Top 5 Dalit News: इंटरकास्ट मैरिज पर हमला, बारात का विरोध और दलित अधिकारों पर बड़ी बहस

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Top 5 Dalit news: पीड़ित चीखते रह जाते है, और असली आरोपी खुलेआम घूमते रहते है। दलितो की स्थिति वैसे तो कभी अच्छी थी ही नहीं, लेकिन तब मनुस्मृति का कानून चलता था, मगर अब तो लोकतंत्र है फिर उनकी स्थिति बद से बदतर क्यों है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जिससे ये समझना बेहद मुश्किल है कि आखिर कमी कहां हो रही है.. लोग ज्यादा जातिवादी हो गए है या कानून बेहद कमजोर।

तमिलनाडु के त्रिचि में दूसरी जाति में शादी करने की मिली सजा

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला तमिलनाडु के त्रिचि से है, जहां एक दलित युवक से शादी करने के बदले लड़की के परिवार वालों ने लड़के के साथ न केवल मारपीट की बल्कि रिश्ते के खिलाफ रिश्तेदारों ने लड़की को जबरन अगवा कर लिया। हालांकि पुलिस की सूझबूझ और तेजी के कारण कुछ ही घंटो में युवती को बचा लिया गया। ये मामला त्रिची जिले के मुदुक्कूपट्टी का है, सबसे पिछड़े वर्ग  से आने वाली  एम. चिथिरावल्ली ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर एससी समुदाय से आने वाले पी. अजीत कुमार से शादी कर ली थी, लेकिन परिवार वाले इसके खिलाफ थे, जिसके बाद दंपत्ति ने अपनी सुरक्षा को लेकर  मनाप्पराई महिला पुलिस स्टेशन में मदद मांगी थी।

पुलिसवालों के सामने पीड़िता ने साफ कहा कि वो अपने पति के साथ रहना चाहती है लेकिन 1 जुलाई को अचानक लड़की के घरवालों ने लड़के पर धमकी देने का आरोप लगाया, जिसके बाद 4 जुलाई को पी. अजीत कुमार, उसकी पत्नी औऱ मां पुलिस थाने पहुंचे भी लेकिन लड़की के घर से कोई नहीं आया , मगर जब तीनो वापिस जा रहे थे, तभी रास्ते में हमलावरो ने हमला कर दिया औऱ जबरन चिथिरावल्ली को कार में बिठा कर ले गए। इस दौरान आरोपियों ने जातिसूचक गालियां भी दी औऱ जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने तुरंत कार्यवाई करते हुए चिथिरावल्ली को उसकी नानी के घर से बरामद कर लिया, वहीं चिथिरावल्ली के भाई एम मलाईसामी, उसके बहनोई पी मुरुगेसन, मुरुगेसन के भाई पी प्रकाश और एन अमानुल्लाह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और आगे की जांच कर रही है।

बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने बाबा साहब की मांग दोहराई

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के पटना से है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने बाबा साहब अंबेडकर की दलितों और पिछड़ो के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग को फिर से दोहराया है। दरअसल केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) प्रमुख जीतन राम मांझी पटना में आयोजित राज्य परिषद की बैठक  में पहुंचे थे, जहां उन्होंने 1932 में पूना पैक्ट के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि बाबा साहब द्वारा SC और ST वर्ग के लिए अगर अलग निर्वाचन क्षेत्र बना दिया गया होता तो आज एसटी और एससी जाति के प्रतिनिधि केवल उन्ही जाति के लोगो द्वारा चुने जाते है। उन्होंने कहा कि ये बेहद दुभाग्यपूर्ण है कि हमारे लिए सीट को आरक्षित है लेकिन दलित और पिछड़ो के वोट कोई और ले जाता है।

वहीं जब सराकरी लाभो को देने की बात होती है तो हम पीछे क्यों छूट जाते है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रतिनिधि न होने की वजह से दलितों और पिछड़ो के पास न तो प्रोपर रोजगार है और न ही शिक्षा। आज भी केवल 32 प्रतिशत अनुसूचित जाति की साक्षरता दर है। उन्होंने बिना नाम लिये कांग्रेस को भी घेरा है, कि बाबा साहब को गांधी जी का नाम लेकर डराया गया कि अनशन के कारण गांधी जी मर गए तो दलितों को जला दिया जायेगा। जिससे मजबूरी में बाबा साहब को झुकना पड़ा, लेकिन करीब 94 साल बीतने के बाद जीतनराम मांझी ने फिर से अलग निर्वाचन क्षेत्र की वकालत की है। ऐसे में देखना ये होगा कि अब भी इस पर सामाजिक सहमति बनती है या नहीं। वैसे आपको क्या लगता है।

