Chikkamagaluru में टूटी 50 साल पुरानी जातिगत भेदभाव की दीवार, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दलितों ने अंजनेय स्वामी मंदिर में किया प्रवेश

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Chikkamagaluru news: हाल ही में कर्नाटक के चिक्कमगलुरु ज़िले से एक ख़बर आई है, जहाँ एक गाँव में भेदभाव की बेड़ियाँ तोड़ते हुए दलितों को कई सालों बाद मंदिर में प्रवेश करने दिया गया; इस दौरान किसी भी तरह की हिंसा न हो, इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

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50 सालों के बाद दलितों ने मंदिर में किया प्रवेश

कहने को देश और उसके लोग तकनीकी रूप से आज़ाद हैं, फिर भी वे ‘मनुवादी’ सोच की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं; देश में आज भी दलितों के साथ भेदभाव जारी है और उन्हें मंदिरों में प्रवेश करने से रोका जाता है। लेकिन कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले से एक मामला सामने आया है, जहां जातिगत भेदभाव की दीवार को तोड़ते हुए आखिरकार 50 सालो के बाद दलितो को मंदिर में प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दी गई है।

दिल को सूकून पहुंचाने वाली ये खबर चिक्कमगलुरु जिले (Chikkamagaluru district) के कादुर तालुक के निदाघट्टा गांव (Nidaghatta village) की है, जहां जिला प्रशासन की मौजूदगी में दलित समुदाय के सैकड़ों लोगों ने अंजनेय स्वामी के मंदिर में प्रवेश किया औऱ वहां पूजा अर्चना की, हांलांकि किसी अनहोनी की आशंका से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात थे, लेकिन सवर्ण मंदिर होते हुए भी वहां रहने वाले सवर्णों ने इस शुरुआत का स्वागत किया।

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5 दशक से सामाजिक बराबरी के लिए लड़ाई लड़ रहे लोग

बता दें कि इस गावं में दलित समाज पिछले 5 दशक से सामाजिक बराबरी के लिए लड़ाई लड़ रहे है, वो मंदिर में प्रवेश चाहते थे लेकिन गांव वाले इसके विरोध में थे, मगर जब खुद जिला प्रशासन दलित समुदाय की मदद के लिए सामने आया तो सवर्णो ने उन्हें निर्विरोध मंदिर में प्रवेश करने दिया। हालांकि चिंता की बात ये भी है कि जब पुलिस प्रशासन वहां से हटती है उसके बाद गांव के सवर्णों का क्या रवैया होता है। क्या तब भी इसे स्वाकीर कर लेंगे या कोई नया तमाशा होगा..

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