AISHE Report: उच्च शिक्षा संस्थानों में SC-ST महिला शिक्षकों का कम प्रतिनिधित्व, रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा

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AISHE Report: हाल ही में दिल्ली से हैरान और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ, रिपोर्ट से पता चला है कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में SC-ST फैकल्टी का रिप्रेजेंटेशन काफी कम है। ये चौकने वाला खुलासा AISHE रिपोर्ट में हुआ है। जिसके बाद से ये गंभीर चिंता का विषय बन चूका है।

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एससी एसटी शिक्षकों को लेकर दी रिपोर्ट

राजधानी दिल्ली से खबर सामने आई है, जहां से उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी एसटी जाति के कोटा होने के बाद भी प्रयाप्त शिक्षकों की भर्ती नहीं होती है, जिसमें  पुरुष शिक्षको से ज्यादा बुरी स्थिति तो एससी एसटी जाति से आनी वाली महिला शिक्षको के आकड़े चिंता देने वाले है। दरअसल अभी हाल ही में शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण यानि की All India Survey on Higher Education (AISHE) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें ये खुलासा किया गया है कि  विश्वविद्यालयों में IIT और NIT जैसे संस्थानों में एससी एसटी वर्ग के आने वाले शिक्षको में बेहद कमी दर्ज की गई है।

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एससी एसटी वर्ग की महिला शिक्षिकांओं में भारी कमी

जी हां, आकड़े बताते है कि सभी उच्च संस्थानों को मिलाकर अनुसूचित जाति (SC) से केवल 10 प्रतिशत शिक्षक है तो वहीं अनूसूचित जनजाति से केवल 3 प्रतिशत आते है। इतना ही नहीं हाल के कुछ सालों में एससी एसटी वर्ग (SC ST category) की महिला शिक्षिकाओं (women teachers) में भारी कमी आई और ये आकड़ा 44 से घटकर 27 प्रतिशत ही रह गया। इसमें सबसे बुरी स्थिति उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की है। वही SC-ST कैटेगरी के लिए रिज़र्व फैकल्टी के बहुत सारे पद खाली पड़े हैं, जिससे एजुकेशन में सोशल इन्क्लूजन के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसी रणनीति बनाए जिससे उचित कैंडीडेट को पद मिले

मंत्रालय ने ये रिपोर्ट 1,278 यूनिवर्सिटीज, 46,468 कॉलेजों और 11,787 इंडीपेंडेट संस्थानों के साथ मिलकर बनाई है। हैरानी की बात तो ये है कि सभी संस्थानों में एससी  एसटी वर्ग (SC ST category) के लिए पर्याप्त कोटा तय है लेकिन फिर भी जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के कारण जो आकड़े सामने आये है वो दर्शाते है कि केवल एससी एसटी छात्र (SC ST Students) ही नही, शिक्षक भी जातिगत भेदभाव औऱ उत्पीड़न से अछूते नहीं है। ऐसे में देखना ये होगा कि क्या सरकार कोई ऐसी रणनीति तैयार करेगी जिससे ये रिक्त स्थान भरे जा सकें.. औऱ साथ ही उचित कैंडीडेट को ही पद मिले।

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