Indian Parliament law: बीते महीने जुलाई में 20 तारीख से संसद का मानसून सत्र शुरु हुआ, जो कि 13 अगस्त तक चला था। इस सत्र में सबसे ज्याद चर्चा का मुद्दा रहा वंदे मातरम बिल.. जिसे आप राष्ट्रीय सम्मान मिला है.. करीब 76 साल के बाद.. केंद्र की मोदी सरकार संसद में एक प्रस्ताव लाती है.. सबसे पहले इसे 24 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया गया जहां ये निर्विरोध पास हो गया.. लेकिन 30 जुलाई को जब इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया तो काफी हंगामा हुआ.. बॉयकॉट भी किया गया लेकिन फिर भी इस विधेयक को मंजूरी मिल गई.. फिर अगस्त में इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया.. वहां 7 अगस्त को राष्ट्रपति दोपदी मूर्मू की मंजूरी मिली ,, और ये विधेयक बिल बन गया। एक लंबी और पेचीदा प्रक्रिया से होने के बाद एक प्रस्ताव, विधेयक और फिर बिल में तब्दील होता है.. जिसे पूरे देश में लागू किया जाता है। अपने इस लेख में हम भारतीय संसद में कोई विधेयक (Bill) कानून कैसे बनता है, इसकी पूरी प्रक्रिया संमझेंगे।
कानून बनने से पहले क्या-क्या होता है?
किसी भी कानून को बनाने या उसमें बदलाव लाने का अधिकार सत्तारूढ़ केंद्र सरकार के पास होता है.. जिनकी मंजूरी के बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है संसद तक जाने से पहले ये विश्लेषण किया जाता है कि क्या कोई विशेष कानून की जरूरत है, क्या किसी पुराने कानून में बदलाव की जरूरत है.. जिसके बाद जिस कानून में बदलाव लाना है, या लागू करना है.. उस मंत्रालय से संबधित मंत्री या सांसद एक मसौदा तैयार करते है। विधेयक के तैयार होने के बाद पहले उसपर गृह मंत्रालय में चर्चा होती है, औऱ फिर किसी भी सभा में, चाहे वो लोकसभा हो या राज्यसभा, में केवल चर्चा के लिए पेश किया जाता है यहां केवल विधेयक को एक आईडिया के तौर पर पेश किया जाता है कि विशेष विभाग में विशेष बदलावों के लिए कानून में बदलाव जरूरी है। वहां जिन्हें जो भी सलाह देनी होती है, जिसे विधेयक को फिर से प्रावधान करके दूसरे चरण के लिए पेश किया जाता है।
विधेयक कैसे बनता है कानून?
यहां विधेयक के मसौदे पर विस्तार से चर्चा की जाती है। वहीं अगर लगता है कि मसौदा में और विचार करने की जरूरत है तो संसदीय समिति के पास समीक्षा के लिए भेजा जाता है। समीक्षा में सबकुछ ठीक होने के बाद उसे फाइनल रूप देकर फिर से सदन में वोटिंग के लिए भेजा जाता है। वहां उस विधेयक पर जमकर चर्चा होती है और सदन में मौजूद सभी लोगो से वोटिंग करवाई जाती है.. वहां अगर वोटिंग बहुमत में होती है तो आगे की कार्रवाही के लिए उसे दूसरे सदन भेजा जाता है.. यहां भी वहीं सारी प्रक्रिया से विधेयक को गुजरना पड़ता है जिससे वो पहले सदन मे गुजरे है..फिर यहां वोटिंग होती है औऱ अगर वो बहुमत में है को संसद में विधेयक पास माना जाता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो दोनो सदनो के बीच एक संयुक्त बैठक बुलाई जाती है.. जहां दोनो सदनो के लोग बहस करते है औऱ फिर से वोटिंग होती है। वोटिंग में विधेयक को अगर बहुमत मिल जाता है तो वो संसद से पारित कर दिया जाता है।
विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी
लेकिन अब भी उस विधेयक को कानून बनाने के लिए अंतिम चरण पार करना होता है। संसद से पास होने के बाद विधेयक को देश के राष्ट्रपति के पास लाया जाता है। जहां वो पहले उनका विश्लेषन करते है, और फिर विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती है। और इस तरह से एक मसौदा देश का कानून बन जाता है। ये कानून नए भी हो सकते है या फिर भारतीय संविधान के पुराने कानून में संशोधन करके लागू किया जाते है। जैसा कि वंदे मातरम बिल राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 (The Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026) लागू किया गया, जो कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन करके लागू किया गया है। वहीं नया लेबर कोड, पुराने लेबर कोड को संशोधित करने के बजाय चार अलग नए लेबर कोड ही लागू किये गए थे। जिसमें पुराने सारे 29 क्षम कानूनों को मिलाकर 4 आसान कोड लाये गए, जो कि 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद देश को नया कानून मिलता है।



