Shimla news: हाल ही में हिमाचल प्रदेश के शिमला से हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ, एक दलित युवक का गलत चालान काटा गया; जिसके बाद नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (अनुसूचित जाति आयोग) द्वारा घटना का संज्ञान लेने के बाद मामला बढ़ गया, जिससे धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
और पढ़े: जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव? जानिए Article 15 कैसे करता है आपकी रक्षा!
दलित युवक का कटा झूठा चालान
अक्सर ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें दलितों को बिना किसी वजह के झूठे मामलों में फंसाया जाता है और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है। ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला से है, जहां एक दलित युवक पर फर्जी तरीके से चालान काटने के मामले में राष्ट्रीय अनूसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद पुलिस की नाकामी का भंडाफोड़ हो गया है। आयोग के इस मामले में पड़ने के बाद चालान को लेकर एक उच्च स्तरिय जांच की गई, जिसमें दलित युवक पर किया गया चालान पूरी तरह से फर्जी, मनगढ़ंत औऱ मनमाना साबित हुआ। जिसके बाद DIG (ट्रैफ़िक, टूरिस्ट और रेलवे) संजीव कुमार गांधी की ओर से की गई एक उच्च-स्तरीय विभागीय जांच में चालान को पूरी तरह से फ़र्ज़ी पाया गया।
और पढ़े: धारा 370 से लेकर राज्यपाल शासन तक, जानिए राष्ट्रपति शासन के पीछे का पूरा सच – Article 356
पुलिस भूमिका पर उठे सवाल
जिसके बाद चालान वापिस लेने के निर्देश दिये गए साथ ही पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे है। दरअसल, ये घटना 14 जून 2025 का है, जब कंडाघाट के कलहोग गांव के रहने वाले पीड़ित मोहित कुमार पर सलोन में गाड़ी चलाते समय मोबाईल का इस्तेमाल करने औऱ मोटर वाहन अधिनियन धारा 184 का उलंघन करने के मामले में चालान काटा था।
NCSC ने मांगी जाँच की रिपोर्ट
लेकिन जब इस मामले में जांच की गई तो न पीड़ित के चालान के आसपास के समय में फोन पर बात करने के रिकॉर्ड मिले और न ही स्पीड लिमिट ज्यादा होने के सबूत। जिसके बाद इस मामले के निरक्षण अधिकारी इंस्पेक्टर मुकुल शर्मा को निलंबित कर दिया गया है..पीड़ित के मुताबिक उसके जातिगत तौर पर और मानसिक तौर भी प्रताड़ित किया गया। वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के दखल के बाद, पुलिस के बर्ताव और इस मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी गई है। ऐसे में देखना ये होगा कि पुलिस की ये लापरवाही थी या सोची समझी साजिश।



