Hathras case Update: हाल ही में उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2020 के गैंगरेप मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है, जहां इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने परिवार को तीन महीने के अंदर नोएडा या गाजियाबाद में बसाने और पुनर्वास के बाद परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि इस समय सीमा के भीतर सरकार फैसला नहीं लेती है, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।
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नोएडा/गाजियाबाद में दें घर और सरकारी नौकरी
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को पुनर्वास के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा या गाजियाबाद में उपयुक्त आवास और रोजगार/जमीन की व्यवस्था की जाए। वही यूपी सरकार अलीगढ़, कासगंज या एटा में उन्हें घर देने पर अड़ी थी। जबकि पीड़ित परिवार सुरक्षा की वजह से यहां नहीं रहना चाहता था। जिसके बाद कोर्ट ने सरकारी वकील की तीन महीने की मोहलत वाली अर्जी को यह कहते हुए स्वीकार किया कि यह सरकार को दिया जाने वाला आखिरी अवसर है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार परिवार को दी जा रही जमीन
उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार परिवार को हाथरस में घर और जमीन दी जा रही थी। लेकिन परिवार ने सुरक्षा कारणों से दिल्ली-एनसीआर (नोएडा/गाजियाबाद) में बसने की इच्छा जताई। दिल्ली-एनसीआर (Delhi/ NCR) में घर देने के लिए राज्य सरकार की मौजूदा पुनर्वास नीति में ढील देने या संशोधन करने की आवश्यकता है।
सरकार ने तीन महीने का समय मांगा
जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी चाहिए। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए सरकार ने तीन महीने का समय मांगा है। पीड़ित परिवार के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि हाथरस में सामाजिक माहौल और सुरक्षा संबंधी खतरों को देखते हुए परिवार वहां वापस नहीं जाना चाहता। वे पिछले काफी समय से दिल्ली के पास गाजियाबाद या नोएडा में बसने और आजीविका के साधन की मांग कर रहे हैं। वही court ने एक एक को नौकरी देने का आदेश दिया है..इसके अलवा आपको बता दें, इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।
जानें क्या था पूरा मामला
आपको बता दें, कि हाथरस जिले के चर्चित बुलंदगढ़ी बिटिया केस में 14 सितंबर, 2020 को एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया था। 26 सितंबर, 2020 को पीड़िता के बयान के आधार पर चंदपा थाने में चार आरोपियों लवकुश, रामू, रवि और संदीप के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 29 सितंबर, 2020 को दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। जिसके बाद लड़की का जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया गया था। वही इस मामले में यूपी सरकार ने पांच पुलिसवालों को सस्पेंड भी कर दिया था। इतना ही नहीं, इस मामले को लेकर देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और लगातार न्याय की मांग की गई।



