Top 5 Dalit news: जातिगत भेदभाव और समाजिक असमानता को खत्म करने के लिए कोई भी लड़ाई तब तक अधूरी है, जब तो वो लोगो की मानसिकता को न बदले.. केवल किसी कहानी को सुनने औऱ सुनाने से अगर भेदभाव खत्म होता, तो समाज सुधारको को इतनी लंबी लड़ाई न लड़नी पड़ती..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे… जो सवाल उठाती है कि कितने ही लोग है तो वाकई में किताबी बातों पर चलने के बजाय सहीं मायने में बाबा साहब जैसे महापुरुषों के ज्ञान को जी रहे है.. क्यों उनका ज्ञान तो केवल नारों तक सीमित है।
उड़ीसा सरकार का एससी एसटी छात्रो को बड़ी सौगात
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उड़ीसा से है, जहां एससी एसटी जाति से आने वाले छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए प्रेरणा मिले और उन्हें दाखिला लेने में परेशानियों को सामना न करना पड़े, उसके लिए उड़ीसा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल बढ़ते भेदभाव और आरक्षित सीटो के खाली रहने की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सभी सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एससी एसटी वर्ग के छात्रों के लिए 6 महीने बाद तक एडमिशन, ट्यूशन या कोई भी फीस को जमा करने से राहत दे दी है। वहीं जब छात्रों को स्कॉलरशिप मिलेगी तो वो अपनी जरूरी फीस का भुगतान कर सकते है। सरकार ने ये फैसला उन आकड़ो को देखकर लिया है जिसमें दलित पिछड़े छात्र कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम तो पास कर लेते है लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण एडमिशन फीस नहीं दे पाते, जिससे काबिल होते हुए भी उन्हें दाखिला नहीं मिल पाता है। ओड़िसा सरकार जल्द ही इस फैसले पर गाइडलाइंस जारी करेगी। हालांकि सरकार की या फैसला एससी एसटी वर्ग के छात्रो के लिए एक बेहतरीन सौगात है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनो से संमझौता कर लेते है, लेकिन अब उनके सपनो को भी उड़ान मिलेगी। वैसे उड़ीसा सरकार की ये नीति अन्य राज्यों में भी लागू होनी चाहिए।
एससीएसटी को लेकर इलाहाबाद हाइकोर्ट का बड़ा फैसला
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से है, जहां एक दूसरी जाति में शादी करने के बाद भी जातिगत भेदभाव का शिकार हुई महिला का केस रद्द करने की अपील को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि किसी दूसरी जाति या धर्म में शादी कर लेने से किसी की जाति नहीं बदल जाती। दरअसल साल 2022 में अलीगढ़ के विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अधिनियम के आधार पर एक पक्ष के खिलाफ समन जारी किया गया था, क्योंकि शिकायतकर्ता ने मारपीट करने और उसके परिवार पर जानलेना हमला करने का आरोप लगाया था। साथ ही जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगा कर एससीएसटी एक्ट के साथ साथ कई धाराओं में मामला दर्ज कराया था। लेकिन उल्टा आरोपी पक्ष ने क्रोस केस कर दिया किया कि शिकायतकर्ता ने जाट समुदाय के एक व्यक्ति से शादी कर ली है औऱ उस आधार पर अब वो एससी एसटी एक्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकती है। लेकिन कोर्ट ने इस अपील को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर की पीड़िता ने दूसरी जाति में शादी कर ली है, उसे जातिगत रूप से प्रताड़ित करने का अधिकार किसी को नहीं है। क्योंकि शादी करने से उसकी जाति में कोई बदलाव नहीं आयेगा। कोर्ट ने अपने फैसले से साफ कर दिया है कि अगर कोई शादी या धर्म बदलने के नाम पर जातिगत अपमान करता है तो वो पूरी तरह से गैरकानूनी ही है.. हालांकि इलाहाबाद हाइकोर्ट का ये फैसले सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के लिए एक चुनौती जैसा लग रहा है जिसमें दलितों के ईसाई और मुसलमान बनने के बाद एससी एसटी के सारे हक छीन लिये जाते है। क्या आपको लगता है कि कोर्ट के इस फैसले के बाद दलित इसाईयों और मुसलमानो को अपने हक के लिए लड़ने का एक और मौका मिल गया है।
मदुरै में फिर से दलित छात्रा ने की खुदकुशी