आगरा में दलितों की बारात को फिर से रोका

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से है। जहां दलित समुदाय की गांव के दूसरे पारंपरिक रास्ते से बारात निकालने को लेकर गांव के जातिवादियों ने जमकर हंगामा किया.. विरोध के कारण बाराती काफी नाराज हो गए.. हालांकि इससे पहले ही हालात हिंसक होते, लड़कीवालो ने सूझबूझ से पुलिस को बुलाया औऱ करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद शांति से बारात निकाली गई। ये मामला आगरा के फतेहाबाद में थाना निबोहरा क्षेत्र के गांव रामपुर का है, जहां गुरचरण सिंह वाल्मीकि की बेटी जसोदा की शादी थी, बारात तय समय पर गांव में आने वाली थी लेकिन तभी खबर मिली की जिस रास्ते से बारात आनी थी।

वहां किसी की मौत हो गई है तो रास्ते को बदल दिया जाये, लेकिन जब बारात दूसरे रास्ते से निकलने लगी तो कुछ जातिवादियों ने इसका विरोध शुरु कर दिया.. इससे पहले की मामला और बिगड़ता, पुलिस ने आकर संभाल लिया.. और किसी तरह से शांति स्थापित कर बारात को निकाला.. जब तक शादी संपन्न नही हुई तक पुलिस बल वहीं तैनात रही। पुलिस की सतर्कता को लेकर दुल्हन के परिवारवालों ने उनका शुक्रिया अदा किया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर जो सड़क सबके लिए है, उस पर दलितों के लिए इतनी पाबंदियां क्यों है, अब देखना ये होगा कि शादी तो हो गई लेकिन अब दलित परिवार के साथ किसी तरह का अन्नाय न हो।

भीम आर्मी चीफ ने राज्य की जनता को किया नया वादा

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। जिन्होंने अभी हाल ही में उनकी सरकार बनने पर 5 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, वहीं अब उन्होंने एक और नई घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वो मानते है कि कोई भी सरकारी अधिकारी चाहे वो कांस्टेबल हो, हेड कांस्टेबल हो, शिक्षक हो, उन सभी को उनके गृह जनपद में तैनाती मिलनी चाहिये। वहीं महिला शिक्षिका को पास के स्कूल में पोस्टिंग मिलनी चाहिए, तो वहीं टीचर्स पर सरकार जो अतिरिक कार्यभार दे देती है, उससे उन्हें मुक्ति दी जानी चाहिए.. शिक्षकों का काम केवल पढ़ाना है तो उनसे बाकि के सरकारी काम न करवायें जायें।

उन्होंने इसी के साथ सरकार को आड़े हाथों लेते हो घोटाले करने को लेकर घेरा है। उन्होंने इशारा दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव बहुत कुछ बदलने वाला है। आजाद का ये ऐलान साफ इशारा है कि अगर 2027 में सत्ता परिवर्तन होता है तो यूपी की दिशा औऱ दशा दोनो ही बदलने वाली है। ऐसे में कहीं न कहीं शायद हर दलित वर्ग के व्यक्ति को आगामी चुनाव का बेसब्री से इंतजार है, आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके बतायें।

केरल में एससी एसटी वर्ग की महिलाओं को बड़ी सौगात

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल के त्रिशूर से है, जहां सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को आर्थिक रूप से शसस्कत करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दक्षायनी’ नामक योजना को लागू करने की तैयारी शुरु कर दी है। राज्य सरकार के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के.ए. थुलसी ने खुद इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य का विकास तभी सही तरीके से हो सकेगा जब महिलायें भी पूर्ण रूप से शसक्त होंगी।

योजना की शुरूआत के लिए पलक्कड़ को चुना गया है। बता दें कि योजना में 18 साल के ज्यादा उम्र की एससी एसटी समाज की महिला उद्यमियों और बेरोजगार पेशेवर को करीब 75 प्रतिशत तक  सब्सिडी दी जायेगा और बाकि की रकम  बैंक से लोन लेकर या एससीएसटी विकास निगम से सहायता लेकर जुटाई जा सकती है। केरल सरकार की ये योजना राज्य के गरीब और दबे कुचले वर्ग को लेकर बेहद लाभकारी होगा.. जिससे महिलायें भी शसक्त हो सकेंगी।

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