Top 5 Dalit news: दलितों की स्थिति खराब होने के पीछे आज के समय में अगर सबसे ज्यादा कोई जिम्मेदार है तो वो पुलिस प्रशासन… लोगों का विश्वास उन पर इस कदर टूट गया है कि वो सबसे अंतिम ऑप्शन के रूप में उनके पास जाना चाहते है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो ये दिखाते है कि कैसे लोगो में कानून का डर नहीं है, और दलित पिछड़े कानून के पास जाने से ही डरते है.. जो कानून की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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जौनपुर में एक हफ्ते से लापता है दलित बच्ची
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के जौनपुर से है, जहां घर से किसी काम से निकली दलित किशोरी अचानक गायब हो गई, और करीब एक हफ्ते बीतने के बाद भी उसका सुराग नहीं मिला। हैरानी की बात तो ये है कि पिछले एक सफ्ताह से लापता बच्ची को वो लोग खुद ही खोज रहे थे। लेकिन जब उन्हें बच्ची के बारे में कोई सुराग नहीं मिला तब वो थक हार कर पुलिस के पास पहुंचे है। अब इसे पुलिस की नाकामी कहे, या फिर दलितों का पुलिस के प्रति अविश्वास। जो उन्होंने पुलिस के तीखे और भद्दे सवालों के जवाब देने के बजाय खुद कोशिश की। ये मामला जौनपुर के मछलीपुर का है। पीड़िता पिता ने तहरीर दी कि 19 जुलाई को उनकी 15साल की बच्ची रोडवेज जाने के लिए निकली थी, लेकिन वो घर नहीं लौटी। जिसके बाद परिजनों ने खुद बच्ची की तलाश शुरू की लेकिन करीब एक हफ्ते बीतने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस से मदद की गुहार लगाई है। घरवालों को डर है कि बच्ची किसी अनहोनी का शिकार न हो गई हो। अब पुलिस ने बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने के बाद खुद तलाश शुरू कर दी है।देखना ये होगा कि बच्ची के लापता होने के पीछे आखिर क्या वजह थी और क्या पुलिस उसे सही सलामत ला पाएगा। इस मामले में हुई देरी के लिए आपकी नजरों में दोषी कौन है।
डाल्टनगंज में दलित युवक की हत्या
दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के डालटनगंज से है। जहां पुरानी रंजिश के चलते एक युवक ने पहले ताश खेलने के बहाना किया और फिर जानबूझ कर बहस शुरु की ताकि उसे मौका मिले और वो दलित युवक की हत्या कर दे। जी हां ये सनसनीखेज मामला डाल्टनगंज के छतरपुर के पिपरा पुलिस थाना क्षेत्र के मधुबना गांव का है। मृतक प्रभनाथ रजवार के छोटे भाई ने पुलिस को तहरीर दी और बताया कि सोमवार को दोपहर को करीब डेढ़ बजे उसका भाई और आरोपी रमेश सिंह बनियान के पेड़ के नीचे ताश खेल रहे थे लेकिन तभी दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जिससे नाराज आरोपी ने एक तेजधार लोहे के हथियार जिसे स्थानीय लोग बलुआ कहते है, से हमला कर दिया। जिसके तुरंत बाद वो फरार हो गया तो वही घायल प्रभुनाथ रजवार को मेदिनिराय मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जिसके बाद उसके भाई ने पुलिस को उसकी जानकारी दी। पुलिस ने बिना किसी देरी के गवाहों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी। छतरपुर के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) प्रशांत कुमार” ने बताया कि आरोपी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने जानबूझ कर मृतक को उकसाया था , क्योंकि वो काफी समय से उससे बैठ रखता था। पुलिस आगे की जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्यों कानून का डर नहीं है किसी को, जो उतने बड़े गुनाह करने से पहले केवल जाति देखते है, कानून नहीं।
पंजाब में दलितों को साधने के लिए बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब से है, जहां 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी ने पंजाब के सबसे ज्यादा वोटर को साधने के लिए नई और सटीक प्लानिंग शुरू कर दी है। जी हां हम बात कर रहे पंजाब के दलित और पिछड़े वोटर की। पंजाब में चुनावी रूपरेखा को बदलने की ताकत रखने वाले दलित वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी ने उनके आराध्य संत रविदास जी की 650 वी जयंती पर कुछ बड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके लिए उन्होंने 29 जुलाई से समरसता संकल्प अभियान शुरू किया है। बीजेपी के राज्य प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने खुद इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ये