Top 5 Dalit news: भीम आर्मी से लेकर उन्नाव और बरेली तक, जानिए आज की 5 बड़ी घटनाएं

Caste Discrimination with Dalits, Junagarh
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Top 5 Dalit news: जब तक दलितों के लिए एक मजबूत नेतृत्व नहीं होगा तब तक शायद उन्हें राजनैतिक रोटियां सेंकने वाले नेता ऐसे ही इस्तेमाल करते रहेंगे। विकास का सपना दिखा कर उनके पैरो से जमीनें खींचते रहेंगे औऱ दूसरी तरफ हितैषी होने का मुखौटा पहने रहेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है, जो इस सच को बता रही है कि संगठन की शक्ति वाकई में क्या है।

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भीम आर्मी चीफ के जंतर मंतर आने के बाद आंदोलन मे पकड़ी ऱप्तार

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने आज बता दिया है कि वाकई में संगठन की शक्ति क्या होती। जंतर मंतर पर चल रहे पिछले 15 दिनों से प्रदर्शन को लेकर जहां पहले किसी भी नेता या राजनेता की कोरी टिप्पणी भी नहीं आ रही थी वहीं आजाद के वहां जाने मात्र से ही सबके सुर बदलने लगे है।  खबर आ रही है कि आजाद ने जैसे ही आंदोलन में पूरा समर्थन देने और 20 जुलाई को होने वाले जंतर मंतर से संसद तक के मार्च में भीम आर्मी और आसपा के के कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात की है, तब से इस आंदोलन को कई बड़े नेताओ का ही नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के सितारों का भी सपोर्ट मिलने लगा है। जी हां, अब तक ये आंदोलन केवल पेपर लीक को लेकर था, लेकिन अब ये शिक्षा व्यवस्था में होने वाली धांधली, बेरोजगारी, और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ भी शुरु हो गई है, जिसमे पहले उन्हें लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का साथ मिला था, वहीं फिर आजाद ने यहां आकर सबका हौसला बढ़ाया और अब दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, शिवसेना यूबीटी प्रुख उदद्ध ठाकरे, किसान नेता राकेश टिकैत, प्रकाश अंबेडकर, समेत फिल्म अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी सरकार की इस चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया है। सरकार आखिर बातचीत करने के लिए तैयार क्यों नहीं है आखिर वो चाहती क्या है। इस आंदोलन को मिलने वाले अचानक सपोर्ट के बाद ये मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय बन चुका है, औऱ साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है.. अब देखना ये होगा कि सरकार कब छात्रो के आगे झुकती है। मगर ये तो साफ है कि आजाद की लोकप्रियता अब केवल एक राज्य तक सिमित नहीं है.. वो पूरे राष्ट्र के नेता बन गए है।

उन्नाव में जातिगत भेदभाव के चलते दलितो के मंदिर में प्रवेश पर रोक

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से है, जहां जातिगत भेदभाव के चक्कर दलित परिवार को मंदिर में प्रवेश करने से तो रोका ही, साथ ही जब परिवार ने इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई तो जातिवादी आतंकियों ने पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियां देने हुए लाठी डंडो से बुरी तरह से पीटा। ये मामला उन्नाव के मोहान के हसनगंज कोतवाली क्षेत्र के बीचपरी गांव का है, इस मारपीट में दलित परिवार के 4 लोग बुरी तरह से घायल हो गए है। पीड़ित अमरपाल रावत ने बताया कि 10 जुलाई को गांव में खाटूश्याम मंदिर में आरती चल रही थी तभी वो और उसका परिवार भी मंदिर में पहुंचे, लेकिन गांव के ही दो युवक ब्रजेश और श्री कृष्ण सिंह ने उन्हे रोका और धमकी की दी अगर मंदिर में गए तो जान से मार देंगे। लेकिन जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो उस पर हमला कर दिया गया, बीच बचाव करने आये परिवार के लोगो के साथ भी मारपीट की गई.. पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है, लेकिन अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, हैरानी की बात तो ये है कि सरकार कितने भी धार्मिक सौहार्द के राग अलाप लें लेकिन सच तो ये है कि भेदभाव के खिलाफ आज भी सरकार ठोस कदम उठाने में फेल हो चुकी है।

