Top 5 Dalit news: क्या कोई धर्म ग्रन्थ ऐसा है जिसमें ये लिखा हो कि दलित, पिछड़े अछूत इंसान के बराबर भी नहीं समझे जाने चाहिए। क्योंकि अगर इंसान समझे जाते तो जिंदा तो छोड़िए मरने के बाद भी दलितों का अपमान नहीं होता।तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों से जुड़ी घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जिसे जानने के बाद आपको ये अहसास होगा कि मनुवादी आतंकियों के लिए आखिर दलित कहा exist करते है।
यूपी विधानसभा चुनाव की रेस में लोजपा रामविलास की एंट्री
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर है। चुनाव प्रचार में जहां वादों और इरादों का दौर होना चाहिए वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस करती को जमकर निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। लोजपा रामविलास ने 2027 चुनावों में यूपी में अपनी तैयारी शुरू कर दी है, जिसे लेकर दलित चौपाल अभियान का आयोजन किया गया। चौपाल को सम्बोधित करने पहुंचे लोजपा नेताओं ने राम मंदिर का मुद्दा भी खूब भुनाया, उन्होंने पूछा कि राम मंदिर की नींव एक दलित नेता कामेश्वर के हाथों रखी गई थी, इसलिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव निमंत्रण देने के बाद भी नहीं आए थे। सच तो ये है कि ये दोनों ही नेता सामंतवादी सोच के है, इन्हें चंदे की फिक्र है, बंदे की नहीं। आज तक राम मंदिर के निर्माण में एक योगदान नहीं दिया लेकिन अब ये लोग चंदा चोरी का मुद्दा उठा कर खुद को बड़े हितैषी बता रहे है। विपक्ष एक गन्दी राजनीति कर रही है और इस चौपाल का एक ही मकसद है कि दलितों को जागरूक करें ताकि ये पार्टी उन्हें बेवकूफ न बना सके।
दतिया उपचुनाव में आसपा प्रत्याशी की हार
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के दतिया से है, जहां अभी हाल ही में हुए उपचुनावों में आजाद समाज पार्टी की तरफ से प्रत्याशी रहे दामोदर यादव को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि ये बेहद हैरान करने वाली बात है कि इतना बड़ा जब समर्थन मिलने के बाद भी उनकी हार हुई। इससे कहीं न कहीं आजाद की बात सही लगती है कि evm हटना चाहिए। जैसा कि आजाद ने पहले ही वादा किया कि वो evm हटाने की दिशा में काम करेंगे। वहीं आसपा की हार के बाद चंद्र शेखर आजाद की कथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर चुटकी ली है। घावरी ने कहा कि जो दतिया का एक चुनाव नहीं जीता सका वो यूपी क्या जिताएगा। घावरी ने आसपा में शामिल होने वाले सभी कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी है कि अब भी वक्त है आजाद से दूर हो जाओ, वरना कहीं के नहीं रहोगे। बता दे उपचुनाव के लिए खुद आजाद दामोदर यादव को सपोर्ट करने पहुंचे थे, मगर उनका आना भी काम नहीं आया। दतिया सीट से कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की है। इस हार से ये तो तय हो गया कि आसपा के लिए अभी मध्य प्रदेश की राहें आसान नहीं है।
कर्नाटक के यादगीर मे दलित परिवार को घेर कर पीटा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के यादगीर जिले से है, जहां एक दलित व्य़क्ति ने बीमार होने के कारण कब्रिस्तान में गड्ढा खोदने से क्या मना किया.. जातिवादियों को ये हिम्मत इतनी नागावार गुजरी कि उन लोगो ने उसे घेर कर बुरी तरह से पीटा और जान से मारने की धमकी दी। ये घटना यादगिर जिले के शोरापुर पुलिस थाना क्षेत्र की है, पीड़ित देवप्पा शिवप्पा तलवार ने शोरापुर पुलिस थाने में तहरीर दी कि 25 जुलाई को गांव के ही दूसरे समुदाय के घर किसी बुजुर्ग महिला का निधन हो गया, जहां देवप्पा और उसके एक रिश्तेदार को कब्र के लिए गड्ढा खोदने के लिए बुलाया गया था मगर देवप्पा उस वक्त बहुत बीमार था इसलिए उसने आने से इंकार कर दिया.. लेकिन 1 अगस्त को जब वो स्थानीय बोरवेल में पानी भरने गया था, तब आरोपियों ने उसे घेर लिया.. वहां काफी कहा सुनी हुई औऱ देवप्पा वहां से निकल गया लेकिन उसू दिन दोपहर में जब वो अपनी पत्नी ललिता और रिश्तेदार भीमव्वा, सिद्धम्मा और गंगम्मा के साथ खेत देखने जा रहा था तो उन लोगो को फिर से घेरा गया, उनकी लाठियों से पिटाई की गई, जातिसूचक गालियां दी गई .. साथ ही धमकी दी कि आईंदा अगर गड्ढा खोदने ले इंकार किया तो जान से मार देंगे। इस मामले में 17 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है.. हालांकि अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
