Ambedkar ने पहले ही कर दिया था आगाह! राजनीति में व्यक्ति पूजा तानाशाही का रास्ता है

Dr BR Ambedkar, Chirner Satyagraha
Source: Google

Ambedkar: बाबा साहब कहते थे कि राजनीति में किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि जनाधार की मर्जी चलनी चाहिए.. धर्म में किसी एक देवी देवती की भक्ति आपको मुक्ति का मार्ग दिखा सकती है, लेकिन राजनिति में किसी व्यक्ति की भक्ति आपको एक तानाशाह शासन की तरफ धकेल देती है। 1975 की इमरजेंसी तो याद ही होगी आपको.. नई पीढ़ी ने भी इस त्रासदी के बारे में पढ़ा ही होगा.. जब केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रातो रात इस्तीफा देने के बजाय पूरे देश में इमरजेंसी घोषित कर दिया था। मीडिया से लेकर दूसरे राजनैतिक कार्यकर्ताओं की, सबकी आजादी को छीन लिया गया.. ये इंदिरा गांधी की तानाशाही की शुरुआत थी।

करीब 21 महीनो तक देश एक ऐसी ताकत का गुलाम बन गया था.. जो कठपुतली की तरह भारत के तीनों नहीं बल्कि चारों स्तंभों.. विधायिका, कारयपालिका, न्यायपालिका औऱ मीडिया, सबको अपने इशारों पर नचा रही थी.. लेकिन क्या आपको ये पता है कि बाबा साहब ने इमजेंसी से करीब 26 साल पहले ही इस बात की चेतावनी दी थी कि किसी के भी हाथों में एकतरफ राजनैतिक ताकत नहीं होनी चाहिए।

क्या थी बाबा साहब की चेतावनी

दरअसल 26 नवंबर 1949 को संविधान का अंतिम औऱ फाइनल मसौदा संसद में पेश करने से पहले बाबा साहब ने 25 नवंबर को इसे संसद के सभी सदनो के सामने इसे पेश किया था.. इस दौरान बाबा साहब ने करीब 55 मिनट का एक लंबा भाषण दिया..जिसमें उन्होंने कई मुद्दो पर बात की, और तीन बड़ी चेतावनिया देश की जनता को दी थी.. जिसमें राजनीति में किसी एक व्यक्ति की भक्ति को लेकर भी बड़ी बात कहीं.. बाबा साहब के इस भाषण को द ग्रामर ऑफ अनार्की कहा जाता है। बाबा साहब ने इस भाषण में कहा था कि हर धर्म के अपनी विशेषतायें औऱ मान्यतायें है।

व्यक्ति पूजा तानाशाही का रास्ता

सबका भक्ति करने का तरीका अलग अलग हो सकता है, और सभी मुक्ति ही चाहते है.. इसलिए धर्म में भक्ति करना मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है लेकिन अगर आप राजनीति में किसी एक व्यक्ति की भक्ति या पूजा करते है तो ये आपको पतन की तरफ ले जायेगा, जो गहरे तानाशाह का कारण बनेगा। बाबा साहब का ये कथन साफ तौर पर चेतावनी थी कि अगर आप किसी भी नेता को देवता बना कर पूजने लगते है, उसके किये गए कामों पर उसके लिए गए फैसलो पर सवाल नहीं उठाते है तो वो धीरे धीरे निंकुश बनता जायेगा।

वो स्वयं को सबसे ऊपर समझने लगेगा.. और किसी के प्रति जवाबदेही रखना भी जरूरी नहीं समझेगा..बाबा साहब ने आगे कहा था कि आप एक आजाद और लोकतांत्रित देश के नागरिक है, इसलिए सवाल करने की, जवाबदेही रखने की ताकत का इस्तेमाल करना आपका मौलिक अधिकार है, इस अधिकार को केवल एक व्यक्ति की भक्ति के लिए ताक पर मत रखिये। आप सवाल करते है तभी तो आपको पता होता है कि आप मृत समान नहीं है.. आप जीवित है।

मौलिक अधिकार का हनन

याद रखिये किसी भी व्यक्ति विशेष की लोकप्रियता जनता पर इस कदर हावी नहीं होनी चाहिए कि भारत के स्तंभो से भी खुद को बड़ा समझने लगे.. तब ये खतरे की घंडी है कि देश का लोकतंत्र भारी खतरे में है। किसी व्यक्ति विशेष की पूजा करने से कहीं न कहीं ये जानते हुए भी सामने वाला गलत है, आप उससे सवाल नही करते या करना ही नहीं चाहते है.. यहीं आप अपने मौलिक अधिकार का हनन होने देते है।

लोकतांत्रिक अधिकार का हनन

बाबा साहब न केवल बहुत बड़े ज्ञानी थे बल्कि उन्हें भविष्य में होने वाली गतिविधियों का अंजादा कहीं न कहीं हो गया था। जिसे लेकर ही बाबा साहब ने ये चेतावनी दी थी। हालांकि विडंबना ये है कि बाबा साहब की इस चेतावनी के बाद भी देश की जनता अंधभक्ति में डूब चुकी है। उन्हें सही गलत नहीं धर्म-मजहब औऱ जाति के बंधनो में बांध दिया गया है। जिससे लोकतांत्रिक अधिकार का हनन हो रहा है.. लेकिन इस तरह के ब्रेन वॉश किया जा रहा है कि लोग चाह कर भी सवाल नहीं उठाते.. इमजेंसी में कांग्रेस ने तानाशाही लागू करने की कोशिश की.. नतीजा ये हुआ था कि इंदिरा गांधी की सरकार गिर गई थी,, वहीं अब बीजेपी भी कर रही है।

केंद्र की कोई जवाबदेही न होने के कारण देश का माहौल बदल रहा है.. लोकतंत्र को नही व्यक्ति विशेष के फैन है.. बहुत कुछ दमनकारी हो रहा है.. सरकार अपनी चला रही है, सवाल पूछने के बाद भी जवाब नहीं दिया जाता है क्योंकि उन्हें भी पता है कि जनता व्यक्ति की पूजा कर रही है, किसी एक की भक्ति कर रही है… जो देश के माहौल को बिगाड़ने के लिए काफी है। ऐसे में बाबा साहब की ये चेतावनी की रामबाण तरीका है अंधभक्ति से बाहर आने का.. ताकि लोगो को अहसास हो सकें कि देश कहीं फिर से तानाशाही की तरफ तो नहीं जा रहा है। खुद विचार करके बतायें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *