Petty Organized Crime: 1 जुलाई 2024 को जब भारत सरकार ने नई कानून व्यवस्था लागू की और करीब 180 सालों से चली आ रही औपनिवेशिक इंडियन पीनल कोड (IPC) को हटाकर भारतीय रंग से सजे भारतीय न्याय संहिता 2023 लागू की गई, तब कुछ ऐसे कानूनो को भी बीएनएस (BNS) 2023 में शामिल किया गया, जिनका इंजियन पीनल कोर्ड में कोई स्थान नहीं था। उन्ही में से एक संगठित अपराध के तहत ”Petty Organized Crime” को दर्शाने वाला बीएनएस की धारा 112, जिसे लागू करने के पीछे का मुख्य कारण था कि छोटे छोटे अपराधो को कर के मामली सजा पाकर रिहा हो जाने वालों को उनकी गुनाह का पूरा अहसास हो और सही सजा मिले।
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क्या है ‘पेटी ऑर्गनाइज्ड क्राइम’?
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 112 भी एक नए प्रावधानों और कानूनों को जोड़कर बनाया गया है। जिसमें पहली बार संगठित गिरोहों या आपराधिक सिंडिकेट के द्वारा एक अपराधों को अंजाम दिया गया जिन्हें छोटे और सामान्य अपराधों में रखा जाता है, इसे अपराधों को पेटी ऑर्गनाइज्ड क्राइम’ (Petty Organised Crime) कहा जाता है। भारतीय न्याय संहिता 2023 के धारा 112 में पहली बार इसे अपराधिक और विशेष रूप से दंडनीय अपराध को श्रेणी में रखा गया है। धारा 112 के तहत अब ऐसे अपराधियों के लिये सजा और जुर्माने से बचना नामुमकिन हो गया। आइए जानते है कि संगठित अपराध के तहत पेटी ऑर्गनाइज्ड क्राइम’ क्या है और क्या है इस अपराध को करने के बाद सजा का प्रावधान। Bns 2023 की धारा 112 के अनुसार ऐसे अपराध जो कि किसी समूह या गिरोह में किए जाए, या फिर इसे अपराध जिसे मोबाइल संगठित आपराधिक गिरोह’ जो कि एक राज्य से दूसरे राज्य में घूम घूम कर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते है। या फिर वो इसे गिरोह के सदस्य भी होते है और अकेले अपराधों को अंजाम देते है तो उनका अपराध पेटी ऑर्गेनाइज क्राइम कहलाता है।
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कौन कौन से अपराध आते है इसमें
अब सवाल ये है कि कैसे पहचाने कि कौन कौन से अपराध पेटी ऑर्गेनाइज क्राइम में आते है , तो छीना-झपटी और चोरी, जिसके तरह चैन स्नेचिंग, पिक pocketing, घरों में चोरी और छोटे वाहनों की चोरी करना, इसके अलावा हाई टेक छोटी के तहत एटीम (ATM) में चोरी,साथ ही धोखाधड़ी और अवैध तरीके से टिकटों की बिक्री करना, काली-बाजारी करना, गैरकानूनी रूप से अवैध सट्टेबाजी करना या जुआ खेलना, परीक्षा पेपर के साथ धांधली कर बेचना जैसे अपराध धारा 112 में शामिल किए जाएंगे। इन अपराधों के तरह जो भी दोषी पाया जाता है उसे कानूनन धारण 112 (2) के तरह 1 साल से लेकर 7 सालों तक की सजा का प्रावधान है, इसी के साथ व्यक्ति के अपराध के अनुसार ही उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि आईपीसी में इस तरह से अपराधों के लिए अलग से कोई विशेष प्रावधान नहीं था।
लेकिन BNS में बदलाव किया गया और इस तरह के संगठित छोटे अपराधों को करने वालों पर लगाम लगाने के लिए धारा 112 लागू को गई। हालांकि भी ध्यान रखने वाली बात है कि जब संगठित अपराध को अंजाम दिया जा रहा है तो उसमें किसी की भी मृत्यु नहीं होनी चाहिए, अगर किसी की मौत हो जाती है तो वो वो मामला ही बदल जायेगा, फिर वो ‘पेटी आर्गेनाइज्ड क्राइम’ का मामला नहीं रह जायेगा। ऐसे में आरोपी पर धारा 112 के मामले तो लगेंगे ही, साथ ही हत्या का मामला भी लगा कर उसकी धारा लगाई जायेगी। ऐसे में गिरोह से जुड़े केवल एक अपराधी को ही सजा हो, ऐसा नही है, अहर आप गिरोह के सदस्य है और सक्रिय है तो सजा के हकदार आप आप भी होंगे, भले ही सजा कम मिले। इस धारा को लाने के बाद अपराधियों में छोटे अपराधों को करके बच निकलने का रास्ता बंद हो गया है। हालांकि इससे ये नहीं कहा जा सकता है कि उससे अपराधों में कोई कमी आई है। मगर अपराधियों में सजा का डर जरूर आया है।



