Top 5 Dalit News: मेरठ हत्याकांड से तमिलनाडु के बड़े फैसले तक, जानिए आज की 5 बड़ी खबरें

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Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने भारत का कानून इस तरह से बनाया कि जिस सामाजिक और आर्थिक न्याय की लड़ाई वो आजीवन लड़ते रहे वो लड़ाई आने वाली पीड़ियों को न लड़नी पड़े, लेकिन आजादी के करीब 7 दशक बीतने के बाद ये न्याय की लड़ाई तो और उग्र हो गई है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है, जो ये सवाल खड़े कर रहे है कि आखिर क्यों दलितो को आज भी सामाज का हिस्सा नहीं माना जाता है। क्यों जारी है आज भी उनका उत्पीड़न।

मेरठ में ललिता गौतम की हत्या का मामला गर्माया

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से है, जहां एक 20 साल को दलित युवती की हत्या को करीब 2 महीने होने के बाद भी पुलिस ने अब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार न करके उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। ये मामला रोहटा थाना क्षेत्र के टीपी नगर क्षेत्र का है, जब 15 मई को ललिता गौतम नाम की एक युवती अपने घर से बीए का एग्जाम देने निकली थी लेकिन वो लापता हो गई। घरवालों ने लड़की की गुमशुदगी को रिपोर्ट लिखवाई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो उसका शव 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र में ही गन्ने के खेतों से बरामद हुआ।

जिसके बाद पुलिस सकते में आ गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और फोन रिकॉर्ड खंगाले तो मुख्य आरोपी अंकुश का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबित मुख्य आरोपी का मृतिका के साथ प्रेम सम्बन्ध था, और घटना वाले दिन उसने ललिता के फोन में किसी और के मैसेज और पिक्टर देखे थे, जिससे उस शक हुआ कि ललिता उसे धोखा दे रही है, और इसी गुस्से में उसके ललिता की हत्या कर दी थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया है, लेकिन पीड़ित परिवार वाले पुलिस की जांच को लेकर अब भी प्रदर्शन कर रहे है। इसके लिए महापंचायत की गई और कलेक्ट्रेट के सामने भी उग्र प्रदर्शन किया गया।

दलित समाज के लोगों का कहना है कि पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है, इसमें दो और लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं इस मामले में भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद और समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने भी कानून प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। उन्होंने जल्द से जल्द न्याय की मांग की है और पीड़िता परिवार को उचित मदद देने की भी अपील सरकार से की है। वहीं पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लिए गए लाठी चार्ज के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने को मांग की है। अखिलेश यादव ने सीधा प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या ये सड़क किसी के पिताजी की है, जहां दलित समाज के लोग प्रदर्शन नहीं कर सकते है। पुलिस की कार्यवाही केवल न्याय की आवाज को दबाने के लिये की गई है। लेकिन कब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, हम इनके साथ रहेंगे।

उत्तराखंड की युवती का यूपी में दुष्कर्म

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली युवती के साथ लगातार 3 सालों तक दुष्कर्म करने , उसका अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करके पैसे ऐंठने का है। ये घटन युवती के साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में घटी है। पीड़िता ने आरोपियों के टॉर्चर से तंग आकर आखिरकार पुलिस की मदद की। पीड़िता ने बताया कि करीब 3 साल पहले स्कूटी लेने के लिए एक दोपहिया वाहन की दुकान में गई थी तब उसकी मुलाकात मुख्य आरोपी मयंक चौधरी से हुई थी, उसने पीड़िता को आश्वासन दिलाया कि वो उसे स्कूटी दे देगा, जिसके बदले पीड़िता ने आरोपी को 70 हजार रुपए भी दिए थे, मगर आरोपी ने स्कूटी नहीं दी और न ही पैसे लौटाए। जिसके बाद सब पीड़िता ने लगातार डिमांड की तो आरोपी ने उसे पैसे देने के बहाने मुरादाबाद के कांशीराम नगर में एक कमरे के बुलाया था, जहां उसने पीड़िता को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर दिया और जब वो बेतहाशा हो गई तो उसका दुष्कर्म किया, इतना ही नहीं उसका अश्लील वीडियो बना लिया।

इसने पीड़िता को धमकी दी कि अगर इस घटना का जिक्र किसी से किया तो वो वीडियो वायरल कर देगा। उसने ब्लैकमेल करके पीड़िता का कई बार दुष्कर्म किया और करीब डेढ़ लाख रुपए ऐंठे। पीड़िता शादीशुदा है, लेकिन आरोपी अब उसपर दवाब बना रहा था कि वो अपने पति को तलाक देकर उसके साथ रहे, वरना उसे जान से मार देगा। वहीं पीड़िता ने जब स्थानीय पुलिस ने मदद मांगी तो उनलोगों ने उल्टा पीड़िता को ही धमका दिया जिसके बाद उसने मुरादाबाद परिक्षेत्र के डीआईजी मुनिराज-जी से गुहार लगाई और उन्होंने बिना किसी देरी के एक्शन लेते हुए मामला दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने तुरंत मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है वहीं आरोपी के पिता समेत कई लोग संदिग्ध बनाए गए है। जिसकी तलाश जारी है।