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै जिले है, जहां दलित छात्राओं के साथ न तो भेदभाव रूक रहा है औन न ही जातिगत भेदभाव से त्रस्त होने वाले बच्चो की आत्महत्या का सिलसिला.. अभी हाल ही में स्कूल के प्रींसीपल के व्यावहार से दसवी की 16साल की छात्रा निसंथिनी ने 25 अगस्त को आत्महत्या कर ली.. तो वहीं अब एक और खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया। 15 साल की जीविका जो कि दलित परैयार समुदाय से संबंध रखती थी, उसने भी जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। जिविका मदुरै जिले के वाडीपट्टी तालुक के पेरिया इलंथैकुलम के अंबेडकर कॉलोनी की रहने वाली है.. जीविका 11वी की छात्रा थी.. उसकी मां आनंदा लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि उसके स्कूल में अंग्रेजी शिक्षिका, अरुल निर्मला लगातार उसे जातिगत रूप से प्रताड़ित कर रही थी.. लेकिन तब परिवार को ये अंदाजा नहीं था कि वो इतनी ज्यादा तकलीफ में थी कि उसने खुदकुशी जैसे कदम उठा लिया। जीविका के पास से एक सुसाइट नोट मिला है.. जिसमें उसने टीचर की करतूत के बारे में बताया है। इस मामले में कई दलित संगठनो ने मिलकर पीड़ित परिवार के लिए न्याय की आवाज उठाई है.. पुलिस इस मामले की सख्ती से जांच कर रही है हालांकि टीचर को अभी तक गिरफ्तार नही किया गया है। सवाल ये है कि आखिर कब तक जाति के नाम पर होनहार छात्रों को इस तरह से प्रताड़ित होना पड़ेगा।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर सपा मुखिया की तीखी प्रक्रिया
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के लखनऊ से है, जहां एक तरफ कांग्रेस सांसद राहुल गांदी पर शुद्धिकरणा मामले में की गई टिप्पणी को लेकर वाल्मीकी समाज के ही अमित कुमार ने एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवा दिया.. तो वहीं अब इस मामले को लेकर सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शुद्धिकरण से कर राहुल गांधी के ऊपर होने वाली एफआईआर के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ये सब बीजेरी के इशारे पर हो रहा है, क्योंकि राहुल गाँधी ने दलितो के लिए आवाज उठाई है और बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है। अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि जो भी उत्तराखंड में हुआ है वो बीजेपी के इशारे पर हुआ है, लेकिन सच तो ये है कि ऐसा करके बीजेपी ने अपनी हार के ‘पराजय-पत्र’ पर साइन किया है। ये केवल एक नेता का अपमान नहीं है.. बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान है, और दलित समाज उन्हें बख्शेगा नहीं। वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में अपना रोष जताया और विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज कराने वाले अमित कुमार ने कहा कि साफ सफाई और शुद्धिकरण के दौरान वहां दलित समाज के अनगिनत लोग थे.. वो केवल रामलीला मैदान को साफ कर रहे थे, औऱ पूजा करके शुद्ध किया गया था क्योंकि रैली के बाद वहां काफी गंदगी थी औऱ कुछ अपवित्र चीजे भी थी, लेकिन राहुल गांधी इस मामले को जाति विरोधी साबित करने की कोशिश कर रहे है। जो गलत है। हैरानी की बात है कि पिछले 3 हफ्तो से जब राहुल गांधी विरोध कर रहे थे तब किसी ने आवाज नहीं उठाई लेकिन अचानक कैसे कोई वाल्मिकी समाज से उठकर आ गया.. ये साजिश किस दिशा में जा रहा है.. वो समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है।
भीम आर्मी चीफ की बीजेपी को खुली चुनौता
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने आगामी विधानसभा चुनावो को लेकर लगातार यूपी के जिलो में रैलियां करनी शुरु कर दी है, इसी कड़ी में वो मऊ जिले के मधुबन पहुंचे, जहां उन्होंने गांधी मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी सरकार की आरक्षण खत्म करने की चाल को लेकर खुली चुनौती दी है। आजाद ने आरक्षण को खत्म करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ते हुए कहा कि अगर आप में हिम्मत है तो सामने से मुकबला करों, अपने लोगो को भेज कर हंगामा करने और आंदोलन करने की कोई जरूरत नहीं है। आजाद ने कहा कि हिम्मत है तो सामने आकर आरक्षण का विरोध करो, धज्जियां न उड़ा दीं तो कहना” आपको बता दें कि आजाद ने पहले भी खुली चेतावनी दी थी कि आरक्षण संविधान का हिस्सा है और उसे कोई अलग नही कर सकता है। अगर किसी ने कोशिश भी की तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। आजाद की चुनौती इशारा है कि कितने भा हंगामे कर लिये जाये.. लेकिन जब तक भेदभाव है तब तक आरक्षण रहेगा ही रहेगा।