अभियान पंजाब के डेरा सचखंड बल्लान से शुरू होकर 20फरवरी 2027 तक चलेगा और इस यात्रा का अंतिम पड़ाव वाराणसी के शीर गोवर्धन पुर में संत रविदास के जन्मस्थान होगा। बीजेपी ने ये यात्रा सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की शुरू की गई बेगमपुरा ब्लूप्रिंट के तहत एक साल तक चलने वाले बिंदु दर बिंदु अभियान को कमजोर करने के लिए है। ये अभियान जिसमें पंजाब सरकार ने 650 एकड़ में फैले हरित क्षेत्र जिन्हें गुरु रविदास बगीची कहा जाता है, वहां करीब सौ करोड़ रुपए खर्च करके 65लाख वृष रोपण, सार्वजनिक कार्यक्रम, संत के जीवनी को दर्शाती डॉक्यूमेंट्री को 23 जिला को गांव तक पहुंचाने और उन्हें दिखाने के लिए led की व्यवस्था करने जैसे प्लान शामिल है। जिसे कमजोर करने के लिए बीजेपी ने अपना दाव खेला है। ऐसे ने सवाल ये उठाता है कि क्या दोनों की पार्टी के दावों को पंजाब की दलित पिछड़ी जनता स्वीकार करेगी। आपको क्या लगता है, इससे क्या फायदा हो सकता है। क्योंकि अंत में मामला तो दलितों का ही है, उन्हें साधने का ही है।
यूपी में सड़कों पर उतरे सैकड़ों स्कूली बच्चे
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जो एक तरफ से मध्य प्रदेश के दतिया में होने वाले उपचनावों में अपने प्रत्याशी दामोदर यादव के लिये बढ़ चढ़ कर चुनाव प्रचार कर रहे है तो वहीं वो अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश में होने वाली घटनाओं पर ही पूरी तरह से फोकस रख रहे है। एक सच्चे और चौंकाने नेता कैसा होता है उसका सबूत आजाद ने दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले एक कुछ वीडियो को लेकर आवाज उठाई है। ये वीडियो फतेहपुर जिले के किशनपुर कस्बे की है, जहां के सर्वोदय इंटर कॉलेज के सैकड़ों छात्र हाथों में बाबा साहब की तस्वीर लेकर सड़को पर उतर आये है। इन बच्चों की शिकायत है कि उनके स्कूल में लंबे समय से साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था बहुत बदहाल है। बच्चों के बेंच-डेस्क टूटे हुए हैं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है और शौचालयों की स्थिति तो और भी खराब है। बार बार स्कूल प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी उनके कानों पर जूं नहीं रेंगी, तो बच्चों ने अपनी समस्या को खुद सुलझाने के लिए सड़को पर उतरने का फैसला किया। आजाद ने बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि ये डबल इंजन की सरकार है जहां की शिक्षा व्यवस्था की स्थिर इतनी बुरी है। ऐसे में छोटे बच्चों को भी अपने हक के लिए सड़को पर आंदोलन करना पड़ रहा है। सवाल ये है कि आखिर क्यों बड़े तो बड़े अब बच्चों को न्याय और हक के लिए आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है। क्या सरकार की नजरों में उनके भविष्य से उन्हें कोई मतलब नहीं है।
पंजाब में स्टैंडअप इंडिया को लेकर केंद्र से सवाल
दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है और उसके साथ ही बीजेपी जहां 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों से लगले दलित वोटर्स को साधने के लिए नए नए हथकंडे अपना रही है तो वहीं भरी संसद नमे विपक्ष भी बीजेपी को दलित मुद्दे पर ही घेरने से पीछे नहीं हट रही है। जी हाँ, साल 2016 में पंजाब की अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के लिए शुरू किये गए लोन योजना को लेकर राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने केंद्र से तीखे सवाल किए थे। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या वाकई में इससे राज्य के दलितों और पिछड़ों को लाभ मिला भी है या नहीं। जिस पर अब केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। केंद्र के मुताबिक स्टैंडअप इंडिया योजना के तरह पीछे पांच सालों में 1,418 उधमियों को लोन दिया गया है साथ ही सरकार सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीटीएमएसई) लागू कर रही है। इस योजना के तहत पंजाब में 5,710 से ज्यादा लोगों के लोन को स्वीकार किया गया है जिसमें 25 प्रतिशत scst वर्ग को शामिल किया गया। सरकार के इस जवाब से संधू ने कुछ संतुष्टि तो दिखाई लेकिन सवाल अब भी वही है क्या वाकई में दलितों और पिछड़ों तक इनका सही लाभ पहुंचा या नहीं उसकी रिपोर्ट कौन देगा। और सबसे बड़ा सवाल, इससे राज्य के कितन प्रतिशत दलित आर्थिक रूप से आजाद हुए है।



