आखिर गौतम बुद्ध ने क्यों ठुकराया राजपाट? जानिए मन के विज्ञान का रहस्य – Buddhism science

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Buddhism science: जरा सोचिये.. गौतम बुद्ध तो एक राजकुमार थे.. कपिलवस्तु के भावी सम्राट थे.. जहां दुनिया ऐशाआराम के लिए दिन रात मेहनत कर रही है, सत्ता के एक दूसरे का खून बहाया जा रहा हो.. ऐसे समय में बुद्ध ने सिंहासन को मिट्टी का ढेला समझ कर लात मार दिया.. आखिर क्यो.. जी हां, जवाब आप भी जानके कि उन्हें सत्य की तलाश करनी थी.. लोगो के दुखो का कारण जानना था.. लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर उन्हें सत्या की तलाश करनी ही क्यों थी.. क्यों लोगो के दुखो का कारण जानना था.. इसका क्या जवाब होगा। इसका जवाब है आंतरिक शांति..जी हां, तिब्बत के धर्म गुरु दलाई लामा ने स्वयं आंतरिक शांति को लेकर अपने अनुयायियों को वो मार्ग बताया.. जो आपके ये समझने में मदद करता है कि क्यों बौद्ध धर्म आपके मन का विज्ञान है.. और आपकी मानसिक चेतना ही बौद्ध धर्म में सबसे अहम है। अपने इस लेख में हम इस मन के विज्ञान को लेकर चर्चा करेंगे.. जो आपकी आँखो खोल देगा कि क्यों बौद्ध धर्म बाबा साहब अंबेडकर का सबसे पसंदीदा धर्म बना था।

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राजकुमार से बुद्ध बनने तक

साल 2006 की बात है.. दलाई लामा जापान के मियाजिमा के  दाइस्योइन मंदिर में प्रवचन देने पहुंचे थे.. जहां उन्हें सुनने के लिए जापान, कोरिया और चीन से करीब 2000 बौद्ध अनुयायी आये हुए थे। यहां प्रवचन के दौरान दलाई लामा ने बौद्ध धर्म को एक नए रूप में परिभाषित करते हुए कहा बौद्ध धर्म मन का विज्ञान है। दलाई लामा का बौद्ध धर्म के लिए ऐसा कहने के पीछे कई ऐसे तथ्य औऱ कारण छिपे है.. जिन्हें सबके लिए समझना नामुमकिन है।

आंतरिक शांति के लिए आपके मन का प्रशिक्षण सबसे ज्यादा जरूरी है.. और उसके लिए सबसे बेहतर रास्ता है बुद्ध का मार्ग.. बौद्ध धर्म की गहन समझ और उचित अध्ययन ही व्यक्ति के मन को बिल्कुल उस तरीके से पवित्र कर देता है.. जैसा फिल्टर होने के बाद पानी साफ हो जाता है। हम अपने दुखो से परेशान रहते है.. और कहते है कि सुख हमें क्यों नहीं मिलता.. या हमारा सुख कुछ क्षण भर की ही क्यो रहता है, तो लामा कहते है। कि व्यक्ति को सुख की अनुभूति करने के लिए आंतरिक रूप से शांत होना अनिवार्य है। आपने देखा होगा कि बुद्ध ने वो आंतरिक शांति पाने के बाद मन के सभी विकारो से मुक्ति पा ली थी। वो उनकी अवहेलना करने वालों को भी मुस्कुरा कर देखा करते थे.. वो इस गूढ़ सत्य को जान गए थे कि जब तक आंतरिक सुख महसूस नहीं होता, तब तक सुख कितना भी महान क्यों न हो.. वो बिल्कुल मृगतृष्णा के समान है। वो पल भर का ही होगा।

गौतम बुद्ध ने क्यों चुना संन्यास?

