Gautam Buddha teachings: क्या आपको पता है कि आपकी सबसे बड़ी ताकत कब दिखाई देती है।। किसी पर गुस्सा आए तो आप अपना गुस्सा उनपर चिल्ला कर,या अपने से कमजोर पर चिल्ला कर , उसे अपमानित करके निकाल लेते है, लेकिन क्या उससे आप ताकतवर दिखाई देते है.. हरगिज नहीं.. गुस्से का बदला लेने के लिए खुद गुस्सा करना, दूसरो को अपमानित करना आपकी ताकत नहीं आपकी कमजोरी की निशानी है.. सच तो ये है कि आप वाकई में दिखाना चाहते है कि आप कितने ताकतवर है तो शांत रहिए.. कुछ देर की शांति न केवल आपको ताकतवर बनाती है बल्कि समाज में सम्मान का पात्र भी बना देती है.. बुद्ध की दी गई अनगिनत सीखों में से एक ऐसी सीख.. जिसे आत्मसात करना हर किसी के बस की बात नहीं.. लेकिन जिसने इसे अपनी जिंदगी में उतार लिया वो ही महानता के मार्ग पर चलने लगा.. वो मुक्ति के मांर्ग पर चलने लगा। अपने इस लेख में हम गौतम बुद्ध की सबसे महान सीख के बारे में बारे में जानेंगे जिसे सुनकर आपका भी जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा।
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गौतम बुद्ध की महान सीख
ज्ञान प्राप्त करने के बाद, बुद्ध ने जाति-आधारित भेदभाव और सामाजिक ऊँच-नीच से मुक्त समाज बनाने की पहल की—एक ऐसा समाज जहाँ सब बराबर हों। वहाँ न तो कोई ‘अछूत’ था और न ही ‘ऊँची जाति’ का व्यक्ति; बल्कि, सभी बस बुद्ध के अनुयायी थे, जो एक जैसे कपड़े पहनते थे और एक जैसे आदर्शों को मानते थे। उनकी शिक्षाओं ने पिछड़ी और ‘अछूत’ जातियों के लोगों को उनकी शरण में आने के लिए प्रेरित किया, जिससे उस समय की ब्राह्मणवादी विचारधारा को करारी चोट पहुँची। बुद्ध ने सिखाया कि इंसान की पहचान उसकी अपनी सोच से होती है। दूसरों को हराने की होड़ में हम अक्सर सभी मर्यादाएँ भूल जाते हैं—एक ऐसी आदत जो हमारे अपने दुख और असफलता का कारण बनती है। दूसरों को हराने पर ध्यान देने के बजाय, इंसान को खुद पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए; खुद पर काबू पाना ही सबसे बड़ा सबक है।
भविष्य की चिंता न करें
हम अक्सर बीते हुए समय के बारे में सोचते रहते हैं और भविष्य की चिंता करते हैं, लेकिन ज़रा सोचिए: क्या इन दोनों पर आपका कोई कंट्रोल है? नहीं, बिल्कुल नहीं—तो फिर चिंता क्यों करें? इसके बजाय, आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आप अभी जो कुछ भी करते हैं, उसका नतीजा कल सामने आएगा। उदाहरण के लिए, कोई परीक्षा ही ले लीजिए: अगर आप पढ़ाई करेंगे, तो अच्छे नंबर आएंगे; अगर आप परीक्षा नहीं देंगे, तो फेल हो जाएंगे। आपके साथी आपसे आगे निकल जाएंगे और आने वाले सालों में आपसे एक कदम आगे रहेंगे—यानी आज के कामों का नतीजा आपको कल भुगतना ही होगा। हम दुनिया के सामने अपनी छवि को लेकर इतनी चिंता करते हैं कि असल में जीना ही भूल जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमें सिर्फ़ एक ही ज़िंदगी मिली है; तो फिर, आप इसे दूसरों की चिंता में कैसे बिता सकते हैं? जब आपके अपने किसी तकलीफ़ में होते हैं, तो आप परेशान हो जाते हैं, लेकिन ज़रा सोचिए: अगर ऐसी स्थितियों में घबराने के बजाय आप शांत रहें, तो हो सकता है कि आपको ऐसे समाधान मिल जाएं जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी न हो।
मौन रह कर मन को शांत रखे
हर बात की प्रतिक्रिया देने के बजाये मौन रह कर देखिये.. जब लोगो आपसे किसी प्रतिक्रिया की अपेक्षा करते है तो जरा शांत रह कर देखिये.. किसी ने गलती की तो उस पर गुस्सा करने के बजाये, उसे दोषी ठहराने के बजाय सिचुएशन को आप अपने उपर रख कर देखिये.. आप खुद ही शांत हो जायेंगे। शांत रहना, मौन रहना बौद्ध धर्म की, बुद्ध की बताई सबसे बड़ी सीख है। इससे सामने वाले के अंदर आपके लिए सम्मान खुद ही आ जाता है। वो आपके प्रति ईमानदार हो जाता है। जो बुद्ध को मानता है, बुद्धत्व को पाता है वो स्वयं को पा लेता है.. फिर उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, कौन उसका अपमान करता है, और कौन सम्मान.. वो सभी के साथ न्यूट्रल ही रहते है। ध्यान रखिये, किसी के लिए मन में मैल रखना, गुस्सा रखना बिल्कुल उस गर्म जलते कोयले की तरह है जो आपने दूसरे पर फेंकने के लिए हाथ में उठा लिया है, जो सामने वाले के साथ आपको भी जलाने वाली है।
आप अगर वाकई में सच्चे सुख की, शांति की कामना करते है तो आपको हर हाल में संतुलित रहना होगा। न तो किसी से ज्यादा लगाव रखिये और न किसी से बहुत दूरी.. सबको एक समान देखिये। जब आप शांत रहना की कला सीख लेते है तो खुद ब खुद बुद्ध के करीब जाने लगते है। आप उस प्रकाश को महसूस करने लगते है जो आपको दुखों से बाहर ले जा रहा है। जुबान की थोड़ी देर की शांति आपके मन को लंबे समय तक शांति दे सकती है।



