Rajendra Pal Gautam: जून 2026 में कांग्रेस फिर से उत्तर प्रदेश में वापसी करना चाहती है, चुंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कांटे की टक्कर दी थी, जिसके बाद कहीं न कहीं ये तो साफ हो गया था कि जहां एक तरफ बीजेपी ने जनता का भरोसा खोना शुरु कर दिया था तो वहीं कांग्रेस यूपी की जनता का भरोसा फिर से कायम करने में सफल हो रही है, ऐसे में 2027 में यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विपक्ष की तैयारी काफी मजबूत हो रही है। ऐसे में कांग्रेस ने यूपी का दारोमदार एक दलित जाति से आने वाले नेता राजेंद्र पाल गौतम के कंधे पर दे दिया है।
राजेंद्र पाल गौतम, एक ऐसे नेता है जिन्होंने मात्र 2 साल पहले ही कांग्रेस का दामन थामा था लेकिन उनकी प्रतीभा और नेतृत्व की शक्ति का ही नतीजा है कि आज वो राहुल गांधी के फेवरेट बन गए है। वहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के साथ मिलकर दलितों को साधने में अहम भूमिका निभाने वाले राजेंद्र पाल गौतम की कहानी को जानेंगे.. कैसे आज एक दलित जाति से होने के बाद भी उन्होंने अपने कार्यशैली से पार्टी में एक अहम स्थान हासिल किया.. और कैया है उनका सफर..
कौन है राजेंद्र पाल गौतम..
जब 2014 में भारत में लोकसभा चुनाव हुए थे, तब नई नई बन कर ऊभरी आम आदमी पार्टी में एक दलित चेहरे ने एंट्री की थी। इस नेता की दिल्ली की गलियों से न केवल बेहतरीन दोस्ताना था, बल्कि बचपन से ही दिल्ली की गलियों में खेले औऱ यहां कि राजनीति से लेकर भौगेलिक स्थिति को भी समझते थे। ये नेता थे राजेंद्र पाल गौतम। 26 अप्रैल 1968 को राजधानी दिल्ली में दिलिप सिंह के घर जन्मे राजेंद्र पाल गौतम एक दलित जाति से आते है, और बौद्ध धर्म के अनुयायी है। जैसे जैसे बड़े हुए उन्होंने अपने आस पास समाज में फैली जातिगत भेदभाव की कुरीति को बखूबी समझा और धीरे धीरे वो बाबा साहब अंबेडकर की विचारधारा की तरफ बढ़ने लगे।
स्कूल के बाद जब उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई शुरु की तब वो कॉलेज में ही छात्र राजनीति में सक्रिय होने लगे, वो अंबेडकर की विचारधारा पर ही चलते थे और लोगो को जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ जागरूक करते थे। हालांकि कॉलेज पूरा होने के बाद उन्होंने बतौर वकील प्रेक्टिस शुरु कर दी थी, वो एक गैर-सरकारी संगठन परिवर्तन से जुड़े थे और इस दौरान वो दलितों और गरीबों के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देते थे और नशे की लत से ग्रसित युवाओं को जागरूक करते औऱ उन्हें नशे के जंजाल से निकालने के लिए सामाजिक कार्य करते थे।
परिवर्तन के साथ काम करने के दौरान 2022 तक उन्होंने ‘मिशन जय भीम नाम का संगठन भी चलाया था, जिसके वो खुद संस्थापक थे। लेकिन 2010 में भ्रष्टाचार के खिलाफ आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की मुहीम में राजेंद्र पाल गौतम ने भी बढ़ कर सपोर्ट किया, उनके सपोर्ट मे केजरीवाल का ध्यान खींचा औऱ 2014 में आप पार्टी से उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा था। लेकिन उन्होंने दलितों और पिछड़ो के लिए लड़ाई तब भी जारी रखी, 2015 में आम आदमी पार्टी दिल्ली में प्रचंड बहुमत से आई और वो 14 फरवरी 2015 को सीएम अरविंद केजरीवाल की तीसरी सरकार में कैबिनेट मंत्री चुने गए थे..यहां उनकी प्रतीभा के दम पर उन्हें समाज कल्याण, एससी और एसटी, सहयोगी, गुरुद्वारा चुनाव औऱ महिलाएँ और बच्चे वाले विभार का प्रभार दिया गया था।
