Bhartiya Sakshya Adhiniyam 2023 Section 2: 1 जुलाई 2024 को भारतीय कानूनों में किये गए बदलावों के बाद सरकार ने कुछ ऐसे साक्ष्यों को भी मान्यता दी, जिन्हें पहले या तो निराधार या फिर गैरकानूनी करार दिया जाता था.. लेकिन भारतीय न्याय संहिता 2023 के आने के साथ साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में भी कुछ ऐसे बदलाव किये गए, जिससे कोई भी मामला काफी पारदर्शी हो, और उसपर जल्द से जल्द फैसला किया जा सकें। उन्ही में धारा 2 में दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में क्या क्या शामिल होते है और उन्हें किस आधार पर साक्ष्य माना जायेगा, उसके बारे में बताया गया है। अपने इस लेख में हम दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य धारा 2 के बारे में जानेंगे।
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दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से जुड़ी सभी जानकारी को भारतीय कानून के भारतीय साक्ष्य अधिनियम में बताई गई है। जिसके धारा में दस्तावेज क्या है, वो बताया गया है। इसके मुताबिक कोई भी सामाग्री जिसके जरिये साक्ष्य के तौर पर कोई अक्षर, चित्र, अंक, या किसी भी तरह के चिन्ह अंकित हो, और वो केस में मदद कर सकते है, तो वो दस्तावेज कहलाते है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के लागू होने के बाद से इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को भी साक्ष्य के रूप स्वीकृत करने की प्रावधान माना गया है। वहीं इस अधिनियम के धारा 61, 62,63 में इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल अभिलेखों को क्यों साक्ष्य माना जा रहा है, और किस आधार पर उसे स्वीकार किया जा रहा है, उसके बारे में बताया गया है।
धारा 2 बताती है कि कम्पयूटर, लैपटॉप या मोबाईल फोन से निकाली गई जानकारी, चाहे वो ईमेल, सर्वर लॉग, मैसेज, या फिर वेबसाइट के बारे में हो.. उसे द्वितियक साक्ष्य माना जायेगा, हालांकि उसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले कानून द्वारा निर्धारित शर्तो का प्रमाण लगाना अनिवार्य होगा, ये प्रमाणपत्र तभी जारी होगा जब इलेक्ट्रोनिक साक्ष्य जिस माध्यम से पाया गया है, उस माध्यम को इस्तेमाल करने वाला खुद हस्ताक्षर करके कोर्ट में पेश करने की स्वीकृति न दे दें या फिर जो उस माध्यम का डाटा प्रबंधन करता है उसकी स्वीकृति होना अनिवार्य है।
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इन साक्ष्यों में कुछ बिंदुओं को भी ध्यान में रखा जाता है। पेश किया गया साक्ष्य कई मारदंडो में तौला जाता है। जिसमें ये देखा जाता है कि जो साक्ष्य पेश किये जा रहे है वह तथ्य शामिल है जिससे, या तो स्वयं या अन्य तथ्यों के साथ मिलकर, किसी भी मुकदमे या कार्यवाही में दावा किये . इंकार किये गए किसी भी सामग्री ,अधिकार,जिम्मेदारी का अस्तित्वस, गैर-अस्तित्व, प्रकृति या फिर उसकी सीमा अनिवार्य रूप से सिद्ध होती हो। साक्ष्य तभी साक्ष्य माने जाने जायेंगे जब न्यायलय खुद उसे स्वीकार करें कि उक्त साक्ष्य से किसी विवेकशील व्यक्ति को विशेष मामले में फंसा या बचा सकती है, औऱ वो उस केस के लिए अनिवार्य है। उन साक्ष्यों का प्रासंगिक रूप से संबंधित प्रावधानों में उल्लिखित किसी भी तरीके से जुड़ा होना चाहिए।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में नए प्रावधानों के अनुसार मौखिक साक्ष्य के अंतर्गत ‘इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी गई सूचना’ जिसमें फोन रिकॉडिंग, शामिल है और दस्तावेज़ी साक्ष्य के अंतर्गत डिजिटल रिकॉर्ड’ शामिल किये जाते है, जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग, पिक्चर, या फिर इलैक्ट्रोनिक माध्यम से इक्ट्ठा किये गये साक्ष्य शामिल हो। इलेक्ट्रोनिक साक्ष्यों को स्वीकृति मिलने के बाद न्याय न्यवस्था की रफ्तार तेज होंगी। वहीं उनके जरिये तेजी से साक्ष्यों को जमा किया जा सकता है। ताकि मामलो को ज्यादा लंबा न खींचना पड़े।



