UN CERD: हाल ही में मानव अधिकारों और देश में रह अनुसूचित जनजातियो को लेकर रिपोर्ट सामने आई है, जहाँ यूनाइटेड नेशंस कमिटी ऑन द एलिमिनेशन ऑफ रेशियल डिस्क्रिमिनेशन (UN CERD) ने रोहिंग्या शरणार्थियों, माइनॉरिटीज़ और मार्जिनलाइज़्ड कम्युनिटीज़ के अधिकारों पर गंभीर चिंता जताई है और इस बारे में अपनी रिपोर्ट और गाइडलाइंस जारी की हैं।
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CERD यूनाइटेड नेशन में भारत को घेरा
जिनीवा में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भारत में दलितों, आदिवासियों, रोहिंग्या पर होने वाले अत्याचारों को लेकर नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) ने भारत पर हमला बोला है। CERD ने समिट में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इंडिया में जातिगत भेदभाव के कारण लोग अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लोगो को तो प्रताड़ित करते ही है साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसिया भी रोहिंग्या, बंगाली भाषी मुसलमानों और प्रवासियों को निशाना बनाती है।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र (UN) की ‘नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति’ यानी CERD ने भारत को लेकर अपनी एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें देश में जनजातीय लोगों, अनुसूचित जातियों और रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़ी स्थितियों पर गंभीर चिंता जताई गई है। 1969 में लागू हुए इस UN कन्वेंशन के तहत भारत साल 2007 के बाद पहली बार इस महीने समिति के सामने समीक्षा के लिए पेश हुआ। जहाँ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। 18 स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन चिंताओं को रेखांकित किया है।
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अधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्ट…
समिति के अनुसार, कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जातीय-धार्मिक समूहों, मूल निवासियों, अनुसूचित जाति (दलित), अनुसूचित जनजाति और गैर-नागरिकों के खिलाफ बल के अत्यधिक प्रयोग और यातना की खबरें चिंताजनक हैं। निशाना बनाए जाने की चिंता: रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहिंग्या, बंगाली भाषी मुसलमानों और प्रवासियों के खिलाफ नस्लीय आधार पर चेकिंग, मनमानी गिरफ्तारी और सामूहिक रूप से देश से निकालने जैसी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
कूटनीतिक और नैतिक महत्व
तीसरा हेट स्पीच और क्राइम: UN समिति ने भारत सरकार से अपील की है कि वह बंगाली बोलने वाले मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत से प्रेरित भाषणों और अपराधों से निपटने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाए। गौरतलब है कि CERD की ये राय और सिफारिशें कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती हैं, लेकिन वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर इनका काफी कूटनीतिक और नैतिक महत्व माना जाता है। इतना ही नहीं जिसके बाद CERD ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा कि देश में दलितों पिछड़ों, आदिवादियों, और प्रवासियों के खिलाफ जो नफरती माहौल पैदा किया जा रहा है, उसे सरकार को जल्द से जल्द निपटने का कोई समाधान निकालना चाहिए। हालांकि अभी भारत की तरफ से इस मुद्दे पर जवाब देना बाकी है।