उनकी कोलप्रियता ऐसी थी कि जब 2020 में दुबारा दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए तो राजेंद्र पाल गौतम फिर से सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य चुने गए। उन्हें इस दौरान समाज कल्याण विभाग का प्रभार दिया गया, और यहां उन्होंने जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना की शुरुआत की, जिसके तहत वो छात्र जो कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आते है और IIT JEE, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के इच्छुक है, उन्हें सरकार मुफ्त में ट्यूशन मुहैयार कराने लगी थी। इससे दलित और पिछड़ी जाती से आने वाले छात्र जो उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते है, लेकिन आर्थिक कमजोरी और भेदभाव के कारण ऐसा करने में समर्थ नही थे उन्हें बहुत बड़ा मौका मिला। जो उन्हें शिक्षित और शसक्त बनाने के लिए अहम कदम था।
उनके दलित जाति के लिए दिये गए योगदान के लिए 2017 में समता सैनिक दल का डॉ. अंबेडकर पुरस्कार दिया गया था। हालांकि कहते है न कि अगर आप सही रास्ते पर है तो रोड़े बिछाने वालो की कमी नहीं है.. ऐसा ही उनके साथ भी हुआ। 5 अक्टूबर 2022 को, बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया और मिशन जय भीम ने एक संयुक्त कार्यक्रम किया, जिसमें बाबा साहब द्वारा बौद्ध धर्म अपनाते समय 22 प्रतिज्ञाओं ली गई थी, उसे इस कार्यक्रम में दोहराया गया था, लेकिन बीजेपी ने इन प्रतिज्ञाओ पर आपत्ति उठाना शुरु कर दिया और देवी देवताओं की पूजा न करने को उनका अपमान बताया।
गौतम ने बीजेपी पर पलटवार करने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसे वक्त पर आप उनके साथ खड़ी नही हुई, जिससे उन्हें काफी आघात हुआ और उन्होंने 9 अक्टूबर 2022 को केजरीवाल मंत्रिमंडल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन हैरानी की बात है कि इतना होने के बाद भी आप की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं गौतम ने पीएम को एक कमजोर पीएम कहा था, क्योंकि यूपी में दलित उत्पीड़न होने के बाद भी वो सीएम योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा तक नहीं ले सकते है।
गौतम ने महसूस किया कि आप उन्हें दलितो के मुद्दो पर कभी सक्रिय आगे नहीं बढ़ने देती इसलिए 6 सितंबर 2024 को उन्होंने आप को छोड़ दिया और कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। राजेंद्र पाल गौतम का एससी एसटी वर्ग पर इतना प्रभाव था कि 4 जून 2025 को उन्हें कांग्रेस ने अनुसूचित जाति विभाग की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष चुना गया। वो कांग्रेस की तरफ से दलितो के मुद्दों पर डटकर खड़े रहते है और इसलिए आगामी यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर 26 जून 2026 को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए एआईसीसी प्रभारी चुना गया, उनका केवल एक ही टारगेट है कि वो राज्य की दलित औऱ पिछड़े लोगो क संगठित कर सकें। ताकि यूपी में बढ़ते दलित उत्पीड़न के खिलाफ संगठित आवाज उठाई जा सके। राजेंद्र पाल गौतम के यूपी में एंट्री करने के बाद क्या बड़े बदलाव आयेंगे, औऱ क्या कांग्रेस और बसपा फिर से दलितों का भरोसा पूरी तरह से जीत पायेगी.. ये देखने वाली बात होगी।



