Agasti Behera: राजनीति हो या सामाजिक धारा, दलितों और पिछड़ो को कहीं भी अपनी जगह बनाने और समाज में सम्मान पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। बाबा साहब जानते थे कि अगर दलितों को वाकई में ताकतवर बनाना है, उन्हें जातिगत उत्पीड़न से बचाना है तो उन्हें राजनैतिक ताकत देना जरूरी है। उन्होंने राजनीति में भी आरक्षण मुहैया कराया ताकि वंचित समाज के लोग बिना किसी भेदभाव के राजनीति में आ सकें.. लेकिन राजनीति में प्रवेश करने के बाद उन्हें उस ताकत का इस्तेमाल कैसे करना है, ये वो खुद तय करेंगे.. उन्हें संगठित रहना है या नहीं.. उन्हें अपने समाज को सुरक्षित करना है या नहीं, उन्हें जागरूक करना है या नहीं.. ये उन पर ही निर्भर करता है। एक ऐसे ही नेता की भूमिका निभाई उड़ीसा के छेंदीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से 2024 में एक बड़े बहुमत से जीत पाने वाले दलित समाज के नेता अगस्ती बेहरा। दलित समाज की छोटी छोटी समस्याओं को समझना औऱ उनके निपटान को लिए खुद खड़े रहना सबके बस की बात नहीं है लेकिन अगस्ती बेहरा ने दिखाया कि जहां चाह है वहां राह भी बन जाती है।
अगस्ती बेहरा कौन हैं?
8 जुलाई 1976 को उड़ीसा के अनुगुल जिले के छेंदीपाड़ा में धनेश्वर बेहरा के घर जन्मे अगस्ती बेहरा उन नेताओं में से है, जो अपनी जमीन से काफी गहराई से जुड़े है। चुंकि छेंदीपाड़ा एक ग्रामीण क्षेत्र है और यहां ज्याद लोग या तो खेती या फिर खनन के काम से जुड़े है, तो उनके पिता भी यहीं काम किया करते थे। हालांकि एक किसान की आय कितनी होती है, हम वाकिफ है जिससे अगस्ती को बचपन में आर्थिक समस्याओं से भी जूझना पड़ा था। वो बचपन से ही अपने क्षेत्र में जातिगत भेदभाव को देखते आ रहे थे। उन्होंने करीब से महसूस किया था कि कैसे दलितो का गांव होने के कारण उनके गांव को सिचांई, पानी और रोजगार जैसी बेसिक सुविधायें भी नहीं दी जाती है। जिसने उन्हें अपने समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।
अगस्ती बेहरा के करियर की शुरुआत
वो बाबा साहब के बड़े फैन है, इसलिए उन्होंने भी शिक्षा को हथियार बनाने का फैसला किया और साल 2002 में उड़ीसा की संबलपुर यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया.. लेकिन जो लड़ाई उन्हें लड़नी थी उसके लिए ये काफी नहीं था इसलिए 2006 में उन्होंने संबलपुर के एल आर लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री हासिल की। अपने कॉलेज के दौरान ही उन्होंने कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI के लिए काम करना शुरु कर दिया.. इसी के साथ वो सोशल वर्क भी किया करते थे। उन्होंने पार्टी के लिए छेंदीपाड़ा में जमीन तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई.. वो लगातार 15 सालो तक कांग्रेस के लिए काम करते थे.. छेंदीपाड़ा की जमीनी हकीकत से वाकिफ अगस्ती बेहरा ने अपनी कानूनी शिक्षा के दम पर क्षेत्र की कानूनी मूल समस्याओं का निपटारा करने में भी बेहद अहम भूमिका निभाई थी। उड़ीसा में अपने काम से वो राष्ट्रीय कांग्रेस की नजरो में आ गए और जल्द ही साल 2009 में उन्हें कांग्रेस की तरफ से छेंदीपाड़ा की निर्वाचित सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला.. लेकिन वो हार गए.. जिसके बाद कांग्रेस ने फिर से उन पर भरोसा जताया औऱ 2014 में बीजेपी लहर के बाद भी बेहरा को फिर से कांग्रेस ने मौका दिया.. लेकिन अब बार बेहरा दूसरे स्थान पर रह गए।
अगस्ती बेहरा ने कांग्रेस् छोड़ बीजेपी ज्वाइन की
2014 में बीजेपी की लहर औऱ उनकी नीतिया इतनी प्रभावशाली थी कि कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया.. और 2018 आते तक पीएम मोदी की मजबूत नीतियों औऱ उड़िसा के प्रमुख नेता धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रभावी ढंग से फॉलो किये जा रहे आदर्शों ने अगस्ती बेहरा को बेहद प्रभावित किया और उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी का कमल थाम लिया। कांग्रेस की तरह बीजेपी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और 2019 में फिर से उन्हें छेंदीपाड़ा से चुनाव लड़ने का मौका मिला.. लेकिन वो इस बार भी दूसरे स्थान पर रहे.. मगर उन्होंने हार नहीं मानी.. वो तब भी विपक्ष में रह उन मुददों पर सवाल उठाते थे जो दलितों के उत्थान के लिए होते थे.. फिर आया 2024.. बीजेपी औऱ धर्मेंद्र प्रधान ने अगस्ती बेहरा को फिर से मौका दिया.. और इस बार उन्होंने बड़ी जीत हासिल की… इस जीत ने उनकी लड़ाई को और मजबूती दी।
उन्होंने कई ऐसे गंभीर मुद्दों पर काम किया.. जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है.. जिसमें सबसे पहले उन्होंने छेंदीपाड़ा में पीने और सिचाई का पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं औऱ बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल और टीचर की मांग रखा। इससे वंचित समाज समाज की मुख्यधारा से जुड़ने लगा। वहीं उद्योगो और खनन के कारण भारी संख्या में विस्थापित हुए लोगो को फिर से पुनर्वास कराने की मांग तेज की। उन्होंने वहां की कई बड़ी कंपनियां जो इंडस्ट्री लगा कर बैठे है, खनन करवा रहे है। उनसे बात करके गरीब और विस्थापित परिवारो को उचित मुआवजा, रहने के लिए जमीन और बेरोजगार युवाओ को रोजगाल दिलाया। सरकार द्वारा चलाई जा रही सबी योजनाओं जो दलितो और वंचितो के लिए होती है.. उनकी जानकारी छेंदीपाड़ा के दलित और पिछड़े वर्ग तक पहुंचे, उसके लिए अगस्ती बेहरा जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने का काम करते है। वो तमाम कार्यकर्मों में हिस्सा लेते है ताकि जातिगत भेदभाव को दूर कर दलितों को समाजिक बराबरी दिलाई जा सकें। अग्सती बेहरा एक ऐसा नेता है जो जमीन से उठ कर इतने उंचे पहुंचे है लेकिन बावजूद इसके वो कभी भी अपनी मिट्टी से दूर नहीं हुए है।



