Top 5 Dalit news: धर्म परिवर्तन से लेकर शुद्धिकरण और पुलिस कार्रवाई तक, उठे गंभीर सवाल

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Top 5 Dalit news: क्या अगर कोई दलित है तो क्या किसी को भी उन्हें अपनी जागीर मान लेने का हक मिल जाता है.. ये किसी कानून व्यवस्था में हम रहते है कि जहां कहने के लिए तो देश की सरकार जनता चलाती है लेकिन यहां कुछ धर्म अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बनने को मजबूर हो गय़े है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देंगे कि दलितों को कैसे कठपुतली बना कर धर्म का खेल खेला जा रहा है।

दलित को जबरन इस्लाम अपनाने के लिए किया मजबूर

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के फरीदपुर से है, जहां एक व्यक्ति को जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूत करने और उसके इनकार करने पर इसके साथ बुरी तरह से मारपीट करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वैसे तो यूपी में धर्म परिवर्तन का खेल खोलने के लिए तमाम कानून व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जाते रहे है, लेकिन ये मामला पुलिस की नाकामी का जीता जागता उदाहरण है। ये मामला फरीदपुर के फर्रख पुर का है, जहां दलित जाति से आने वाले युवक रवि सागर ने पुलिस को तहरीर दी कि वो टीवीएस बाइक एजेंसी में काम करता है , वहीं पर तौफ़ीक़ नाम का शख्स भी काम करता था। काम के दौरान दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई थी, और तौफ़ीक का उनके घर आना जाना होने लगा था। लेकिन 6 महीने पहले तौफीक जानबूझ कर अपने धर्म को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने लगा। लेकिन जब रवि ने उसकी बातों में दिलचस्पी नहीं दिखाई तो तौफीक ने उसे बरगलाने के लिए इस्लाम में उसे सम्मान की जिंदगी दिलाने, और सारी सिख सुविधाएं दिलाने का वादा कर धर्म बदलने को कहा, लेकिन रवि तब भी नहीं माना तो तौफीक ने उस जातिसूचक गालियां देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं 12 जुलाई को तौफीक के पूरे परिवार ने इसे धर्म बदलने के लिए दवाब दिया मगर वो नहीं माना जिसके बाद 13 जुलाई को तौफीक और उसके पिता ने आकर रवि को बुरी तरह से पीटा। हैरानी की बात है कि रवि पहले स्थानीय थाने में गया लेकिन वहां उसकी रिपोर्ट लिखने के बजाय उसे डांट कर भगा दिया गया। रवि ने जिसके बाद ssp से मदद की गुहार लगाई तो करीब एक महीने बाद उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है वहीं आरोपियों की भी तलाश जारी है। अब देखना ये होगा कि रवि उन लोगों का पहला शिकार था या ये खेल लंबे समय से चल रहा था।

नहीं थम रहा शुद्धिकरण का मामला

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के हलद्वानी से है, जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान का शुद्धिकरण प्रकरण, अब लगता है कि उत्तराखंड में बीजेपी की लुटिया डुबो सकता है। अगले साल यहाँ विधानसभा चुनाव है, और बीजेपी दलित वोटर्स को साधने की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन शुद्धिकरण करने के बाद अब दलितों का रुख भी बदलने लगा है।  वहीं अब इस मुद्दे पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी सत्ता रूढ़ सरकार कर जमकर हमला बोला है। एक तरफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रायपुर में पदयात्रा निकाली गई तो वहीं बघेल ने जातिवादी मानसिकता को पालने वालों के खिलाफ बयान दिया है कि एसे लोगो को अनाज नहीं खाना चाहिए..क्या पता उगाने वाला दलित हो, क्या पता बेचने वाला दलित हो.. फिर उसका छुआ कैसे खा सकते है,, क्या तुम अशुद्ध नहीं हो गए..   किसी बस, ट्रेन पर मत बैठो हो सकता है कि कोई दलित तुमसे पहले बैठा हो.. तो जातिवादियों को तो रोज अपना शुद्धिकरण करना चाहिए। भूपेश बघेल के बयान से साफ है कि ये मामला इतनी आसानी से शांत होने वाला नहीं है.. अब देखना ये होगा कि कहीं इस मुद्दे से दलितों के मन में जगे विश्वास को डगमगा न दें।

