Bibhuti Bhusan Jena: वैसे तो भारतीय जनता पार्टी बदनाम है कि वो दलितों और पिछड़ो के अधिकारों को छीनने के लिए चाल चलती है.. उनके राज में दलितों और पिछड़ो का शोषण बढ़ा है.. काफी हद तक सही भी है, क्योंकि आरएसएस से प्रेरिक बीजेपी हिंदूवादी पार्टी है.. और जैसा कि बाबा साहब अंबेडकर कह गए है कि हिंदू धर्म में जातिगत भेदभाव होता ही रहेगा। लेकिन बावजद इसके बीजेपी में ऐसे कई नेता है जिन्होंने अपनी एक मजबूत जगह बनाई है.. जिनकी उपस्थिति ही काफी है वोटर्स को लुभाने के लिए.. जिन्होंने आज अपने कामों से एक प्रभावशील मकाम हासिल किया है…, उन्ही में से एक है Bibhuti Bhusan Jena… जो लंबे समय से ओडिशा की क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे है.. जिनके दम पर बीजेपी दलितों का भरोसा जीतने में कामयाब हो सकी। अपने इस वीडियो में हम उड़ीसा के बेहतरीन दलित नेताओं में शामिल बिभूति भूषण जेना के बारे में बात करेंगे.. जिन्होंने जब पहली जीत हासिल की थी जो उनके सपथ ग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी शासित 10 राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।
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बिभूति भूषण जेना कौन हैं?
4 जून 2024 को भारत में 18वा लोकसभा चुनाव का परिणाम निकला था, और जैसा कि उम्मीद थी बीजेपी की जीत हुआ और फिर से बीजेपी की सत्ता कायम हुई। ठीक उसके साथ ही उड़ीसा में विधानसभा के चुनाव हुए, और करीब 10 सालों के संघर्ष और दो बार हार सामना करने के बाद गोपालपुर निर्वाचन क्षेत्र से बिभूति भूषण जेना ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। दलित जाति से आने वाले बिभूति भूषण जेना की सालों की मेहनत आखिरकार रंग लाई थी.. जो वो जमीनी स्तर पर अपने लोगो के लिए करते आ रहे थे.. 2009 में हारे, फिर 2019 में भी हारे, लेकिन हार तब भी नहीं मानी.. और न ही बीजेपी ने अपने इस नेता से भरोसा खोया.. फर्श से अर्श तक का सफर करने वाले जेना का बचपन बेहद अभावों और भेदभाव के बीच गुजरा था। Bibhuti bhusan jena का जन्म 27 मई 1967 को गंजम के गोलानथरा में हुआ था। उनके पिता नित्यानंद जेना काफी साधारण व्यक्ति थे, और उन्होंने अपने बच्चों को भी साधारण तरीके से पाला, ताकि वो कभी अपनी असली जमीन से दूर न हो।
चूकीं एक दलित होने के कारण बचपन में उन्हें बाकी बच्चों के मुकाबले काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, परिवार में कई अभाव थे लेकिन जेना तब भी कभी घबराए नहीं। अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद जेना ने साल 1993 में बहरामपुर यूनिवर्सिटी के गंजम कॉलेज से बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। अपने कॉलेज के दिनों में उन्होंने जब आसपास भेदभाव और बच्चों की समस्याओं को देखा तो उनसे रहा भी गया। उन्होंने भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया और वो सामाजिक कार्यों में जुड़ने लगे। अपनी पढाई पूरी करने के बाद जेना सामाजिक कार्यों में ही जुटे रहे। वो एक किसान परिवार से थे, जो सामाजिक कामों के साथ साथ वो किसानी करते थे और दलितो से जुडडे मुद्दे पर बेहद पावरफुल तरीके से आवाज उठाते थे, जिससे उन्हें उनके क्षेत्र में पहचान मिलने लगी। ग्रामीण विकास के मुद्दों पर उठाया गया उनका कदम बेहद सनसनीखेज होते थे..और व दलित समुदाय के ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगो के बीच भी काफी प्रचलित हो गए थे।
एक कार्यकर्ता के तौर पर उनकी उपलब्धि को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें अपने साथ शामिल कर लिया.. औऱ जेना ने भी बीजेपी के जमीनी स्तर पर प्रभाव स्थापित करने के लिए काम किया.. वो लोगो के घर घर तक पहुंचे थे.. उन्होंने बीजेपी के लिए जो निष्ठा और ईमानदारी दिखाई, उसने बीजेपी को भी बेहद प्रभावित किया था। बीजेपी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और अपना विश्वास दिखाते हुए पहली बार 2009 में गोपालपुर सीट से मौका दिया.. लेकिन वो इस चुनाव में हार गये.. जेना ने इस हार को स्वीकार किया अपने मकसद को पूरा करते रहे। 2019 में उन्हें फिर से बीजेपी ने मौका दिया.. लेकिन अफसोस वो इस बार भी हार गए.. बीजेपी ने उनकी मेहनत को करीब से देखा था। अपने सामाजिक कार्यों से वो एक बेहतरीन नेता कहलाने लगे थे.. जिसके बाद 2024 में फिर से चुनाव हुए औऱ जेना ने बीजू जनता दल के प्रत्याशी बिक्रम कुमार पांडा को हरा कर अपने राजनैतिक करियार की पहली जीत हासिल की। आपको जानकर हैरानी होगी कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के कई बड़े कद्दावर नेता शामिल हुए थे। जिसमें पीएम मोदजी, गृह मंत्री अमित शाह औऱ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे नेता शामिल हुए थे। जेना को उनकी पहली ही जीत मिली थी लेकिन फिर भी सीएम मोहन चरण मांझी की कैबिनैट में Minister of Commerce, Transport, Steel & Mine का पद दिया गया।
जेना के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि थी, हालांकि मंत्री बनने के बाद विपक्षियों की नजरो में आ गए और उनपर कई संगीन आरोप लगे, जिसमें जनवरी 2026 में ईडी द्वारा अवैध बालू और काले पत्थर के खनन के मामले में छापेमारी की जिसमें जेना के रिश्तेदार का नाम सामने आया.. जिसके बाद उनके इस्तीफे की मांग भी तेज हुई थी,, वहीं जून 2026 में जेना के भतीजे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था क्योंकि उसने इंजीनियरिंग कॉलेज के एक 20 साल के स्टेंडेट को खुदकुशी करने के लिए उकसाया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस मामले में पुलिस केवल इसलिए लापरवाही कर रही है क्योंकि आरोपी एक नेता का भतीजा है। लेकिन देना ने दो टूक जवाब दिया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है जो दोषी होगा उसे सजा होगी। जेना ने कहा कि न्याय से ऊपर कुछ नहीं है.. केवल गंदी राजनीति करने के लिए इस तरह से बिना बात के मुद्दा बनाना सही नही है। जेना अब भी उड़िसा में बीजेपी के लिए एक कोर मेंमबर की भूमिका मिभा रहे है।



