Cockroach Janata Party: एक सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बेरोजगार लोगों की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” (पैरासाइट) से की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग—जो मीडियाकर्मी, सोशल मीडिया यूज़र या RTI एक्टिविस्ट होने का दिखावा करते हैं—लगातार दूसरों पर ऑनलाइन हमले करते रहते हैं। इस टिप्पणी से अभिजीत दिपके को बहुत बुरा लगा, जो उस समय अमेरिका में थे; उन्होंने इस पूरी बात का रुख ही बदल दिया। उन्होंने “Cockroach Janata Party” नाम से एक सोशल मीडिया पेज बनाया और यह संदेश फैलाया कि जस्टिस की नज़र में भारत के युवा सिर्फ़ कॉकरोच और परजीवी हैं। यह पेज इतनी तेज़ी से लोकप्रिय हुआ कि दिपके भारत लौट आए और एक छात्र आंदोलन की अगुवाई की। जस्टिस ने यह साफ़ करने की कोशिश की कि उन्होंने “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल खास तौर पर उन लोगों के लिए किया था जो फ़र्ज़ी डिग्रियों का इस्तेमाल करके योग्य उम्मीदवारों के हक़ छीनते हैं, लेकिन तीर कमान से निकल चुका था—और यह मुद्दा देश के युवाओं के बीच बम की तरह फैल गया था। ज़रा सोचिए: एक अकेले पेज ने ऐसी क्रांति छेड़ दी। सोशल मीडिया की ताक़त को निश्चित रूप से हल्के में नहीं लिया जा सकता। लेकिन ऐसे खास नाम क्यों चुने जाते हैं, और उनका क्या असर होता है? हम इसी बारे में चर्चा करेंगे।
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कॉकरॉच जनता पार्टी की कहानी?
कोकरॉच जनता पार्टी के बाद अब एक नाम और ट्रेंडिग कर रहा है..RHA… हैरान मत होइये.. ये कोई ब्लडग्रूप के बारे में नहीं है.. बल्कि देश में एक ऐसे मुद्दे को लेकर है, जिसे कुछ चाहते है कि ये रहे और कुछ चाहते है कि ये हटा दिया जाये.. आरएचए आखिर है क्या.. ये भी जान लेते है.. आर, रिजर्वेशन.. एच -हटाओ और ए आंदोलन.. यानि की रिजर्वेशन हटाओ आदोंलन.. एक तरफ केंद्र सरकार ने केवल चर्चा ही शुरु की थी कि वो चाहते है कि कुछ क्षेत्रों से रिजर्वेशन हट जाना चाहिए.. अब रिजर्वेशन के मारे सवर्ण और ठाकुरों के लिए तो ये अंधे को लाठी देने जैसा है.. बस फिर क्या था सोशल मीडिया पर फिर से एक पेज बना.. लेकिन इस बार ये पेज बीजेपी के सपोर्ट बनाया गया.. और देखते ही देखते 5 मिलियन से भी ज्यादा फॉलोवर्स हो गए,.. यानी की सारा खेल सोशल मीडिया का..
अभिजीत दीपके की पेज की ताकत
अब आप चंद्र शेखर आजाद जैसे दिग्गज नेता को ही लीजिये.. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सीधा चेतावनी दी कि अगर आरक्षण हटाया तो वो सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। भई लोकतंत्र है.. देश आजाद है.. तो आपका जो मन करें, आप कह सकते है। सोशल मीडिया पर पेज बना कर अटपटे नाम भी रख सकते है। लेकिन सबसे हैरानी की बात तो ये है कि इन पेजो का राजनीतिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव हो रहा। हमें सीजेपी (CJP) का किया गया नीट परिक्षा पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर का आंदोलन नहीं भूलना चाहिए। अभिजीत दीपके की पेज की ताकत है कि हजारो छात्र देशभर में एजुकेशन सिस्टम में होने वाली लूपहोल्स के खिलाफ सड़को पर उतर गई है। बिहार, झारखंड , महाराष्ट्र हो या राजस्थान.. बड़े तो छोड़िये प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी आंदोलन कर रहे है।
सोशल मीडिया पर जो पेज बन रहे है.. लोग उन्हें बेधड़क फॉलो तो कर रहे है.. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या उसे फॉलो करने वाली 90% यूथ को उनके एक्चुअल मोटो के बारे में जानकारी भी है। क्या वाकई में सीजेपी ने देश के सभी यूथ को कॉकरोच कहा था। आप में से कितनो ने सही मायने में उनका बयान सुना था। आरक्षण हटाने की बात करने वाले.. जरा ये सोच कर बताये कि देश में जिन्हें आरक्षण मिला है उनका उत्पीड़न बंद हो चुका है। सपोस किजिये कि आरक्षण हटा भी दिया गया तो उसके बाद क्या.. गिनती के सीट्स रिजर्व रखनी वाली ये सरकार उन इलाकों में उन्हें क्या सुरक्षित रख पायेगी। जहां वो संख्या में कम है.. नहीं.. फिर से बेगारी शुरु होगी.. औऱ शोषण का दौर भी.. जहां जो ताकतवर है, वहां वो हावी होगा.. खुद सोच के देखिये.. कि जहां संविधान निर्माण के समय सरदार वल्लभ भाई पटेल आरक्षण के खिलाफ थे।
वहीं बाबा साहब जैसे बुद्धिजीवी..परम ज्ञानी व्यक्ति ने आरक्षण देने की बात पर सहमति जताई थी। भारत की समाजिक व्यवस्था कैसी है हमें पता है.. इसलिए अगर दलितो और पिछड़ो से ये हक भी छीन लिया तो वो दौर आने में समय नहीं लगेगा.. जब उनका खुलेआम उत्पीड़न होगा.. और समाज तमाशबीन बन कर देखता रहेगा। सोशल मीडिया आज के समय में वो शक्तिशाली हथियार है.. जिसका इस्तेमाल अगर सही से न किया जाये तो आपको ही इस डीजीटल आंधी में उड़ा देगा। पेज क्यों बने.. किस नाम से बने.. वो मायने नही रखता.. बल्कि उसके पीछे का मोटो क्या है वो मायने रखता है.. अब जरूरी है कि कही सुनी बातों पर भरोसा करने के बजाय इसी सोशल मीडिया पर सच्चाई का पता लग कर साथ दिया जाये.. आज तो जेन जी का जमाना.. उन्हें भला कौन बेवकूफ बना सकता है।



