Karnataka: हाल ही में कर्नाटक के मंगलुरु से एक मामला सामने आया है, जहां एक दलित महिला से पहले उसकी जाति पूछी गई, और फिर उसके साथ गैंगरेप किया गया.. लेकिन इस घटना के करीब 8 साल बीत जाने के बाद पीड़िता को न्याय मिला, औऱ चारों आरोपियों को 20-20 साल की कठोर कारावास।
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जाति पूछकर दलित का गैंगरेप करने वालो को सजा
आज भी हमारे देश में कानून ढीले हैं; भले ही आखिरकार न्याय मिल जाता है, लेकिन इसमें अक्सर सालों लग जाते हैं—इस दौरान आरोपी आज़ादी से घूमता रहता है, जबकि पीड़ित को बस कोर्ट के अंतहीन चक्कर लगाने पड़ते हैं। जी हाँ, ऐसा ही मामला मंगलुरु (Mangaluru) के थोता बैंगरे (Thota Bangre) के पास बीच के किनारे घटित हुई थी। जहाँ एक दलित महिला के साथ दरिंदो ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। जिसके सालो बीत जाने पर आरोपियों को सजा हुई है।
दरअसल, 18 नवंबर, 2018 को पीड़िता अपने एक दोस्त के साथ घूमने गई हुई थी, इस दौरान आरोपियों ने दोनो को पहले रोका उनसे उनका नाम, पता औऱ जाति पूछी.. जिसके बाद वो महिला के साथ छेड़खानी करने लगे। लेकिन जब पीड़ितो ने इसका विरोध किया तो आरोपियो ने पीड़िता के दोस्त को बंधक बना लिया।औऱ पीड़िता के घसीट कर झाड़ियो में ले जा कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
आरोपियों को 20 – 20 साल की सजा
इतना ही .. दोनो पीड़ितो से मोबाईल औऱ नकदी लूट कर धमकी दी गई कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो जान से मार देंगे .. पीड़िता ने घबराने के बजाये पुलिस को इसकी जानकारी दी, करीब 65 गवाहों में से 40 से पूछताछ की गई और करीब 8 सालो के बाद कोर्ट ने आरोपियो को दोषी करार देते हुए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और सभी आरोपियों पर 10 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।



