Top 5 Dalit news: सरकार कोई कानून बनाती है ताकि उससे जनता का भला हो, लेकिन उस जनता में कौन कौन आता है ये बताना भूल जाती है। क्योंकि अगर लाभ दलितों को मिल रहा है तो वो अनुकम्पा है और अगर सवर्णों को मिल रहा है तो वो उनका हक। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो ये सवाल उठा रहे है कि आखिर ये दलितों के लाभ को खैरात कह कर साबित क्या करना चाहते है। जैसे वो इस देश के नागरिक ही न हो।
फतेहपुर ने दलित छात्राओं के साथ भेदभाव
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है, जहां स्कूल में मिलने वाले खाने की क्वालिटी को लेकर दलित छात्राओं का आवाज उठाना उनपर ही भारी पड़ गया है। छात्राओं के साथ तब से न केवल जातिगत भेदभाव किया जा रहा है बल्कि उनके साथ मारपीट की गई, यहां तक कि स्कूल और बाथरूम की भी जबरन सफाई करवाई गई। ये मामला फतेहपुर में असोथर ब्लॉक में मौजूद कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का है। इस घटना को लेकर पीड़ित छात्राओं की दादी गीता देवी ने जिला कार्यालय में शिकायत की है। जिन्होंने अपनी दोनों पोतियों किरण और कशिश के साथ साथ एक और छात्रा अंजली को न्याय दिलाने की मांग की है। पीड़ित छात्राओं के मुताबिक कुछ समय पहले उन्होंने मिड डे मील में मिलने वाले खाने को लेकर सवाल उठाया था, लेकिन जब से उनका नाम सामने आया है, उन्हें टारगेट किया जा रहा है। स्कूल की तीन टीचर परवीन बानो, अरुणा गौतम और प्रीति गौतम के नाम भी जातिगत भेदभाव करने और खाना मांगने पर स्कूल से बाहर निकालने की धमकी देने में सामने आए है। पीड़ित परिजनों ने बच्चों के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि इस मामले में दोषी टीचर के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो सकें, और बच्चों का शिक्षा व्यवस्था और टीचर पर भरोसा वापिस जगे। हालांकि स्कूल प्रशासन को और से भी अब तक कोई टिप्पणी नहीं आई है ऐसे में देखना ये होगा कि इस एक्शन का क्या रिएक्शन होता है।
पलवल के दलित उत्पीड़न का मामला
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के पलवल से है, जहां जातिगत उत्पीड़न के मामले में राजीनामा न देने पर दबंगों ने पीड़ित युवक को बुरी तरह से पीटा, उसे जातिसूचक गालियां दी और जान से मारने की धमकी भी दी। ये घटना पलवल के गदपुरी थाना अंतर्गत आने वाले असावटी गांव का है। पीड़ित टेकचंद ने पुलिस को तहरीर दी कि 7 अगस्त को जब वो अपने दुकान से लौट रहा था तभी बाइक पर सवार होकर गांव के ही देवा और उसके एक साथी ने पीड़ित को देखते ही जातिसूचक गालियां देनी शुरू के दी थी। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने पीड़ित को बुरी तरह से पीटा। पीड़ित ने बताया कि इस घटना के पीछे पूर्व सरपंच करन उर्फ कनछिद का हाथ है। जो उसपर किसी पुराने मामले को लेकर सुलह करने की बात कर रहे थे, लेकिन टेकचंद इसके लिए राजी नहीं था, इसलिए उसके साथ इस तरह की हरकत करके डराने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित ने अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए अपील की है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में पीड़ितों के साथ न्याय होगा या नहीं।
केशव प्रसाद मौर्य का बीजेपी पर वार
