Top 5 Dalit news: दलित छात्रा की मौत, पुलिस पर गंभीर आरोप पढ़िए आज की 5 बड़ी खबरें

Top 5 Dalit news in Hindi
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Top 5 Dalit news: आज के समय में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर दलितो की सुरक्षा कैसे और कहां कहां की जायें… गांव तो गांव शहरो में भी उनकी स्थिति खराब हो चुकी है..लोकतंत्र भारत में सबको शिक्षा का समान अधिकार तो मिला है, लेकिन दलितों को उच्च शिक्षा हासिल करते हुए देखना कौन चाहता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहां दलित आज भी केवल अछूत और उत्पीड़न के योग्य माने जाते है।

तमिलनाडु के विल्लुपुरम में 18 साल की दलित छात्रा की मौत

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम से है, जहां एक 18 साल की दलित छात्रा अपने कॉलेज के महिला छात्रावास में नहाने गई थी लेकिन अचानक बाथरूम में संदिग्ध हालत में उसकी लाश बरामद हुई है। जिसके बाद से ही पूरे कॉलेज परिसर में खलबली मची हुई है तो वहीं मृतका के परिजन पुलिस पर लापरवाही करने का आरोप लगा कर प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए। दरअसल ये घटना विल्लुपरम के कोयंबटूर विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय में घटित हुई है। मृतक छात्रा एम धर्निका विक्रवंडी तालुक के मेलाकोन्धई गांव की रहने वाली थी, और टीएनएयू की बीएससी कृषि की सेकेंड ईयर की स्टूडेंट थी औऱ पढ़ाई के लिए हॉस्टल में ही रहती थी। जानकारी के मुताबिक धर्निका नहाने के लिए बाथरूम में गई थी, लेकिन जब वो नहीं लौटी तो दोस्तो को लगा कि शायद वो पहले ही क्लास में चली गई, लेकिन करीब 6 घंटे बाद भी जब वो क्लास नहीं आई तो उसके सहपाठियों ने उसकी तलाश शुरू की इस दौरान वो बाथरूम में पहुंचे तो दरवाजा अंदर से ही बंद था। किसी तरह से दरवाजा तोड़ा तो धर्निका वहीं मिली। आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रशासन और कोयंबटूर के आरएस पुरम पुलिस दोनों ही लड़की की मौत की जांच में लापरवाही कर रहे है, जो कहीं न कहीं बच्ची की मौत को संदिग्ध बना रहा है। इतना ही नहीं कॉलेज में किसी ने परिजनो से ढंग से बात तक नहीं की, बच्ची के चेहरे पर कई तरह के निशान थे। उन्होंने गुस्से में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और चेन्नई-तिरुची राजमार्ग पर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जो भी इस मामले में जिम्मेदार होगा उसे सजा जरूर मिलेगी। हैरानी की बात है कि अगर पुलिस पहले ही अपनी जिम्मेजारी निभा लेती तो पीड़ित परिवार को सड़क पर उतरने की जरूरत ही क्यों पड़ती। अब देखना ये होगा कि पुलिस जांच के बाद क्या होता है।

यूपी के बलिया में पुलिस की बर्बरता से दलित की मौत

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बलिया से है, जहां दो समुदाय की कहासुनी ने एक खून रंग पकड़ लिया, तो वहीं पुलिस ने भी एक पक्ष पर बर्बरता का सारी हदें पा कर दी..आदिवासी समुदाय से आने वाले एक शख्स को पहले तो बिना वारंट के उठा ले गई और फिर उसे बुरी तरह से मारपीट कर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया। ये मामला बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र का है, पीड़ित विशाल ने बताया कि 7 जुलाई को उसके पिता कामजी गोड़ और पड़ोसियो के बीच किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई थी। इस मामले को लेकर  8 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे दो पुलिस कांस्टेबल उसके पिता को पुलिस स्टेशन ले गए थे। जिसके बाद उन्हें करीब 4 घंटे तक टॉर्चर करने के बाद वापिस घर छोड़ने के बजाय विवाद करने वाले आरोपी ग्राम प्रधान लालू सिंह और उनके ड्राइवर मनीष यादव को सौंप दिया, जिसके दो घंटे बाद उसके पिता ‘ठगनी माई के डेरा’ के पास  बेहोश हालात में मिले। आननफानन में उन्हें कई अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अंत में वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, जहां 10 जुलाई को  कामजी गोंड ने दम तोड़ दिया। मगर पुलिस की बर्बरता यहीं नहीं रूकी, 11 जुलाई को जब पीड़ित परिवार शव के साथ लौट रहा था तब भी  सुखपुरा रोड पर पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यावहार किया। पुलिस के रवैये से पूरे गांव में आक्रोश फैल गया औऱ वो लोग शव के साथ सड़को पर उतर आये..वहीं एस दौरान पीड़ित परिवार से मिलने पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान और निषाद पार्टी के बांसडीह नेता कनक पांडेय भी पहुंचे थे। मामले को बढ़ता देख कर पुलिस ने किसी तरह के सबको समझाया औऱ 6 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है, आरोपियों में 2 पुलिस वाले भी शामिल है, अब देखना ये होगा कि जांच के बाद क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

