Buddhism in Egypt: हम सभी जानते है कि बौद्ध धर्म की शुरुआत भारत से हुई थी.. बौद्ध धर्म की स्थापना 6 ईसा पूर्व कपिलवस्तु के युवराज सिद्धार्थ गौतम ने की थी। सिद्धार्थ गौतम जो सत्य की तलाश में 29 साल की उम्र में आधी रात को घर से निकल गए और वैराग्य धारण कर लिया.. 6 सालो की तपस्या की, और तब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, उन्होंने इस संसार को देखने का नया तरीका दुनिया को बताया.. और धीरे धीरे बुद्ध का ज्ञान तेजी से फलने फूलने लगा.. भारत के कई पड़ोसी देशों तक पहुंच गया, लेकिन क्या आप ये जानते है कि बौद्ध धर्म की आखिरी सीमा क्या है।
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मिस्र में मिली 2000 साल पुरानी बुद्ध प्रतिमा
शायद कोई नहीं जानता.. भारत में जहां बौद्ध धर्म लगभग लुप्त होने कगार पहुंच गया था वहीं चीन, श्रीलंका, थाईलैंड, कंबोडिया, म्यांमार, जापान जैसे देशों में बौद्ध धर्म आज भी सबसे महान धर्म है.. बुद्ध के अवशेष कई देशो में प्राप्त हुए है लेकिन साल 2018 में मिश्र में वो मिला, जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। जी हां, मिश्र में भी बुद्ध की 2000 हजार पुरानी मूर्ति मिली है,, हालांकि ये खंडित है लेकिन बुद्ध की प्रतीमा का यहां होना सबूत है कि बौद्ध धर्म की जड़े मिश्र से भी जुड़ी थी।
71 सेंटीमीटर की एक बुद्ध की मूर्ति मिली
दरअसल साल 2018 में मिश्र का एक पुराने पोर्ट बेरेनीचे में देवी आईसिस के प्राचीन रोमन मंदिर में पुरातात्विक खुदाई का काम शुरु किया गया, इस खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध के जुड़े कुछ अवशेष मिले थे, हालांकि तब सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया था। इस अवशेष में मूर्ति का धड़ और सिर मिला था। जिसके बाद मिश्र की सरकार ने जनवरी 2022 में पोलिश अमेरिकी पुरातात्विक मिशन ने इस स्थान पर औऱ खुदाई शुरु की.. वो इस स्थान पर बौद्ध अवशेष की तलाश में थे, और उनकी मेहनत रंग लाई, यहां 71 सेंटीमीटर की एक बुद्ध की मूर्ति मिली, जिसके तारों तरफ आभामंडल भी बनाया हुआ है, जिनके आसपास कमल का फूल बना है।
प्रतीमा का दाहिना हाथ और बाया पैर गायब
हालांकि इस मूर्ति का शरीर पूरा नहीं है.. उनका एक ही हाथ है..प्रतीमा का दाहिना हाथ और बाया पैर गायब है.. जब इस मूर्ति की जांच की गई तो ये दूसरी शताब्दी की पाई गई, उस वक्त रोमन साम्राज्य का शासन था.. औऱ बुद्ध की मूर्ति का मिश्र में पाये जाने के पीछे का कारण भारत और रोमन सम्राज्य के बीच बेहतरीन व्यापारिक संबंधो को बताया जा रहा है। इतिहासकारों की माने बेर्निस रोमन सम्राज्य के वक्त सबसे प्रमुख पोर्ट में से एक हुआ करता था जहां सबसे ज्यादा व्यापारिक जहाज आकर रूका करते थे। भारत से ज्यादातर मसाले समेत कुछ अन्य चीजो का आयात किया जाता होगा। और फिर उंटो के जरिए रोमन सम्राज्य और अलेक्जेंड्रिया तक पहुंचाया जाता होगा।
संस्कृत भाषा में लिखा शिलालेख भी मिला
खोज में मिली मूर्ति को लेकर मत दिया जा रहा है कि ये किसी व्यापारी ने ही रोमन सम्राज्य के किसी व्यक्ति को गिफ्ट किया होगा। ये इंस्ताबुल के दक्षिण क्षेत्र से लाये गए पत्थर से बनाई गई होगी या फिर पत्थर को बेर्निस लाकर यहीं बनाई गई हो.. इसी खुदाई में रोमन सम्राट मार्कस जूलियस फिलिपस का एक संस्कृत भाषा में लिखा शिलालेख भी मिला है.. दो पहली शताब्दी के आसपास का है। खुदाई में बुद्ध की प्रतीमा मिलने के बाद अप्रैल 2023 में मिश्र की Ministry of Tourism and Antiquities आधिकारिक तौर पर बुद्ध की प्रतिमा मिलने की घोषणा की थी।
मिश्रा कोविड के बाद से अपने यहां प्रयर्टन को बढ़ावा देने में लगा है ऐसे में बौद्ध मूर्ति के मिलने से बौद्ध अनुयायियों का ध्यान इस जायेगा। बुद्ध की मूर्ति इजिप्ट में मिलना संकेत है कि बौद्ध धर्म कहीं न कहीं मिश्र तक पहुंचा था.. भले ही यहां इस धर्म का उतना प्रचार प्रसार न हुआ हो लेकिन लोगो में बौद्ध धर्म का सम्मान बहुत था।



