का गैंगरेप
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां एक दलित महिला को नौकरी देने के बहाने से पहले उसे बुलाया गया और फिर चाकू की नोक पर उसे बंधक बना कर उसके साथ गैंगरैप किया गया। ये घटना मदुरै जिले के मेलूर का है, पीड़िता ने बताया कि वो रामनाथपुरम जिले के परमाकुडी की रहने वाली है और 8 जुलाई को नौकरी का झूठा वादा करके वलैयार समुदाय से आने वाली उसकी पड़ोसन अनीता ने बुलाया था, पीड़िता अनीता की पड़ोसी थी इसलिए उससे पहले से जानपहचान थी तो वो भरोसा करके चली गई, जहां उसकी मुलाकात करुणासामी उर्फ वीरपांडी से होनी थी, लेकिन मेलूर में करीब 5 घंटे इंतजार करने के बाद भी वो नहीं आया. जिसके बाद पीड़िता ने अनिता को फोन किया.. फिर शाम को 7.30 बजे वीरपांडी ने फिर कॉल करके कहा कि उसका भाई उसे लेने जा रहा है, जिसकी पहचान गोपालकृष्ण के रूप में हुई थी। पीड़िता जब उसके साथ जाने लगी तो दूसरे गांव ले गया जहां एक सुनसान जगह पर सभी आरोपी मौजूद थे, जिन्होंने पीड़िता को पहले बंधक बनाया, उसे जातिसूचक गालियां दी गई, उसके साथ मारपीट की गई और गैंग रेप किया गया। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों पर सामूहिक बलात्कार, आपराधिक धमकी, जानबूझकर चोट पहुंचाना जैसी धारायें लगा कर उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया, लेकिन बार बार गुहार लगाने के बाद भी उन पर एससी एसटी एक्ट नहीं लगाया गया। वहीं पुलिस अभी अनिता की जाति प्रमाण पत्र की जांच कर रही है, ताकि पावर ऑफ अटॉर्नी अधिनियम पीड़िता को सही मुआवजा दिया जा सकें। अब देखना ये होगा कि पुलिस वाकई में पीड़िता की मदद करना चाहती है या ये केवल मामले को खींचने के लिए किया जा रहा है, ताकि आरोपी एससी एसएटी एक्ट से बच सकें।
शिवगंगा में दलित युवक पर जानलेना हमला
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के शिवगंगा से है, जहां एक शारीरिक रूप से विकलांग नाबालिग लड़के का पहले उसकी कमी के कारण उसके सहपाठियों ने मजाक उड़ाया, लेकिन जब पीड़ित ने उसका विरोध किया तो उसपर चाकू से हमला कर दिया। ये मामला शिवगंगा जिले के मल्लाल में कलैयारकोविल की है , जहां के सरकारी आदि द्रविड़ कल्याण उच्च माध्यमिक विद्यालय में दलित जाति से आने वाले 17 साल के युवक आर संजय प्रसाद पर उसके ही दो सहपाठियों ने जानलेना हमला किया था, पीड़ित इस वक्त सरकारी शिवगंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एडमिट है औऱ उसकी हालात स्थिर है। पुलिस के मुताबिक स्कूल में ही पढ़ने वाले थेवर समुदाय से आने वाले दो लड़को का एक सप्ताह पहले ही पीड़ित के साथ विवाद हुआ था, जिसके आरोपियों ने पीड़िता का मजाक उड़ाया था, औऱ विरोध करने पर लोहे की कील से उसे मारा, जिससे वो घायल हो गया, स्कूल प्रशासन ने दोनो आरोपियो को चेतावनी देकर छोड़ दिया, मगर एक हफ्ते बाद जब पीड़ित फिर स्कूल लौटा तो उसे एक स्टाफ रूप में घेर कर चाकू से हमला कर दिया, जिससे पीड़ित के छाती और पीठ पर चोटे आई है। लेकिन स्कूल प्रशासन की तेजी से लड़की की जान बच गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है औऱ सरकारी निगरानी गृह में रखा है। फिलहाल शिक्षा विभाग भी इस मामले की जांच में जुट गई है, अब देखना ये होगा कि पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच के बाद दोनो आऱोपियों को क्या सजा मिलती है।
अयोध्य राम मंदिर में दलित पुजारी की होगी एंट्री
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा है, जहां अब दलित समुदाय से आने वाले पुजारियों को भी पूजा करने का, औऱ सेवा करने का मौका मिलने वाला है, जी हां, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर परिसर में नए पंडितो की नियुक्ति करने की तैयारी की जा रही है और ट्रस्ट ने फैसला किया है कि सामाजिक बराबरी, समरसता को मजबूत बनाने के लिए दलित समुदाय से आने वाले योग्य वेदपाठी पुजारियों को मौका दिया जायेगा, जो राम मंदिर परिसर में मौजूद सप्त मंडपम के मंदिरों में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकि है लेकिन अंतिम निर्णय 22 जुलाई की बैठक में किया जा सकता है, जिसमें मंदिर में नए पुजारियों की नियुक्ति पर फैसला होगा । ट्रस्ट के इस फैसले के कारण समाज में दलित समाज का मान सम्मना बढ़ेगा, साथ ही भेदभाव के कारण मंदिर में प्रवेश करने को लेकर जो मनगढ़ंत दुर्वभावना फैली है उसमें भी कमी आने की उम्मीद है, अब देखना ये होगा कि अंतिम फैसला क्या होगा और सबसे बड़ा सवाल कि क्या समाज इस फैसले को सहर्ष स्वीकार कर लेगा।



