Marital rape: भारत में एक मुद्दा अभी भी ऐसा है जिसे अपराधिक श्रैणी में रखा जाये या नहीं, इसपर आज भी लगातार बहस जारी है। ये मसला है मैरिटल रेप को लेकर.. हालांकि कई ऐसे देश है जहां मैरिटल रेप को अपराधिक श्रैणी में न केवल रखा गया है बल्कि ऐसे अपराधो को अंजाम देने वाले पतियों को सलाखों की हवा भी खानी पड़ती है, लेकिन भारत में इस मुद्दे पर अब भी बहस जारी है, सवाल एक ही है क्या मैरिटल रेप अपराध है या नहीं.. अगर अपराध है तो उसके क्या दायरे होंगे.. और किस हालात में महिला पति के खुfलाफ मामला दर्ज नहीं करा सकती है। अपने इस वीडियो में हम मैरिटल रेप और उससे जुड़े कानूनो को जानेंगे साथ ही धारा 377 के हटने के बाद क्या नए बदलाव आये है।
What is marital rape?
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अनुसार कोई पति बिना पत्नी के इच्छा से जबरन यौन संबंध बनाता है वो मैरिटल रेप कहलायेगा, लेकिन बशर्ते अपवाद 2 के अनुसार इसमे शिकायतकर्ता पत्नी की उम्र 18 साल से कम होनी चाहिए। अगर पत्नी 18 साल से ज्यादा की है तो कानूनन शादी के बाद पति को पत्नी के शरीर पर असिमित अधिकार प्राप्त होने वाला एक एग्रीमेंट माना जाता है। हालांकि इस अपवाद के कारण अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) एक समान सोच, समानता, गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के अनुसार जीने के प्रानधानो का हनन होता है।
धारा 375 और उसका अपवाद वैवैहिक पुरुषों को जो छूट देता है उससे संवैधानिक नैतिकता और लैंगिक न्याय का हनन हो रहा है। इस कारण 2017 में सुप्रीम कोर्ट के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के 2017 के मुकदमे के बाद कोर्ट ने ये प्रावधान बनाया कि नाबालिक पत्नी से भले ही उसकी इच्छा से संबंध बनाया गया हो वो बलात्कार कहलायेगा। लेकिन उसी के साथ धारा 377 की ताकतो को भी बालिग पत्नी को नहीं दिया गया। जिसके तहत बालिक पत्नी अपने पति पर न तो बलात्कार करने का आऱोप लगा सकती है औऱ न ही आप्रकृति यौन संबंध बनाने का आरोप लगा सकती है।
लेकिन 2018 में धारा 377 को आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया, जिसके तहत दो बालिग, चाहे वो समलैंगिक जोड़ी हो या फिर विपरीत लिंग के लोग आपसी सहमित से अगर आप्रकृतिक संबंध बनाते है तो 2017 से पहले वो अपराध की श्रैणी में था, लेकिन नवजोत सिंह जौहर बनाम भारत संघ केस के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपराध की श्रैणी से अलग कर दिया गया था। लेकिन बावजूद इसके 377 कई मामलो में लागू होता था जिसमें बिना इच्छा के यौन संबंध बनाने, जानवरो के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध और नाबालिगों से जुड़े अपराध शामिल है।
वहीं 2024 में लागू भारतीय न्याय संहिता 2023 के आने के बाद धारा 377 को पूरी तरह से हटा दिया गया है, लेकिन बीएनएस में धारा 89 में क्रूरता को दर्शाया गया है, जिसे लुइसियाना का कानून कहा जाता है जिसके तहत अगर कोई मनुष्य अपने समान या विपरीत लिंग के व्यक्ति के साथ अप्राकृति यौन संबंध बनाता है, वहीं जानवरों के साथ भी अप्राकृति यौन संबंध स्थापित करता है तो वो धारा 89 के तरह ही अपराधी होगा और उसके अनुसार ही सजा दी जायेगी। हालांकि बीएनएस 2023 में कितनी सजा होगी उसके बारे में विस्तार पूर्वक नहीं कहा गया है।
जैसा कि आईपीसी की धारा 377 में थी.. जहां अप्राकृतिक संबंध बनाने के दोषी पाये जाने के बाद आरोपी को आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा और जुर्माना देने का प्रावधान था, लेकिन बीएनएस में धारा 377 का प्रावधान हटा दिया गया है और कानून रूप से कुछ सुक्षरा भी दे दी गई है। यानि की वैवाहिक बलात्कार पर बहस काफी लंबे समय से जारी है और आगे भी पता नहीं कब तक जारी रहेगी। वैवाहिक स्त्री का अपने ही शरीर पर अधिकार नहीं होता.. ये प्रावधान गलत है लेकिन इसमें बदलाव कब तक आय़ेगा, ये कहना अभी थोड़ा मुश्किल है।



