बाबा साहब के इकलौते परपोते सुजात अंबेडकर, पत्रकारिता से बदल रहे हैं वंचितों की तकदीर – Sujat Ambedkar

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Sujat Ambedkar: बाबा साहब अंबेडकर की 5 संताने हुई थी, लेकिन बिमारी और गरीबी के कारण उनकी चार संताने काफी छोटी उम्र में ही स्वर्ग सिधार गई.. वहीं उनकी पत्नी रमाबाई की भी मात्र 39 साल की उम्र में टीबी की बिमारी से मौत हो गई थी। इस दौरान बाबा साहब की केवल सबसे बड़ी संतान यशवंत राव अंबेडकर ही जीवीत बचे थे। वहीं 1948 में बाबा साहब ने सविता अंबेडकर से शादी तो की थी लेकिन उनकी कभी कोई संतान नहीं हुई, इसलिए बाबा साहब की पीढ़ी को उनके इकलौते बेटे यशवंत राव अंबेडकर ने ही आगे बढ़ाया। यशवंत राव के बेटे है प्रकाश अंबेडकर, जिनका जन्म 1954 में हुआ था, वहीं बाबा साहब की चौथी पीढ़ी और इकलौते परपोते है सुजात अंबेडकर.. जिन्होंने अपने दादा परदादा की लेगेसी को न केवल आगे बढ़ाया, बल्कि अपनी पत्रकारिता के दम से पीड़ित औऱ वंचित समाज को जागरूक कर रहे है। अपने इस लेख में हम बाबा साहब के परपोते सुजात अंबेडकर के बारे में बात करेंगे, जो बाबा साहब के नाम को और उंचा बढ़ा रहे है।

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कौन है सुजात अंबेडकर

सुजात अंबेडकर बाबा साहब के पोते प्रकाश अंबेडकर के इकलौते बेटे है, जिनका जन्म 15 जनवरी 1995 को हुआ था। उनकी मां का नाम अंजलि अंबेडकर है। वो भी अपने पिता की ही तरह नवयान बौद्ध धर्म का पालन करते है। सुजात ने पूणे के फॉग्यूसेन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया था, जिसे बाद उन्होंने 2016 से 2018 तक चैन्नई के एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता में मास्टर किया था। इसके बाद 2021 में वो लंदन यूनिवर्सिटी के रॉयल हॉलवे से एकेक्जेंस, कैम्पैंज और डेमोक्रेजी में एमएससी की डिग्री हासिल की थी। सुजात जब कॉलेज में थे तभी उन्होंने सामाजिक कार्य़क्रमों में हिस्सा लेना शुरु कर दिया था, पूणे के फॉग्यूसेन कॉलेज में पढ़ने के दौरान उन पर आरोप भी लगा था कि उन्होंने एक जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार के कार्यक्रम में अपने साथियों के साथ मिलकर देश विरोधी नारे लगाये थे।

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जिससे सभी कॉलेज में काफी विवाद भी हुआ था, वहीं सुजात के खिलाफ आरोप पत्र भी जारी हुआ था। हालांकि बार में वो निर्दोष सिद्ध हुए औऱ आरोप पत्र वापिस ले लिया गया। ये पहली बार हुआ था जब सुजात मीडिया में इतना सुर्खियो में आये थे। लेकिन उसके बाद 2018 में उनके पिता प्रकाश अंबेडकर द्वारा गठित पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी में बतौर कार्यकर्ता काम करने लगे, हालांकि वो स्वतंत्र रूप से अब भी सामाजिक कार्य और पत्रकारिका कहते है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद राष्ट्रीय दैनिक और नामी वेबसाइट में करीब 2 सालों तक स्वतंत्र पत्रकारिता की थी। इसके अलावा वो बचपन से एक अच्छे ड्रमर है और एक बैंड बनाने की इच्छा रखते है, जो अपने संगीत के जरिए ऐसे मुद्दो पर चर्चा करें जिसे अक्सर समाज में अनदेखा कर दिया जाता है, जो राजनीतिक संदेश दें।

हालांकि वो खुद कभी भी सक्रिय रूप से राजनीति का हिस्सा नहीं है, लेकिन वो अपने पिता, दादा, परदादा की लेगेसी को आगे बढ़ाने के लिए इनडायेरेक्टली वंचित बहुजन आघाड़ी का प्रचार प्रसार करते है। 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में सुजात ने पार्टी के लिए सारी सोशल मीडिया का प्रबंधन, किशोर कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ना, कार्यलय में होने वाली सभी बैठकों का प्रबंधन सुजात ही देखते थे। सुजात न केवल राजनीतिक दल के नेता है बल्कि सम्यक विद्यार्थी आंदोलन के भी नेता है। वो मराठी, हिंदी और इंग्लिश के साथ साथ कई भाषाओं को जानते है। सुजात कहते है कि वो अभी सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते है हां अगर जनता चाहेगी तो वो राजनीति में आयेंगे लेकिन तब तक वो जनता के बीच रह कर उनके लिए आवाज उठाना चाहते है, उनके लिए किये जा रहे आंदोलन का हिस्सा बन कर रहना चाहते है, वो सरकार को उसकी जिम्मेदारियां याद दिलाते रहेंगे और सवाल भी पूछते रहेंगे।

हालांकि सुजात के साथ विवाद भी जुड़ते रहते है। 27 मई 2018 को सुजात पूणे के आजाद मैदान में मात्र कुछ मिनटो का भाषण दिया था, उन्होंने दो मुद्दो पर बात की, पहला भीमा कोरेगांव हिंसा औऱ दूसरा टाटा संस्थानों में छात्रवृति का बंद होना.. सुजात ने कहा कि ये केवल इसलिए किया गया ताकि निचले वर्ग के लोग सरकार की व्यवस्था पर सवाल न उठा सकें, पिछड़े और बहुजनो को कमजोर करने के लिए उनके खिलाफ गहरी साजिश की जा रही है, ताकि हम शसक्त न हो, उन्होंने कहा कि राज्य में न्याय सबके लिए समान नहीं है। सुजात अपने पिता के साथ एक मजबूत स्तंभ की तरह सदैव खड़े रहे है। चाहे वो चुनावी रैलियां हो या फिर पार्टी की बैठके।

सुजात एक ऐसे व्यक्ति है जो ये मानते है कि जातिगत आरक्षण नहीं होना चाहिए, बल्कि एससी एसटी वर्ग (SC/ST category) के आने वाले धनी लोगो को उन लोगो की मदद करनी चाहिए जो वाकई में आर्थिक रूप से कमजोर है। वो शिवसेना के कट्टर आलोचक भी है,,2019 में उन्होंने कहा था कि शिवसेना जिनके हाथो में थी वो सही मायने में उसके काबिल नहीं थे। वो महाराष्ट्र को छोड़ उन मुद्दो पर चर्चा करते है जिनके महाराष्ट्र की जनता को कोई लेना देना नहीं है। सुजात अब भी पत्रकारिता करते है और अपने पिता की पार्टी को भी संभाल रहे है। सही मायने में वो अपने परिवार की लेगेसी को आगे बढ़ाने के मामले में सहीं उत्तराधिकारी है।  

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