उड़िसा में दलित युवक को 3 दिन तक बंधक बना कर पीटा

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला ओडिशा के गंजाम जिले से है, जहां एक दलित युवक ने कुछ दबंगो की गैरकानूनी गतिविधियों में उनका साथ देने से इंकार किया किया, दबंगो ने 3 दिनों तक पीड़ित को एक कमरे में बंद करके पीटा, इतना ही नहीं उसे इस दौरान खाने पीने के लिए भी नहीं दिया गया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके 4 आरोपी पीड़ित को बुरी तरह से पीटते नजर आ रहे है। इस दौरान एक लिखित शिकायत भी सामने आई है जो पीड़ित ने की है, उसने चारों आरोपियो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, और अपनी जान को खतरा भी बताया है। पीड़ित ने अपने लिए न्याय की गुहार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गंजाम जिला प्रशासन से भी लगाई है। हैरानी की बात है कि अभी तक इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि को आरोपियों के खिलाफ कार्यवाई को लेकर पुलिस की तरफ से कोई बयान नहीं आया है औऱ न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी की गई है.. ऐसे में देखना ये होगा कि क्या पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती है, या वो भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

मुरादाबाद में दलित महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराया

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से है, जहां सरकार दलित महिलाओ के साथ न तो अत्याचार रोक पा रही है और न ही धर्म परिवर्तन कराने का खेल। ताजा मामला मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र के  प्रकाश नगर का है, जहां एक मुस्लिम दंपत्ति ने एक दलित महिला को पहले तो अपने भरोसे में लेकर दोस्तों जैसा व्यावहार किया और जब पीड़िता उन पर आंख बंद करके भरोसा करने लगी तो आरोपी सुल्तान सलाउद्दीन की नियत महिला को लेकर बिगड़ने लगी और 6 फरवरी को किसी बहाने ने आरोपी दंपत्ति मेहराज बेगम औऱ  सुल्तान सलाउद्दीन ने पीड़िता को घर बुलाया, जब वो घर पहुंची तो वहां पर दंपत्ति के अलावा एक मौलवी और दो अज्ञात लोग मौजूद ते, उन लोगो ने पीड़िता के सिर पर बंदूक रख दी औऱ उसे बंधक बना लिया, जिसके बाद उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया औऱ  सुल्तान सलाउद्दीन ने जबरन उससे शादी भी की। उन लोगो ने पीड़िता को इतने दिनों तक बंधक बना कर रखा था, लेकिन 11 जुलाई को एक शिकायती पत्र पुलिस स्टेशन को मिला था, जिसमें पीड़िता ने आप बीती बताई थी, जिसके बाद पुलिस ने बिना किसी देरी के कार्यवाई की औऱ दोनो आरोपी दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया, वहीं मौलवी और दो अज्ञात लोगो की तलाश जारी है। हैरानी की बात है कि कोई महिला 6 महीने से प्रताड़ित हो रही थी, उसका धर्म परिवर्तन किया गया लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। फिर भला कैसे पुलिस जागरूकता की बात करती है।

कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरे नगीना सांसद

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां जंतर मंतर पर पिछले 15 दिनो से कोकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके समेत नीट परिक्षा पेपर लीक खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर धरना कर रहे है, उनके आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए आखिरकार भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी छात्रों के समर्थन में टिप्पणी की है। उन्होंने सरकार को तानाशाह कहते हुए कहा कि लोकंतत्र केवल नाम का रह गया है, क्योंकि 10 दिन से ऊपर हो गये है, भूखे प्यासे बच्चो की हालात खराब हो रही है लेकिन सरकार नींद से जागने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को भी बच्चो को उतनी ही पीड़ा देनी चाहिए जितनी बर्दाश्त की जायें, बच्चों को अभी पता नही है कि आंदोलन कैसे होता है, उन्हें दुख होता है बच्चो को इस कदर प्रताड़ित होते देख कर। लेकिन सरकार को तानाशाही छोड़ देनी चाहिए। आजाद ने सीधे तौर पर कहा कि उनके पास समय की कमी है, वरना अगर वो खुद भूख हड़ताल पर बैठ जाते तो एक ही दिन में सरकार को पता चल जाता कि आंदोलन क्या होता है, औऱ कैसे मांगे मानी जाती है। इसी बीच भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी 12 जुलाई को उनसे मिलने पहुंचे और उन्होंने आजाद का संदेश भी दिया, उन्होंने कहा कि  युवाओं को डरने की जरूरत नहीं है, वो उनके साथ है।   ईमानदारी से शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे। आजाद का संदेश साफ है कि बच्चे जो कर रहे है वो सहीं रास्ते पर है.. उन्हें झुकना नहीं चाहिए। हालांकि इतने दिन बीचने के बाद भी सरकार का रवैया बेहद रूखा है, ऐसे में देखना ये होगा कि क्या अब सरकार कोई फैसला लेगी।

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