Uttar Pradesh: पुलिस कस्टडी में दलित व्यक्ति की मौत, शव को कब्जे में ले जबरन अंतिम संस्कार कराने का आरोप

Ballia News, Dalit man dies in police custody
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Uttar Pradesh: हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया (ballia) से एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली खबर सामने आई, जहां एक दलित व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। जब परिवार एंबुलेंस में शव लेकर लौट रहा था, तो पुलिस ने एंबुलेंस को रोक दिया, शव को अपने कब्जे में ले लिया और जबरन अंतिम संस्कार करने की कोशिश की। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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पुलिस टॉर्चर से दलित की मौत

उत्तर प्रदेश में पुलिस की क्रूरता लगातार बढ़ती जा रही है, जहां पुलिस हिरासत में टॉर्चर के कारण एक दलित की मौत हो गई। ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ मामूली कहासुनी के बाद पुलिस कामशंकर नाम के एक दलित आदमी को थाने ले गई। उसके परिवार का आरोप है कि उसे बुरी तरह पीटा गया, थर्ड-डिग्री टॉर्चर किया गया और फिर गांव के बाहर छोड़ दिया गया। जिसके बाद गंभीर हालत में उसे CHC से जिला अस्पताल लेकिन हालत बिगड़ने पर BHU रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही कामजी गोंड की मौत हो गयी। जिसका एक विडियो सोशल मीडिया काफी वायरल हो रहा है।

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मीट लेने बेटे के साथ मारपीट

दरअसल उत्तर प्रदेश (UP) के बलिया (Ballia) में 42 वर्षीय कामजी गोंड गायघाट गांव (Gaighat village) में अपने परिवार के साथ रहते थे। वह राजमिस्त्री का काम करते थे। घर में उनकी 40 पत्नी रीमा और बेटा विशाल रहते हैं। कामजी के 2 भाई हैं। बड़ा भाई रामजी बाहर नौकरी करता है। दूसरे नंबर का भाई श्यामजी विकलांग है। वह कामजी के साथ घर पर ही रहता है। इसी बीच बीते 7 जुलाई को शाम 4 बजे के आस-पास उनका बेटा विशाल मीट खरीदने के लिए सूरज कनौजिया की दुकान पर गया।

पुलिस ने कामजी को जमकर पीटा

वही दोनों में किसी बात पर बहस हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि सूरज और उसके रिश्तेदारों ने विशाल पर लाठियों से हमला कर दिया। विशाल भाग गया। इसके बाद सूरज गांव के मुखिया आशुतोष शंकर सिंह और उनके ड्राइवर मनीष यादव के साथ पुलिस स्टेशन गया और विशाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद अगले दिन SI सचिन सरोज और कॉन्स्टेबल अंकित सिंह विशाल के घर पहुंचे। उन्हें विशाल के पिता घर पर मिले। पुलिस उन्हें थाने ले गई। आरोप है कि वहां कामजी को जमकर मारा-पीटा गया।

इलाज के दौरान कामजी की मौत

वही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक के बेटे ने बताया कि पुलिस इससे संतुष्ट नहीं हुई और अगले दिन वे उस जगह पर पहुंच गए जहां उसके पिता काम करते थे और  वहां भी उन्हें पीटा गया। जिसके बाद गाँव के बच्चो ने उन्हें बताया की उनके पिता बेसुध हालत में बगीचे में पड़े हुए है। खबर मिलते ही परिवार वाले उस जगह पहुचे और कामजी को रेवती CHC (Community Health Centre) ले गए। वहां से उसे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। हालत गंभीर होने पर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ने उसे BHU रेफर कर दिया। वहां ट्रॉमा सेंटर में 10 जुलाई की रात 11 बजे उसकी मौत हो गई। फिर BHU में ही कामजी का पोस्टमॉर्टम किया गया।

वही जब कामजी का शव पोस्टमॉर्टम के बाद घर लाया जा रहा था। तभी गुस्साए गाँव वालो ने सड़क जाम कर दी। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुची और उन्होंने भीड़ पर काबू पाने के लिए लाठी चार्ज शुरू कर दिया और कामजी के शव को अपने अंडर ले लिए और जबरन अंतिम संस्कार की बात करने लगे। लेकिन मौके पर मिली सुचना के मुताबिक पुलिस 5 थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। जिसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव परिजनों को दिया गया। इसके अलवा इस मामले में ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, एसआई सचिन सरोज, कांस्टेबल अंकित सिंह, संतोष और सूरज समेत 6 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है।

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