बिहार के चंपारण में दलित युवक पर जानलेवा हमला

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के पूर्वी चंपारण से है, जहां जातिगत दुश्मनी निकालने के लिए एक दलित युवक पर जानलेवा हमला करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस हमले में पीड़ित युवक की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है तो वहीं पुलिस ने भी पीड़ित परिवार के बार बार कहने के बाद भी मामले में एस्ट्रोसिटी एक्ट नहीं जोड़ा, ताकि आरोपी को बचाया जा सकें। वही जब पीड़ित परिवार को पुलिस से कोई न्याय मिलने की उम्मीद नहीं दिखी तो उन लोगों ने राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान से मदद मांगी जिसके बाद तुरंत पांच सदस्यीय टीम पीड़ित परिवार से मिलनी पहुंची। प्रदेश महासचिव विद्यानंद राम ने बताया कि पीड़ित की हालत अभी भी गंभीर है और उसका इलाज जारी है, वहीं पुलिस ने अब तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया है।

ऐसे में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठना लाजिमी है। आखिर पुलिस किसे बचाने की कोशिश कर रही है। बता दे कि ये मामला पूर्वी चंपारण के चिरैया थाना क्षेत्र के वैद्यनाथपुर गांव का है। कहां किसी पुरानी रंजिश के चलते गुड्डू कुमार नाम के शख्श पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया और फरार हो गए, वहीं जब पीड़ित परिवार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की कोशिश की तो पुलिस ने मामले को राफ दफा करने को कोशिश की। अब राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान के इस मामले में पढ़ने के बाद पुलिस का क्या रवैया होगा और कब तक मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे ये देखने वाली बात होगी। लेकिन ये  तो साफ हो गया है कि जब तक शोर नहीं होगा तब तक न्याय नहीं होगा।

पंजाब के संगरूर में 40 साल पुराने लड़ाई में दलितों की जीत

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के  संगरूर जिले से है, जहां दलित समुदाय को पिछले 40 सालों की लड़ाई का आखिरकार फल मिला औऱ नजूल सोसायटी की ज़मीन से गैर-कानूनी कब्ज़ा हटाकर दलितों को ज़मीन दिलाने की लड़ाई जीती है। ये मामला संगरूर जिले के रायधराना का है। दलितो की जमीन पर पिछले 40 सालो से अवैध कब्जे को लेकर रायधराना ज़मीन संघर्ष कमेटी लड़ाई लड़ रही थी। वहीं करीब 16 सालों से कानून लड़ाई भी जारी थी, लेकिन आखिकार सत्य और न्याय की ही जीत हुई औऱ कानून लड़ाई दलित समुदाय ने जीती।

लेकिन फिर भी हाई कोर्ट की डबल बेंच के आदेश के बावजूद सिविल एडमिनिस्ट्रेशन ने 3 महीनो तक जमीन कब्जे में नहीं दी, जिसके बाद संघर्ष कमेटी के प्रेसिडेंट मुकेश मलौद और फाइनेंस सेक्रेटरी बिकर सिंह हथोआ ने मोर्चा खुद संभाला और दलित समाज के लोगो के साथ खुद अधिग्रहण करने पहुंच गए..  इस जीत की खुशी मनाने के लिए दलित समाज के लोग बाबा जीवन सिंह गुरु घर में जमा हुए..जहां उन्हें उनकी जमीन आखिरकार मिल गई। ये जीत न केवल उनके सालों के संघर्ष का फल है बल्कि सबूत है कि न्याय देरी से हो लेकिन होगा जरूर।

तमिलनाडु सीएम ने दलित उत्पीड़न रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु से है, जहां दलितों औप पिछड़ो को सामाजिक न्याय दिलाने और उनके खिलाफ हो रहे उत्पीड़न के मामलों में कमी लाने के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य सतर्कता और निगरानी समिति का  फिर से गठन किया है। इस समिति के  अध्यक्ष खुद सीएम ही होंगे। इस समिति में सभी  संसद और विधान सभा के निर्वाचित  प्रतिनिधियों के साथ साथ अलग से 59 सदस्यों को शामिल किया गया है।

इस समिति की देखरेख सीएम करेंगे, जिनके तहत राज्यों में एससी एसटी वर्ग के साथ होने वालों मामलो को लेकर साल में दो बार समीक्षा बैठत आयोजित की जायेगी, ताकि राज्य में दलित, पिछड़े किस स्थिति में है उनके बारे में सही जानकारी सरकार के पास हो, वहीं राज्य में उनके उत्पीड़न के खिलाफ हर सख्त कदम उठाया जा सकें। हालांति उम्मीद तो है कि इस कदम से राज्य में दलित उत्पीड़न में कमी आये.. वैसे ये कितना सफल होगा वो तो आने वाला वक्त बतायेगा।

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