बॉम्बे हाइकोर्ट ने दलित मुसलमान की याचिका खारिज की
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के मुम्बई से है, जहां अब तक केवल दलित ईसाई खुद को अनुसूचित जाति में शामिल करने की लड़ाई में हार रहे थे लेकिन अब बॉम्बे हाइकोर्ट ने एस मुसलमान युवक की भी याचिका को खारिज कर दिया है। जिसे कन्वर्जन के बाद भी खुद को अनुसूचित जाति के लाभ के लिए योग्य बताया था। मगर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वो एससी के फैसले से बाध्य है। ये याचिका 1999 को ही डाली गई थी, जिसमें अनुसूचित जाति की कैटेगरी में गिनी जाने वाली बहना जाति के एक युवक ने धर्म परिवर्तन करने के बाद भी एससी कैटेगरी के लाभो को पाने की कोशिश की थी लेकिन 24 नवंबर, 1998 को नागपुर की जाति प्रमाण पत्र जांच समिति याचिकाकर्ता की इस अपील रो खारिज कर दिया। उन्होंने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 और सर्वोच्च न्यायालय के 1985 का हवाला देते हुए कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगो को ही एससी वर्ग का दर्जा मिलेगा। जिसके बाद बॉम्बे हाइकोर्ट ने आखिरकार 27 सालो तक कोर्ट में लंबित रहने वाली इस याचिका पर सुनवाई करते हुए खारिज कर दिया है। आपको बता दे कि काफी लंबे समय से दलित ईसाइ भी खुद को अनूसूचित जाति में डाले जाने की लड़ाई लड़ रहे है.. लेकिन इसी साल 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सीधे शब्दों में उनकी याचिका भी खारिज कर दी थी। आपको क्या लगता है क्या दलित ईसाई और दलित मुसलमानों को एकजुट होकर फिर से याचिका देनी चाहिए।
आंध्रप्रदेश में विधायक ने किया दलित परिवार पर हमला
5, दलितों से जुड़ी अगली खबर आंध्रप्रदेश के चिप्पागिरी से है, जहां राजनैतिक पावर का दम दिखाने के नाम पर वाईएसआरसीपी अलूर से विधायक बी. विरुपाक्षी और उसके बेटे ने फोन पर हुई बहस को लेकर एक दलित परिवार पर हमला कर दिया… ये घटना चिप्पागिरी मंडल के चिप्पागिरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संगला और नेमकल्लू के बीच का है। पीड़ित अनुसूचित जाति से आने वाले नागराजू ने पुलिस को तहरीर दी कि वो नेमाकल्लू का एक टीडीपी कार्यकर्ता है, कुछ दिनो पहले किसी बात को लेकर संगला के एक वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता से उसकी फोन पर बहस हो गई थी, जिसके बात तब औऱ बढ़ गई.. जब विधायक श्री विरुपाक्षा और उसके समर्थक पीड़ित के घर मे घुस गए, औऱ उस पर हमला कर दिया। बीच बचाव करने आई उसकी पत्नी के साथ बदसलूकी की गई.. उसके कपड़े फाड़े गए.. इस घटना के बाद से दोनो गांवों में तनाव का माहौल है, वहीं पुलिस ने विधासक औऱ उसके बेटे को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरु कर दी है, वहीं इस मामले में 14 और हमलावरो के नाम सामने आये है, जिन्हें भी गिऱफ्तार कर लिया गया। मगर इस गिरफ्तारी के बाद से वाईएसआरसीपी नेताओं ने विधायक की रिहाई के लिए चिप्पागिरी पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरु कर दिया है। वहीं पुलिस ने किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अपनी तैयारी पूरी कर दी है,दोनो गांवो में भारी बल तैनात किया गया है। अब देखना ये होगा कि क्या केवल उंची जाति का होने के कारण कानून के शिकंजे से आसानी से बचा जा सकता है।