उत्तराखंड सरकार ने एससी युवाओ की दी सौगात

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से है, जहां अनुसूचित जाति से आने वाले सभी समुदायों को आर्थिक और सामाजिक रूप से शसक्त बनाने के लिए केंद्र औऱ राज्य सरकार ने मिलकर बड़ा ऐलान किया है।  जी हां,  प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PMAJAY) के तहत जिले के 465 युवाओ को सरकारी नौकरी देने की प्लानिंग की गई है, इस योजना के लिए 124.94 लाख की  मंजूरी भी दे दी गई है, यानि की बेरोजगार एससी समाज के युवाओ को अब रोजगार दिया जायेगा, ताकि वो आर्थिक मजबूत हो सकें, इसी के साथ 175 बेरोजगार युवाओ ₹87.55 लाख रूपय की सब्सिडी दी जा रही है, ताकि वो अपना व्यापार शुरु कर सकें। वहीं  290 शिक्षित बेरोजगार एससी युवाओ को स्पेशल ट्रेमिंग भी दी जायेगी, ताकि वो आज के बाजार के अनुरूप खुद को ढाल सकें। इस योजना का पूरा मसौदा तैयार करके जिला समाज कल्याण ने कंद्र सरकार के पास भेजा है, जहां से अंतिम मुहर लगना अभी बाकि है.. एससी समाज के आने वाले युवाओ को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सरकार की ये पहल वाकई में काबिलेतारीफ है, अब देखना ये होगा कि सरकार इस योजना के तहत कितने दलितों का भला कर पाती है। क्योंक् योजनायें तो बहुत बनती है लेकिन सफल कितनी ही हो पाती है, वो तो हम और आप बखूबी जानते ही है।

बरेली में दलित महिला से गैंगरेप

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला  उत्तर प्रदेश के बरेली से है, जहां एक दलित महिला के साथ पहले गैंगरेप किया गया और फिर उसका अश्लील वीडियो बना कर उसे लगतार ब्लैकमेल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये घटना बरेली के बहेड़ी कोतवाली क्षेत्र के गुरसौली गांव का है। पीड़िता ने बताया कि उसका पति दिव्यांग है, और काम के सिलसिले में बाहर रहता है। गैस के कनेक्शन को लेकर वो गांव के प्रधान के पास गई थी, लेकिन वो उस वक्त नहीं था तो वो वापिस आने लगी, तो तीन आरोपियो ने उसे रोका और बहाने से एक कमरे में ले गये, जहां उन्होंने उसे डराया धमाया, जातिसूचक गालियां दी और उसका दुष्कर्म किया, इतना ही नहीं उसका वीडियो बनाया और जान से मारने की धमकी भी दी। लेकिन पीड़िता रोज रोज के ब्लेकमेल से तंग आ गई और उसके आखिरकार बहेड़ी पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने बिना किसी लापरवाही के मामला दर्ज कर 2 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। वहीं तीसरे आऱोपी की तलाश की जा रही है.. इसी के साथ मामले की आगे की जांच भी जारी है.. अब देखना ये होगा कि क्या आरोपियों को वाकई में सजा होगा या फिर रसूख के दम पर मामला रफा दफा कर दिया जायेगा।

बहुचर्चित ललिता गौतम हत्याकांड में बड़ा खुलासा

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के ही मेरठ में हुआ बहुचर्चित ललिता गौतनम हत्याकांड को लेकर है, जिसमें बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दरअसल 15 मई को लापता हुआ ललिता गौतम की हत्या के मामले में 18 मई को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी अंकुश कुमार चौधरी को गिरफ्तार किया था, लेकिन पुलिस जांच में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ, जिसके अनुसार ललिता की हत्या की साजिश में अंकुश कुमार चौधरी के साथ साथ पीएसी कॉंसटेबल अंकित चौधरी का भी नाम सामने आया, जिसने 11 मई को पत्नी की डिलिवरी होने का बहाना बना कर छुट्टी ली थी, और घटना वाले दिन वो भी अंकुश के साथ ही मौजूद था। इस मामले में इतनी बड़ी लापरवाही को लेकर सीओ सौम्या अस्थाना को पद से हटा दिया गया है, तो वहीं कांस्टेबल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। हैरानी की बात ये है कि 11 मई को जब वो गांव पहुंचा था तब ललिता ने लिखित शिकायत भी दी थी कि उसकी जान को खतरा है..लेकिन पुलिस ने इसे आई गई बात मान ली थी.. ललिता गौतम की हत्या के 2 महीने बीतने के बाद भी पुलिस की धीमी कार्रवाई से लोगो में गुस्सा फूट पड़ा था, कई राजनैतिक पार्टियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन को घेरना शुरु कर दिया था, जिससे बाद इस मामले में काफी तेजी आई है…जांच तेज होने के बाद आखिरकार एक और मुख्य आरोपी का भी नाम सामने आया.. इस नए खुलासे के बाद सरकार का क्या रूख होगा.. ये देखने वाली बात होगी..

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