लखनऊ में दलित कैब ड्राइवर पर 99 साल का बैन

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के ही लखनऊ से है। जहां से एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है। वीडियो ने दिखाने वाला शख़्स rapido पर इल्ज़ाम लगा रहा है कि उसने जातिसूचक गलियों का विरोध किया था जिसके बदले rapido ने उसपर 99 साल 11 महीने का बैन लगा दिया है। जी हां आपके भी शायद यकीन न हो, लेकिन ये खबर इस वक्त सबसे चर्चा में है। दरअसल लखनऊ के पीजीआई इलाके के रहने वाले अंकित कुमार का एक वीडियो पहले भी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने अपने कैब थामें बैठे यात्रियों को आधे रास्ते में ही निकाल दिया  था। अंकित ने बताया था कि वो लोग लगातार अपने सीनियर को गालियां दे रहे थे, लेकिन हद तो तब हो गई जब वो उसे जातिगत नामे से अपमानिक करने लगे। अंकित ने कई बार उनका विरोध किया, लेकिन उल्टा वो अंकित को ही भला बुरा बोलने लगे, जिसके बाद अंकित ने उन्हें कैब से बाहर निकाल दिया… लेकिन अब रेपिडो ने बिना अंकित का पक्ष जाने एक तरफा फैसला किया और उन्हें 99 साल 11 महीनों को लिए बैन कर दिया। जिसकी जानकारी खुद अंकित ने दी है.. लेकिन इससे रैपिडो पर जातिवादी होने का आरोप लगने लगा है और उसके बहिष्कार करने की मांग तेज हो गई है.. अब देखना ये होगा कि मामला गर्माने के बाद रेपिडो का क्या रिएक्शन होगा।

भीम आर्मी चीफ ने दी राजनीति छोड़ने की धमकी

4, दलितों से जुड़ा अगला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने सरकार के खिलाफ ऐलान कर दिया है कि दलितों के बच्चों को हक दिलाने के लिए उन्हें राजनीति छोड़कर अगर धरने पर बैठना पड़े तो भी वो पीछे नहीं हटने वाले है। दरअसल यूपी के अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में SCP व TSP के तहत एससी-एसटी के बच्चों को 70% विशेष आरक्षण देने की अपील को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है, जिसे लेकर आजाद ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से एससी-एसटी से आने वाले गरीब-वंचित बच्चों को सबसे ज्यादा नुक़सान हो रहा है, उन्होंने राज्य सरकार से अपील की है कि वो इस मामले में कोई फैसला करें, नहीं तो लखनऊ में प्रदेश स्तरीय आंदोलन होगा.. आजाद ने सीधे तौर पर कहा कि वो अपने बच्चों का अधिकार छीनते नहीं देख सकते है.. इसलिए सरकार को एससी एसटी बच्चों के बारे में सोचना चाहिए.. चुनावों से पहले सरकार औऱ कोर्ट की अनदेखी कहीं चुनावो ते परिणाम पर असर न डाल दें।

अलवर में दलित युवक संदिग्ध हालात में गायब

5, दलितों सो जुड़ा अगला मामला राजस्थान के अलवर से है, जहां झूठे आरोपो को लगा तक दलित जाति से आने वाले शुभम मीणा को पहले तो सीविल ड्रेस में पुलिस वाले उठा ले गए, और अब उसका कुछ पता नहीं है। इस मामले में पीड़ित परिवार की स्थिति खराब होने के बाद ट्राइबल आर्मी के कार्यकर्ता हंसराज मीणा ने सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यवाई के खिलाफ आवाज उठाई है। मीणा ने बताया कि 15 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले 14 अगस्त को शुभम को कुछ पुलिस वाले पूछताछ के लिए ले गए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि इतने दिन बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार को उसकी कोई जानकारी नहीं है.. इतना ही नहीं परिजनो को ये तक नहीं पता है कि शुभम को क्यो गिरफ्तार किया गया है। अलवर के किस थाने में उसे रखा गया है, वो किस हाल में है.. उसकी कोई जानकारी पुलिस ने नहीं दी है.. जिससे घरवालों का शक बढ़ गया हौ कि उनके बच्चे के साथ कोई अनहोनी हो गई है.. राजस्थान की कानून व्यवस्था पर फिर से सवाल उठने लगे है.. क्या दलितों के साथ इस तरह की हरकत करना इतना आसान है.. जहां न कानून व्यवस्था का ड़र है औऱ न न्याय पालिका का.. अब देखना ये होगा कि इस मामले में पुलिस का क्या बयान सामने आता है।

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