3, दलितों से जुड़ा अगला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से हैं, जैसे जैसे यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे आरोप और प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। बीजेपी पर हमेशा दलित विरोधी होने का आरोप लगता आया है तो वहीं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर जमकर हल्ला बोलते हुए बीजेपी को दलित विरोधी करार दिया है। मौर्य ने एक प्रेस कांफ्रेस में सीएम योगी आदित्यनाथ पर जाति देख कर कार्यवाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम योगी दलितों और पिछड़ों के मामलों को अनदेखी कर देते है। जब भी किसी एससीएसटी वर्ग वाले के साथ अपराध होता है, तब उन्हें न्याय दिलाने के वादे तो खूब होते है लेकिन पुलिस की कार्यवाही पूरी तरह से उन्हें नजरअंदाज करने की होती है। और रही बात न्याय की तो, उसके लिए सालों चक्कर लगाने पड़ते है, जो यूपी के फेल कानून व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है। मौर्य ने मांग की है कि पीड़ित किसी भी जाति का क्यों न हो, उनके लिए सरकार का नजरिया एक होना चाहिए, और सरकार की इसकी जवाबदेही होना अनिवार्य है। मौर्य के इस ऐलान के बाद बीजेपी की साफ सुथरी छवि को फिर से नुकसान होने वाला है, जिसने राजनीति गलियारे में सियासत की हलचलें तेज कर दी है। अब देखना ये है कि मौर्य के इस वार का बुलडोजर बाबा क्या पलटवार करते है। वैसे आप इन आरोपों से कितने सहमत है।
तमिलनाडु में दलित सहायिका की नियुक्ति पर बहिष्कार
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के शिवमोग्गा जिले से है, जहां एक आंगनवाड़ी में दलित सहायिका की नियुक्ति किए जाने की खबर सामने आते ही गांव के कुछ जातिवादी लोगों ने आंगनवाड़ी का बहिष्कार कर दिया। ये मामला शिवमोग्गा जिले के होसनगारा तालुक के अंतर्गत आने वाले मुगदथी गांव का है। जहां आंगनवाड़ी में एक दलित सहायिका को नियुक्त किया गया था, लेकिन जैसे ही लोगों को उसकी जाति का पता चला, उन्होंने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने से इनकार कर दिया। इस खबर के सामने आने के बाद शिवमोग्गा के डीसी प्रभुलिंग कवलिकट्टी ने खुद संज्ञान लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग को तुरंत जांच के आदेश दिए, जिसके बाद सीडीपीओ गायत्री रामचंद्र और रिप्पोनपेट पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गांव में बैठक कर बहिष्कार करने वाले लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि गांव वालों ने जातिगत भेदभाव होने की बात से इनकार किया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या मुमकिन है कि बच्चे खुद ही न आ रहे हो, क्योंकि ऐसा तो तब ही शुरू हुआ जब दलित सहायिका की नियुक्ति हुई। ऐसे में देखन ये होगा कि जांच के बाद क्या सच सामने आता है।
जातिवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा फिर चर्चा में
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के जातिवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है, जो अब ग्वालियर के बाद दिल्ली में भी आरक्षण हटाने, यूजीसी खत्म करने की मांग को लेकर धरने पर बैठने वाले है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने वीडियो जारी कर दी है। अनिल मिश्रा काफी लंबे समय से यूजीसी का विरोध कर रहे है, लेकिन इस हर उन्होंने जनता से अपील की है कि रिजर्वेशन, यूजीसी , scst एक्ट जैसे जातिगत कानूनों को हटाने के लिए वो खुद 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करने के लिए पहुंच रहे है। अनिल मिश्रा ने सभी सवर्णों, ठाकुरो और ओबीसी वर्ग के युवाओं को प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है। बता दें कि अनिल मिश्रा काफी लंबे समय से संविधान में ही बदलाव लाने की कोशिश कर रहे है। जिसके लिए वो scst एक्ट, यूजीसी एक्ट और जातिगत आरक्षण की पूरी तरह से खत्म करने की मांग कर रहे है। हालांकि अनिल मिश्रा काफी दिनों के बाद फिर से सुर्खिया में है। अब देखना ये होगा कि क्या अब भी जनता उन पर विश्वास करती या नहीं। साथ ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने से क्या कोई बदलाव आ सकता है। ये तो आने वाला वक्त बताएगा।