बुद्ध का मार्ग आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है.. जो पूजा पाठ, पाखंड, अंधविश्वास से प्राप्त नहीं होने वाला.. उसके लिए बुदध के बताये ज्ञान को गहराई से समझने, उसका अनुशासन के साथ पालन करने और उसका निरंतर अभ्यास करने से प्राप्त होगा। जिस तरह से विज्ञान तब तक किसी बात को सत्य नहीं मान लेना, जब तक उसकी वो स्वंय प्रत्यक्षदर्शी न हो.. उसने स्वयं अवलोकन न किया हो, और उसका रिजल्ट न देखा हो.. तब तक विज्ञान की नजरो में वो एक पाखंड है… ठीक वैसे ही बौद्ध धर्म में समझा जाता है। आप किसी भी घटना पर विश्वास करने से पहले खुद अवलोकन कीजिये.. उसका परिणाम देखिये और तब उस पर विश्वास कीजिये.. बुद्धिज्म कहता है कि आपको सबसे पहले भावनात्मक रूप से पवित्र होने की जरूरत है। जो ध्यान करने से ही होगा..इसका उद्देध्य व्यक्ति का क्रोध औऱ उसकी आसक्ति को कम करना होता है।

दिमाग की संरचनाओं और तंत्रिका मार्ग में परिवर्तन

माइंड एंड लाइफ इंस्टीट्यूट जैसे कई बौद्ध संगठन ने अपनी रिसर्च में ये साबित किया है ध्यान की प्रक्रिया में अगर आप पूरी तरह से खुद को समर्पित कर देते है तो आपके दिमाग की संरचनाओं और तंत्रिका मार्ग में परिवर्तन आते ही है। विज्ञान की पद्दति को अगर आप बौद्ध शिक्षाओ के आधार पर देखेंगे तो ये समझ पायेंगे कि पूरा साइंस सिस्टम बौद्ध शिक्षाओं पर ही निर्भर है। बौद्ध धर्म जहां कर्मों का प्रयोग होता है.. और कर्मो के आधार उसका परिणाम आता है।  वैसे ही वैज्ञानिक पद्धति है.. बार बार प्रयोग किये जाते है।  उसके लिए अलग अलग मार्गों की तलाश की जाती है.. सफल हुए तो ठीक नहीं हुए तो एक नया सवाल मिलता है।

एक उदाहरण के तौर समझते है.. साइटिस्ट जब कोई एक्सपेरिमेंट करता है तो सबसे पहले वो पॉइंट्स पर बेस्ड होती .. Hypothesis और experimental method.. उसके बाद साइटिस्ट जो भी अनुभव हासिल करता है.. उससे वो तय होता है कि उसका एक्सपेरिमेंट सफल हुआ या नहीं.. वैसे ही बौद्ध धर्म में गुरु के अनुभव से वो भी आपको  Hypothesis और experimental method ही बताते है.. जैसे कि जब आप ध्यान कर रहे है तो केवल अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें और जब आपका मन शांत और सजग अवस्था में चला जाता है तो बारी आती है एक्सपेरिमेंट की.. आप अपने शरीर के साथ ही प्रयोग करते है.. खुद को शिथिल छोड़ कर सांसो पर ध्यान केंद्रित करते है। यदि आप इस क्रिया को सफल हुए तो आपका प्रयोग सफल हुआ। यादि आप नहीं होते तो गुरु आपको नया तारीका बतायें कि कैसे आप मन को शांत कर सकते है। अर्थात विज्ञान की तरह की जब तक आप सफल नहीं होते तब तक आपका मन शांत नहीं होगा। बुद्ध के अनुसार जो ज्ञानी है वो किसी एक मन का गुलाम कभी नहीं होगा.. उसकी नजरो में कोई शक्ति, कोई अवस्था, कोई वस्तु सर्वोच्च नहीं होगी.. वो किसी मन का अनुयायी नहीं होता.. जिस मत पर आपका भरोसा है.. ये हो सकता है कि समय के साथ आपको दूसरा सत्य पता चलें.. तो आप अपने मत को बदल लें…. यहीं गूढ़ रहस्य है जो बौद्ध धर्म को मन का विज्ञान कहा गया है।

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