Punjab news: हाल ही में पंजाब के तरनतारन और आस-पास के इलाकों से हैरान और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ, बाढ़ पीड़ितों, खासकर दलित और ज़मीनहीन परिवारों को राहत और मदद की कमी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा है। वही पंजाब में कई सामाजिक और ज़मीनी संगठनों ने आपदा के दौरान पिछड़े समुदायों के साथ हुए भेदभाव को सामने लाया है। जिसके बाद से पंजाब सरकार और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं।
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पंजाब में दलित परिवारों के साथ भेदभाव
पंजाब में बाढ़ के बाद कई राज्यों से राहत सामग्री पंजाब भेजी गई और कई बड़े नेताओं और कई गांवों को भी फिर से बसाया गया लेकिन आज भी कुछ गाँव ऐसे है जो मुआवजे के लिए तरस रहे है उनके साथ भेदभाव हो रहा है। जी हाँ, पंजाब (Punjab) के तरनतारन (Tarn Taran) से ऐसी ही खबर है, जहां बीते साल बाढ़ के कारण घर से बेघर हुए सैकड़ो दलित परिवारों को उनके हालत पर मरने के लिए छोड़ दिया गया। इस मामले का खुलासा दलित विरोधी दास्तान आंदोलन (Anti-Dalit Dastan movement) के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह शकरी ने किया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ के बाद जिन परिवारो के घर ढह गए थे।
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साल बीत जाने के बाद भी नहीं मिला कोई मुआवजा
उन्हें मुआवजा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन हैरानी की बात है एक साल बीतने वाला है लेकिन केवल तरनतारन (Tarn Taran) में ही 331 ऐसे मामले सामने आये है जहां न तो कोई अधिकारी उनकी सुध लेने पहुंचा और न ही उन्हें कोई मुआवजा मिला है। वहीं जब पीड़ितो ने सामूहिक ज्ञापन देने की कोशिश की तो जिला अधिकारियों ने वो भी लेने से इंकार कर दिया।
दलित औऱ पिछड़ी जाति के लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया
बड़ी मुश्किल से 6 महीने बीतने के बाद 6 जनवरी को ज्ञापन स्वीकार किया गया था लेकिन अब भी 6 महीने बीत चुके है लेकिन प्रशासन आज भी पीड़ितो के लिए नींद से नहीं जागी..इन परिवारों में ज्यादातर दलित औऱ पिछड़ी जाति के लोग है, जिन्हें जानबूझ कर मरने के लिए छोड़ दिया गया है। अब देखना ये होगा कि दलितो विरोधी दास्तान आंदोलन के इस मामले में आवाज उठाने के बाद भी क्या क्या प्रशासन पीड़ितो के लिए मदद का हाथ बढ़ायेगी।



