Sabarimala Dispute: हाल ही में सबरीमाला मंदिर के एंट्रेंस और उससे जुड़े साइंटिफिक कम्युनिटी पर दलित और बहुजन बुद्धिजीवियों ने बार-बार बहस की है। वही इस मामले में सनी एम. कुप्पिकड ने सबरीमाला मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों, जाति के आधार पर ज़ुल्म और सिस्टमिक तरीकों पर सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने मंदिर में विराजमान देवता को लेकर भी विवादित टिप्पणी की, जिससे मामला काफी गरमा गया है।
सबरीमला मंदिर का अपमान
केरल के सबरीमला मंदिर के अपमान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें दलित कार्यकर्ता सनी एम कपिक्कड़ के बयान को गलत तरीके से दिखा कर उसने धर्म विरोधी करार दे दिया गया है। जब ये मामला गरमाने लगा तो कपिक्कड़ ने माफी भी मांग ली, लेकिन वो अब भी अपनी बात पर अड़े है कि भले ही उनके शब्द कुछ गलत थे लेकिन वो केवल उन लोगों पर निशाना साध रहे थे जो मंदिर के रक्षक होने का दावा करके मंदिर को केंद्र में रख कर अपना झूठ सबको बता रहे है। उसका गलत प्रचार कर रहे है।
दरअसल सनी एम. कपिक्कड़ अभी हाल ने एक कार्यक्रम ने गए थे, जहां उन्होंने भगवान अयप्पा और देवी मलिकप्पुरथम्मा को लेकर विवादित टिप्पणी देते हुए उनके नित्य ब्रह्मचारी’ होने पर तंज कसा था। उन्हें कहा था कि संघ उनके ब्रह्मचर्य का नाम लेकर इस तरह का प्रचार कर रही है जैसे महिलाओं के मंदिर में जाने से उनका ब्रह्मचर्य भंग हो जाएगा। ये साफ है कि मंदिरों का नाम इस्तेमाल करके संघ देश में नई तरह की राजनीति कर रहा है, और देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा हैं।
आपत्तिजनक शब्दों के कारण उनके खिलाफ मामला दर्ज
इन आपत्तिजनक शब्दों के कारण उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया, हालांकि ने बिना किसी देरी के माफी मांगते हुए कहा उन्होंने किसी धार्मिक आस्था के प्रति ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि संघ की उस सोच के प्रति निशाना साधा था जो धर्म के नाम पर झूठ और आडंबर फैला रही है। लेकिन माफी मांगने के बाद भी संघ आसानी से चुप नहीं बैठने वाला। अब देखना ये होगा कि दलित नेता की मुसीबतें और कितनी बढ़ेगीं। वैसे क्या आप उनकी बातों से सहमत है।



